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बोकारो : अवैध शराब कारोबार के पीछे पुराने शराब सिंडिकेट का हाथ !

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Bokaro : साल भर पहले बोकारो और दूसरे कई जिलों में शराब सिंडिकेट को चलाने वाला, कहीं बोकारो में पनप रहे अवैध शराब कारोबार का मास्टर माइंड तो नहीं? यह सवाल इसलिए मौजूं हो जाता है, क्योंकि लाख कोशिशों के बाद भी बोकारो प्रशासन अवैध शराब कारोबार पर रोक नहीं लगा पा रहा है. बालीडीह में भले ही पुलिस एक्का-दुक्का अवैध शराब के ठीकानों पर छापेमारी कर अपनी पीठ थपथपा ले. लेकिन सवाल यह कि क्या कभी प्रशासन की हथकड़ी अवैध शराब कारोबारी के सरगना को लगती है. जवाब है कि अवैध शराब कारोबारी एक ऊंची पहुंच वाली ऐसी शख्सियत है, जिसपर प्रशासन नकेल कसने की जहमत नहीं उठा सकता. कई सालों से शराब के कारोबार से जुड़े रहने की वजह से वो सारे हथकंडे उन्हें पता है, जिसे अपनाए जाने के बाद कोई उनका बाल भी बांका नहीं कर सकता.

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अवैध शराब कारोबार से होता है डबल मुनाफा

पुराने शराब सिंडिकेट के लिए बोकारो का अवैध शराब कारोबार दुधारी तलवार की तरह साबित हो रहा है. शराब कारोबार अचानक से छिन जाने से दूसरे किसी कारोबार में हाथ-पैर जमाने में काफी वक्त लगता है. ऐसे में ऐसा प्लान बनाया गया जिससे सिंडिकेट शराब कारोबार से भी जुड़ा रहा और सरकारी दुकानों में अपनी माल खपत करा कर मुनाफा बनाता रहा. अवैध शराब के कारोबार से आजिज होकर सरकार अगर सरकारी दुकानों पर ताला लगाने और पुरानी व्यवस्था को लागू करने की सोचती भी है, तो उसमें सबसे ज्यादा मुनाफा इसी सिंडिकेट का है. वापस से पुरानी व्यवस्था लागू हो जाएगी. अवैध शराब का कारोबार फिर से एक वैध बिजनस हो जाएगा.

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सरकारी दुकानों में पुराने सिंडीकेट का ही कब्जा

राज्य में शराब व्यवस्था जैसे ही सरकार ने अपनी हाथों में लिया पुरानी सिंडिकेट ने प्लान बी बनाया. सरकार की तरफ से दो कंपनियों को सरकारी दुकानों पर कर्मी रखने के लिए आउटसोर्स का काम दिया गया. सिंडीकेट की पकड़ और शराब कारोबार से जुड़े पुराने लोगों की फौज का काफी फायदा सिंडिकेट को हुआ. फ्रंटलाइन और शोमुख जैसी कंपनी को झारखंड में शराब का तजुर्बा नहीं था. ऐसे में सिंडिकेट ने अपने सारे लोगों को कंपनी के जरिए सरकारी शराब दुकानों में पहुंचा दिया. दुकानों में पहुंचे सिंडिकेट के लोग अवैध शराब को दुकान से खपाने का काम खूब कर रहे हैं. ऐसा करने पर उन्हें एक अच्छी खासी रकम सिंडिकेट की तरफ से मिल जाती है.

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शराब कारोबार को लेकर मशगूल होती राजनीति

कोयलांचल या कहीं भी जहां जिसकी पैदावार होती है. राजनीति भी उसी को लेकर होनी शुरू हो जाती है. बोकारो में पनप रहे अवैध शराब के कारोबार के जाल को लेकर राजनीति शुरू हो चुकी है. जेएमएम के केंद्रीय सदस्य मंटू यादव बोकारो में पनप रहे अवैध शराब के कारोबार को लेकर बोकारो डीसी मृत्युंजय कुमार बर्णवाल से मिले. उन्होंने पूरे मामले की जांच सीआईडी से कराने की बात डीसी से की. डीसी को सौंपे ज्ञापन में उन्होंने साफ कहा कि इस जहर के कारोबार में उत्पाद विभाग और प्रशासन की मिलीभगत है. ऐसे में इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए. वहीं उन्होंने न्यूज विंग से बात करते हुए वहां के विधायक और सांसद पर आरोप लगाया कि वो इस कारोबार को संरक्षण दे रहे हैं. उन्होंने जिले भर के शराब दुकानों में ओवर रेटिंग की भी बात डीसी से कही. कहा कि आखिर ज्यादा वसूले गए पैसे जाते कहां हैं.

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