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बोकारोः गंदे नाले का पानी पीने को विवश झुमरा पहाड़ के ग्रामीण

Prakash Mishra

Bokaro: राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का वादा बोकारो जिले में धोखा साबित हो रहा है. जिस झुमरा पहाड़ और आस-पास बसे गांवों के विकास के लिए झुमरा एक्शन प्लान बनाया गया.

और जिसके तहत योजनाओं को पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश की ओर से जमीन पर उतारने का प्रयास शुरु हुआ था. उसका असर इन बीते पांच वर्षो की सरकार में नहीं दिखा.

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आज भी झुमरा पहाड़ पर बसे गांवों के लोग गंदे नाले का पानी पीने को विवश हैं. एक्शन प्लान के नाम पर सिर्फ पहाड़ के ऊपर चढ़ने की सड़क और आस-पास के गांवों में पक्की सड़क बनी.

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लेकिन इसके अलावे किसी भी तरह का कोई काम नहीं हुआ.
जिस कारण आज भी लोग गर्मी आते ही पानी के लिए तरसने लगते हैं. जबकि इस पहाड़ के आस-पास ऐसे कई जलश्रोत है, जिनका प्रबंधन कर इस पूरे इलाके में बसे आठ पंचायतों के लोगों की प्यास बुझायी जा सकती है.

गंदे नाले का पानी पीने को विवश ग्रामीण

गोमिया प्रखंड के पचमो पंचायत में झुमरा पहाड़ का पूरा इलाका आता है. पहाड़ के ऊपर बसे पदनाटांड और बिहायीमहुआ टोला में रहने वाले ग्रामीणों की संख्या करीब 350 के आस-पास है.

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नाले की सफाई करते ग्रामीण

ग्रामीण पहाड़ के ऊपर से गिरने वाले पानी को एक जगह जमा करते है, उसके बाद पाइप की मदद से गांव तक पानी पहुंचता है.

फिलहाल ऐसी स्थिति हो गई कि नाला में पानी जमा नहीं हो रहा है. बुधवार को ग्रामीणों ने श्रमदान देकर उस नाले की सफाई की. ताकि साफ पानी वहां पर जमा हो और गांव तक पहुंच सके.

एक अहम बात ये भी है कि इसी पानी का उपयोग गांव के स्कूल में बच्चों के लिए मीड डे मिल बनाने में भी किया जाता है. गंदे पानी की वजह से यह पूरा इलाका डायरिया जोन के नाम से भी जाना जाता है.

गांव के सामाजिक कार्यकर्ता उमेश महतो, प्रकाश रजवार, अनिल रजवार, तिलेश्वर महतो, होरिल महतो, मनोज रजवार, चंदर रजवार, निरंजन महतो आदि ने बताया कि इस इलाके में पानी को लेकर कोई व्यवस्था नहीं की गई.

जबकि जब भी इलाके में जिला प्रशासन ने जनता दरबार लगाया गया. हर तरह की समस्या को दूर करने का आश्वासन दिया गया. लेकिन वो सिर्फ आश्वासन तक ही सीमित रह गया.

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10 सालों में भी नहीं बदली तस्वीर

जो स्थिति एक दशक पूर्व थी, वह आज भी वही है. ठीक ऐसी ही स्थिति जमनीजारा टोले की भी है, वहां के ग्रामीण भी नाले का पानी पीने को विवश है. बुनियादी सुविधाओं से महरूम गांव में गर्मी शुरू होते ही पानी की मारामारी शुरू हो जाती है.

चुनाव में वादा कर भूल जाते नेता

लोकसभा चुनाव हो या विधान सभा चुनाव हर बार नेताओं का झुंड झुमरा पहाड़ के इलाकों में घूमता है. और पानी की समस्या को दूर करने का आश्वासन देता है. लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद कोई नेता इन गांवों की ओर देखते भी नहीं है.

फिलहाल लोकसभा चुनाव को लेकर इन गांवों में भी नेताओं का दौरा शुरु होगा. इस बार भी ग्रामीण पानी की समस्या को रखेंगे, अब देखना है कि इस चुनाव के बाद भी इनकी समस्या दूर होती है या नहीं.

गोमिया में कार्यरत है कई महारत्न कंपनियां

झुमरा के गांवों की समस्याएं राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने मिलकर दूर करने का संकल्प लिया था. जिसमें सरकार इस इलाके में काम करने वाली महारत्न कंपनी सीसीएल, ओएनजीसी का भी सहयोग ले सकती थी.

इलाके में सीसीएल के सीएसआर से भी कई काम हो सकते थे. लेकिन इस इलाके में ऐसा कोई काम नहीं हुआ, जबकि हाल में इस इलाके में सक्रिय हुई ओएनजीसी कंपनी ने सीएसआर के कई काम शुरु किये. लेकिन उनकी भी नजर इस इलाके में नहीं पड़ी.

इन कंपनियों के अधिकारियों तक न तो गांववालों की पहुंच है, और न ही पंचायत के प्रतिनिधियों की. ऐसे में अगर जिला प्रशासन ठोस पहल करें, तो कम से कम झुमरा पहाड़ के गांवों में पानी की किल्लत दूर हो सकती है.

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