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बोकारो में बंद होने का नाम नहीं ले रहा है लोहा चोरी

किसी न किसी दिन हर इलाके से हो रही है चोरी

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Bokaro :  बोकारो स्टील प्लांट के किसी न किसी हिस्से से हर दिन लोहा चोरी  का खेल चल रहा है. करीब एक पखवारे पूर्व बोकारो रेलवे सुरक्षा बल के  अधिकारियों ने भारी मात्रा में रेलवे का लोहा माराफारी थाना क्षेत्र के  आजाद नगर से बरामद किया था. उसके बाद शुक्रवार को बालीडीह औद्योगिक क्षेत्र ओपी पुलिस को प्लांट के सुरक्षा में तैनात सीआइएसएफ के जवानों ने एक पिकअप वैन में लदा लोहा का टुकड़ा के साथ जब्त कर सौंपा. जानकारों की माने तो यह लोहा का टुकड़ा मात्र 50 किलो के आस-पास है. जबकि मात्र 50 किलो के लिए कोई लोहा तस्कर पीकअप वाहन का उपयोग क्यों करेगा.

इससे  स्पष्ट है कि बोकारो स्टील प्लांट के स्लैग डंप इलाके में हर दिन काफी मात्रा में लोहा का टुकड़ा चुराया जा रहा है.शुक्रवार को जब सीआइएसएफ के जवानों की नजर पड़ी, उसके बाद मौके से माफिया वाहन को छोड़कर भागने में सफल रहें. स्लैग डंप के आस-पास करीब एक दर्जन से अधिक लोग बोकारो स्टील  प्लांट के निकलने वाले कचड़े से लोहा को चुनवाने का काम करते है, जिसके बाद रात के अंधेरे में उसे माफिया की ओर से बोकारो औद्योगिक क्षेत्र में लोहा गलाने वाली ईकाइओं में आराम से खपा देते है.

हर हिस्से में सक्रिय हैं लोहा तस्कर

बोकारो स्टील प्लांट से हर हिस्से में लोहा तस्कर सक्रिय हैं. चाहे वह बोकारो स्टील प्लांट से सटा रेलवे का स्टॉक यार्ड हो या स्टील प्लॉट के पीछे कचड़ा लोहा फेंकने वाला स्लैंग डंप. तस्करों को जहां से मौका मिल रहा है, वहां से लोहा का उड़ा रहें है और रात के अंधेरे में उद्योगों में पहुंचा रहें है. यह कार्य कैसे और किनके सरंक्षण में चल रहा है, यह भी जांच का विषय है. लेकिन यहां पर सब कुछ तस्कर सेट किए हुए है और बेखौफ रात के अंधेरे में यह धंधा चल रहा है. आरपीएफ की ओर से आजाद नगर में किये गये छापेमारी के बाद कुछ दिनों तक यह धंधा बंद रहा, लेकिन इस बार धंधा का एरिया स्लैंग डंप हो गया है. जहां पर रात को पुलिस को पहुंचने में दिक्कत होती है और जिसका लाभ यहां पर तस्कर उठा रहें है.

जो मिला उसे ही उठा लेते हैं तस्कर के गुर्गे

तस्कर के गुर्गे रेलवे के करीब 10 किलोमीटर इलाके में फैले यार्ड में जहां-तहां फेका हुआ लोहा को उठा रहें है. कहीं भी सुनसान स्थान पर स्टॉक करते हैं, उसके बाद रात के अंधेरे में छोटे पीकअप वाहन को लाकर उसमें लादते है. रात के अंधेरे में ही उसे उद्योग तक पहुंचाते हैं. तस्करों के गुर्गो का दो-तीन गिरोह इलाके में सक्रिय है और रात में उन सभी गिरोह पर नजर रखने का काम खुद तस्कर ही कर रहें है, ताकि कहीं पर किसी भी प्रकार की चुक न रहें.

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