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बोकारो: ग्रामीणों की दो टूक- गुड़गुड़ी गांव में बूथ नहीं तो इस बार वोट नहीं

Prakash Mishra

Bokaro: धनबाद लोकसभा क्षेत्र में बोकारो जिले के चास प्रखंड स्थित राधानगर पंचायत के गुड़गुड़ी गांव के लोगों ने साफ कह दिया है कि इस बार उनके गांव में मतदान केंद्र नहीं बनेगा. तो गांव का कोई भी शख्स दो किलोमीटर दूर चलकर वोट डालने नहीं जायेगा.

बता दें कि इस गांव के लिए बूथ राधानगर उत्क्रमित मध्य विद्यालय में बनाया जाता है. जो दो किमी दूरी पर है. इलाके में 12 मई को मतदान होना है.

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बूथ नहीं तो वोट नहीं

गांव के लोगों ने यहां पूरी तरह से वोट बहिष्कार करने का मन बना लिया है. पंचायत के पूर्व उप मुखिया सुधीर कुमार मंडल ने बताया कि 2014 से ही गुड़गुड़ी गांव में मतदान केंद्र बनाने की मांग गांव के लोग कर रहें है. कई बार अधिकारियों को आवेदन भी दे चुके हैं.

इस बार भी आवेदन 30 मार्च को दिया गया है. लेकिन इस दिशा में कोई पहल होती नहीं दिख रही है. जबकि हर पंचायत चुनाव में यहां पर मतदान केंद्र बनता है. लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मतदान केंद्र नहीं बनने से लोगों को काफी परेशानी होती है.

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करीब 762 वोटर हैं राजस्व ग्राम गुड़गुडी में

राधानगर पंचायत के राजस्व ग्राम गुड़गुड़ी में करीब 762 लोगों का नाम मतदाता सूची में दर्ज है. हर बार यहां के लोगों के राधानगर मतदान करने जाना होता है.

जिस कारण काफी संख्या में बुजुर्ग मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग दूरी के कारण नहीं कर पाते हैं. वहीं जब तक कई लोग बूथ
तक पहुंचते हैं, तब तक उनके नाम से बोगस मतदान हो चुका होता है.

ऐसे में यहां के लोगों को गांव में बूथ की सुविधा मिलनी चाहिए, जबकि पड़ेास के पंचायत चैनपूर के बारुडीह गांव के लोग अपने गांव में ही मतदान करते हैं.

दस वर्षो में सांसद का दीदार नहीं

यहां के लोग जिला प्रशासन से मतदान केंद्र की व्यवस्था नहीं किये जाने को लेकर नाराज दिख ही रहे हैं. वहीं लगातार दस वर्षो से सांसद रह चुके पीएन सिंह से भी खासे नाराज भी हैं. गांव के रहने वाले सुनील राय, रंजीत ठाकुर, संतोष मंडल, राजेश गोप, रामलाल कपरदार सहित कई लोगों ने बताया कि पीएन सिंह भाजपा पार्टी से लगातार दो बार सांसद रहें हैं.

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लेकिन इस गांव के लोगों ने उन्हें कभी नहीं देखा और न ही उनकी कोई योजना इस गांव में पहुंची. गांव के बाहर पानी की एक टंकी है वो भी अधूरी पड़ी है. उसी तरह पीने के पानी के लिए सात चापानल चालू हालत में है. जबकि पांच चापानल खराब हैं.

इसी तरह सिंचाई के लिए किसी भी प्रकार की कोई सुविधा गांव में नहीं है. किसान पूरी तरह से वर्षा आधारित कृषि पर निर्भर है. जबकि गांव के बगल से गुजरी मेहंदी जोरिया में सिरिज ऑफ चेक डैम लघु सिंचाई विभाग की ओर से बनाया गया है. लेकिन जहां पर पानी की एक बूंद भी जमा नहीं होती और माईक्रोलिफ्ट भी सरकारी लूट का अड्डा बन गया है.

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