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बोकारो : ना खेती का साधन और ना ही पानी की सुविधा, रोजगार के अभाव में पलायन कर रहे शांखाकुडी के ग्रामीण

- पानी नहीं, बिजली के तार लगे हैं दिन भर में दो घंटे बिजली नहीं मिलती

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Prakash Mishra

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Bokaro :  जिले के चंदनकियारी के कालिकापुर पंचायत के अंतर्गत शांखाकुडी गांव है. इस गांव के करीब एक सौ से ज्यादा युवा रोजगार के अभाव में पलायन कर गये. क्योंकि गांव में कोई सिंचाई की सुविधा नहीं है, जिससे वो खेती करके भी जीविका चला सकें.

अब आलम ये है कि गांव में एक भी युवा नजर नहीं आते हैं. इस बारे में पीछने पर ग्रामीणों का एक ही जवाब रहता है कि चंदनकियारी हो या बोकारो शहर यहां काम नहीं मिलता और खेती का कोई साधन भी नहीं है.

यही वजह है कि गांव के युवा बेंग्लुरू, चेन्नई, मुंबई में जाकर काम करते हैं. कई युवक तो आईटीआई की पढ़ाई भी कर चुके हैं, उन्हें भी चंदनकियारी के इलेक्ट्रोस्टील कंपनी हो या बोकारो के दूसरे कंपनी में स्थायी काम नहीं मिलता. जिससे सभी दूसरे शहरों में पलायन कर रहे हैं.

गांव के रहने वाले अरुण कुमार महतो बताते हैं कि वे खुद धनबाद में काम करते हैं, उनके दो बेटे आईटीआई कर गांव में बेकार बैठे हैं. साथ ही अरूण ने कहा कि यहां सिंचाई की व्यवस्था हो  जाये, तो पलायन करने वाले लोग ही खेती करके गांव की तस्वीर बदल सकते हैं.

अरूण ने कहा कि इस दिशा में किसी भी सांसद ने अब तक कोई पहल नहीं की. यही वजह है कि पहले की तरह अब यहां चुनाव के दौरान उत्साह नहीं दिखता.

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किसानों की दोगुणी आय का दिखाया गया था सपना

बोकारो : ना खेती का साधन और ना ही पानी की सुविधा, रोजगार के अभाव में पलायन कर रहे शांखाकुडी के ग्रामीण

केंद्र सरकार ने किसान को दोगुणी आय का सपना दिखाया था. उस सपने के अनुरुप शांखाकुड़ी में खेती-किसानी को बढ़ावा देने के लिए कोई साधन नजर नहीं आता है. गांव के किनारे होकर बहने वाली नदी बड़ा जोरिया में साल 2007-08 में सिरीज ऑफ चेक डैम योजना के तहत पांच अलग-अलग स्थानों पर चेक डैम बनाये गये.

लेकिन उसका कोई लाभ गांव के किसानों को नहीं मिल सका. उन डैमों के दोनों ओर पंप हाउस भी बने हुए हैं. ताकि डैम से पानी किसानों के खेतों तक पहुंचाया जा सके. लेकिन डैम के आस-पास कोई पाईप लाईन नजर नहीं आता है.

डैम के बारे में गांव के ही आसित कुमार महतो, सुभाष चंद्र महतो और छोटेलाल महतो ने बताया कि डैम सिर्फ नाम का बना हुआ है. इसमें पानी का ठहराव नहीं होता है. सभी डैमों में बालू भर गया है. कहीं पर किसी भी तरह की सुविधा नहीं है.

जिससे किसानों की रुचि खेती से खत्म हो रही है. अब हर कोई मौसम पर आधारित खेती ही करते हैं. इस बार मौसम ने धोखा दे दिया, जिससे यहां से लोगों का पलायन जारी है.

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बिजली दिन भर में दो घंटे भी नहीं रहती

गांव में बिजली भी दो घंटे से ज्यादा नहीं रहती. अगर आंधी और बारिश हो जाये, तो बिजली कई दिनों के लिए गायब हो जाती है. गांव के रहने वाले विश्वनाथ महतो ने कहा कि इस गांव के लोगों ने खुद से चंदा करके बिजली का पोल और तार लगावाया है.

बिजली को आये करीब एक साल हो गये. लेकिन अभी भी बिजली की हालत खस्ता ही है. जिससे शाम होते ही गांव में अंधेरा पसर जाता है और बच्चों को पढ़ाई में भी काफी दिक्कतें होती हैं.

पीने के पानी के लिए करना होता है मशक्कत

करीब चार सौ घरों के शांखाकुडी गांव में पीने के पानी की किल्लत गर्मी आते ही शुरु हो गई है. गांव में 15 से ज्यादा चापानल लगे हुए हैं. लेकिन उनमें चालू हालत में मात्र पांच ही हैं.

जिसमें सुबह से लेकर शाम तक पानी भरने के लिए गांव की महिलाओं की भीड़ लगी रहती है. कुछ ऐसे घर है जिनके पास अपना निजी कुंआ है. लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर कहीं पर कोई कुंआ नहीं है.

तालाब अभी से ही सूख चुके हैं. जबकि लगभग घरों में शौचालय भी बन चुका है. लेकिन पानी की कमी की वजह से लोग शौचालय का उपयोग नहीं कर पाते हैं.

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