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बोकारो: डॉ. डीके गुप्ता घर से क्लीनिक तक पसरा सन्नाटा, पुलिस की गिरफ्त से बाहर आरोपी

मकान हड़पने की नीयत से भाई-बहन को उनके ही घर में सालों बनाया बंधक

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Bokaro: जिले के डॉ. डीके गुप्ता फिलहाल बोकारो पुलिस की गिरफ्त से फिलहाल बाहर है. वही आरोपी डॉक्टर के घर से लेकर क्लीनिक तक सन्नाटा पसरा है. मकान, क्लीनिक में ताला लटका है. जिले के नेत्र चिकित्सक डॉ. डीके गुप्ता पर 229 को-ऑपरेटिव कॉलोनी प्लॉट को हड़पने की साजिश रचने एवं प्लॉट के मालिक मंजू श्री घोष और दीपक घोष को वर्षो तक एक कमरे में बंधक बनाने के आरोप में बोकारो स्टील सिटी थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है.

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गुरुवार रात पीड़ितों से पूछताछ

हालांकि ये पूरा मामला चार दिनों से ही चल रहा है. लेकिन पहले दिन भाई-बहन को बंद कमरे से निकालकर पुलिस और कॉलोनी के लोगों ने बीजीएच में इलाज के लिए भर्ती कराया, जहां पर दोनों का इलाज चल रहा है. इधर को-ऑपरेटिव कॉलोनी के प्लॉट नंबर 403 निवासी पूर्णेन्दू कुमार सिंह ने मंजूश्री घोष और दीपक घोष की ओर से सिटी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है. गुरुवार रात को एसपी कार्तिक एस दोनों भाई-बहन से बीजीएच पूछताछ करने पहुंचे थे.

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घर से क्लीनिक तक पसरा सन्नाटा

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डॉ. डीके गुप्ता का घर शहर के बियाडा ऑफिसर्स कॉलोनी के प्लॉट संख्या 10 में है. जहां पर पिछले चार दिन से सन्नाटा पसरा हुआ है, जब से मामले का सामने आया है, उसके बाद से ही डॉ. गुप्ता कॉलोनी में नजर नहीं आ रहे हैं. जबकि उनके घर में एक नौकर रह रहा है, जो कुछ भी बताने से परहेज कर रहा है. ठीक ऐसा ही हाल उनके 229 को-ऑपरेटिव स्थित नवज्योति क्लीनिक का भी है. वहां पर एक महिला मजदूर को घर की सफाई करते मिली. लेकिन उसने भी किसी तरह की जानकारी नहीं होने की बात कही.

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गौरतलब है कि शहर के को-ऑपरेटिव कालोनी में अपने ही घर में एक भाई-बहन को जानवरों की तरह कैद रखा गया था. मकान हड़पने की नीयत से ये सारा खेल रचा गया था. पूरे मामले को लेकर किरायेदार डॉ. डीके गुप्ता की भूमिका संदेहास्पद है. फिलहाल दोनों भाई-बहनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

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