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बोकारोः #SAIL के साथ मिलकर पैलेट प्लांट स्थापित करने की कोशिश में #KIOCL

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DK

Bokaro: KIOCL लिमिटेड (Kudremukh Iron Ore Company Limited), बोकारो में स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के साथ एक पैलेट प्लांट स्थापित करने की संभावनाओं को वास्तविक रूप देने की कोशिश में है.

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सेल की इकाई बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के परिसर में 2 MTPA क्षमता के पैलेट प्लांट स्थापित करने के लिए तकनीकी-आर्थिक व्यवहारिकता का अध्ययन कर रहा है.

गौरतलब है कि इस साल जनवरी में KIOCL ने SAIL के एकीकृत पांच स्टील प्लांटों में उपयुक्त स्थान पर एक पैलेट प्लांट लगाने के लिए समझौता करने की घोषणा की थी. इसमें से बीएसएल के पास विशाल लैंड बैंक है, जिसे पैलेट प्लांट की स्थापना के लिए सबसे अच्छी जगह माना जाता है.

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संचार विभाग के प्रमुख बीएसएल मणिकांत धन ने कहा कि केआइओसीएल टीम ने बीएसएल के कुछ दौरे किए है, अभी इसपर विचार चल रहा है.

गौरतलब है कि सेल के पांच एकीकृत स्टील प्लांट हैं, जिसमे बर्नपुर में इस्को स्टील प्लांट (पश्चिम बंगाल), दुर्गापुर स्टील प्लांट (पश्चिम बंगाल), भिलाई स्टील प्लांट (छत्तीसगढ़), राउरकेला स्टील प्लांट (ओडिशा) और बीएसएल (झारखंड) में है.

KIOCL भारत सरकार का पैलेट निर्माण उद्योग का एक अग्रणी संगठन है, जिसका कर्नाटक के मैंगलोर में 3.5 MTPA पैलेट प्लांट है.

केंद्रीय इस्पात मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई में यहां अपनी यात्रा पर पूर्वी भारत के विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए बोकारो में स्टील क्लस्टर बनाने की घोषणा की थी.

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प्रधान ने तब कहा था कि बीएसएल को ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड के केंद्र में स्थित होने का लाभ होगा. इस्पात उद्योग से संबंधित विनिर्माण इकाइयों को यहां स्थापित करने में सुविधा होगी. उन्होंने यह भी कहा था कि बीएसएल उत्पादन को बढ़ाया जाएगा.

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भारतीय इस्पात उत्पादन क्षमता में 300 MTPA की वृद्धि की आवश्यकता है. एक अधिकारी ने कहा कि झारखंड में 27 प्रतिशत भारतीय कोयला भंडार, 29 प्रतिशत लौह अयस्क भंडार और मजबूत इंजीनियरिंग, ऑटोमोटिव और स्टील उद्योग हैं.

पैलेट, सिन्टर का एक विकल्प है जिसका उपयोग स्टील के निर्माण में किया जाता है.  पैलेट प्लांट की स्थापना से भारी निवेश आएगा और रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे.

हालांकि, पिछले पांच वर्षों से बीएसएल अपने उत्पादन की लागत को कम करने के उद्देश्य से एक पैलेट प्लांट स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है.

2015,में बीएसएल ने पैलेट प्लांट स्थापित करने की पहल की थी लेकिन चीजें अंतिम चरण में पहुंच कर रुक गई. यहां तक ​​कि उस समय बीएसएल ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) को अपने प्रस्तावित दो मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) पैलेट प्लांट के लिए पर्यावरण मंजूरी के लिए संपर्क किया था.

बीएसएल के एक अधिकारी ने कहा, खनन की प्रक्रिया के दौरान खदानों में उत्पादित फाइन्स पर्यावरणीय खतरों का कारण बना हुआ है.

पैलेटिसाइसैशन प्रक्रिया के तहत फाइन्स को सॉलिड लिक्विड में परिवर्तित किया जाता है, जिसे सीधे स्टील बनाने की प्रक्रिया के लिए ब्लास्ट फर्नेस मे डाला जाता है. इस उद्देश्य के लिए बोकारो में पैलेट प्लांट लगाने की योजना है.

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