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बोकारो: कैसे बढ़े किसानों की दोगुनी आय, जब सिंचाई व्यवस्था ही हो जाये फेल

कृषि बहुल कसमार प्रखंड में चार दर्जन से अधिक चेक डैम बन गये हैं डेड एसेट

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Bokaro: देश के किसानों की दोगुनी आय बढ़ाने को लेकर केंद्र से लेकर राज्य सरकार की ओर से दावे किये जा रहें हैं, लेकिन जब किसानों को उचित सिंचाई सुविधा ही न मिले, तो उनकी आय बढ़ने की बात करनी ही बेमानी होगी. बोकारो जिले का कसमार प्रखंड पूरी तरह से कृषि पर आधारित है. जिस कारण इसे कृषि बहुल प्रखंड भी कहा जाता है. किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर लघु सिंचाई विभाग, भूमि जल संरक्षण और वन विभाग की ओर से चार दर्जन से अधिक चेक डैम जोरिया में बनाया गया है, लेकिन सभी चेक डैम अब डेड एसेट बन गये है. जिस कारण उन सभी चेक डैमों का उपयोग नहीं के बराबर हो रहा है. देखा जाय तो हर साल किसी न किसी जोरिया में चेक डैम बनाने का काम कोई न कोई विभाग करता है, अभी भी कई नए स्थानों पर चेक डैम बन रहे हैं, जिसमें कुछ अधूरे भी पड़े हुए हैं. यह योजना पूरी तरह से विभागीय लूट का हिस्सा बना हुआ है. इस लूट पर विभागीय अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक पर्दा डाले हुए हैं. इन योजनाओं से न तो किसान खुश हैं और न ही आम जन.

सबसे अधिक डैम भगत बोहवा जोरिया में बने

कसमार में भगत बोहवा जोरिया चेक डैम माफियाओं के लिए वरदान साबित हुआ है. इस जोरिया में करकट्टा का ब्राह्मणडीह में हाल के दिनों में दो चेक डैम बने. इसी पर जम्हार गांव के पास दो चेक डैम, ठीक उससे नीचे एक पुराना डैम बना हुआ है. इसी जोरिया पर ओरमो गांव के नीचे ईंट भट्ठा के पास दो डैम बने हुए हैं. इन सभी का उपयोग आज तक नहीं हुआ. इसी तरह दुर्गापुर गांव के चडरिया नाला में चार चेक डैम, बगदा गांव के पास खांजो नदी पर दो चेक डैम, कूचिया नाला में चार चेक डैम, मृगखोह में एक चेक डैम, गर्री के केंदुआटांड में एक चेक डैम, मणिपुर के काडाधोआ जोरिया में दो चेक डैम बने हुए है. ये सभी के सभी निरर्थक साबित हुए हैं. चेक डैम के साथ माईक्रोलिफ्ट भी लगाने का काम हुआ है. लगभग सभी चेक डैम झारखंड राज्‍य अलग गठन होने के बाद ही बने है. लेकिन इन 18 वर्षो में कसमार में सिर्फ चेक डैम बनाकर सरकारी पैसे का लूट हुआ है.

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कृषि से संवर सकती है कसमार की तस्वीर

कसमार कृषि के मामले में काफी समृद्ध इलाका है, इन इलाकों के किसानों को सुव्यवस्थित तरीके से खेती के संसाधन सिर्फ सरकार की ओर से उपलब्ध कराये जायें तो यहां हर मौसम में सभी तरह के फसलों की खेती हो सकती है. पर सिंचाई सुविधा किसानों के अनुरुप इन इलाकों में कभी जमीन पर उतारा ही नहीं और करोड़ों रुपए सरकार के पानी में बह गये. जबकि देखा जाय तो कसमार के चंडीपुर गांव में रहने वाले कई किसान परिवार अपनी खेतों में बने कुंआ की मदद से हर मौसम में सब्जी का उत्पादन करते हैं. इसके अलावे भी कई ऐसे गांव जहां के किसान सब्जी का उत्पादन कर पेटरवार और खैराचातर के बाजार में सब्जी हर सप्ताह बेचते हैं.

चेक डैम मामले की जांच होनी चाहिये

झामुमो के केंद्रीय सदस्य सह मुखिया सिकंदर कपरदार ने कहा कि प्रखंड के जिन स्थानों पर चेक डैम बने हैं. वे सही स्थान पर नहीं है. जिस कारण किसान उनका उपयोग नहीं करते. जबकि चेक डैम बनाने से पूर्व किसानों के साथ अधिकारियों को बैठक करना चाहिए, लेकिन ऐसा कहीं नहीं होता. अधिकारी और ठेकेदार मिलकर चेक डैम बनाकर निकल जाते हैं. कसमार में चेक डैम बनाने का एक रैकेट सक्रिय हैं, जो मिलकर विभाग के साथ मिलकर एक बड़ा घोटाले का खेल वर्षों से खेल रहे हैं. जिसकी जांच होनी चाहिए. हर चेक डैम योजना की जानकारी प्रखंड से लेकर जिला तक के अधिकारी को भी है.

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