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प्रवासी मजदूरों को रोजगार दिलाने के लिए बोकारो जिला जेएमएम ने हेमंत सोरेन को लिखी चिट्ठी 

Bokaro: कोरोना के संक्रमण के दौरान लगभग 40,000 प्रवासी मजदूर बोकारो जिले में आये हैं. जबकि राज्य में यह संख्या 8-10 लाख के करीब है. मजदूरों के पलायन और घर वापसी में हो रहे कष्ट के लिए पूर्व की रघुवर सरकार और बीजेपी दोषी है. एक ओर राज्य से मजदूर पलायन कर रहे थे और पूर्व की सरकार निवेश के बहाना बना कर हाथी उड़ा रही थी. ये बातें बोकारो के जिला अध्यक्ष ने कहीं. वह मीडिया के सामने सेक्टर वन शिबू सोरेन के आवास पर अपनी बात रख रहे थे.

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झारखंडी मजदूरों का नहीं मिल रहा काम

वहां मौजूद बोकारो महानगर अध्यक्ष मंटू यादव ने कहा कि पांच सालों में रघुवर सरकार ने कोई निवेश नहीं कराया. बल्कि चालू उद्योगों को बंद करा दिया है. इसका ज्वलंत उदाहरण बोकारो औद्योगिक क्षेत्र है. जहां लगभग 200 से अधिक उद्योग बंद हैं. उद्योगों के पास काम नहीं है. जिन उद्योगों के पास काम है उनमें झारखंडी मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है.

उन्होंने कहा कि पांच साल झारखंड का पैसा कर्नाटक और छत्तीसगढ़ की कंपनियों को मिलता रहा. और बीजेपी सरकार लोगों को हाथी का फोटो दिखा कर भ्रमित करने का काम कर रही थी.  उन्होंने कहा कि जेएमएम प्रवासी मजदूरों के नियोजन को लेकर गंभीर है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आदिवासियों और झारखंडी लोगों के लिए दिन रात एक कर दिया है. मजदूरों की समस्या विकराल है इन्हें नियोजित करने के लिए नीति में बदलाव की जरूरत है.

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इसके लिए बोकारो जिला झामुमो ने मुख्यमंत्री को आग्रह पत्र भेज कर कई मांगे रखी हैं.

  • झारखंड में लगनेवाले सभी उद्योगों में 90 फीसदी मजदूर उसी जिले और राज्य के हों जहां कारखाना लग रहा है. निजी उद्योगों में नियोजन की प्रक्रिया में झारखंड सरकार के नियोजनालय की भूमिका निर्धारित हो.
  • 25 करोड़ तक का टेंडर स्थानीय लोगों को दिया जाना है. ऐसे में यह सुनिश्चित हो कि ठेकेदार बाहर के मजदूरों को काम न दें. स्थानीय मजदूरों से काम लिया जाये.
  • निजी अस्पताल, स्कूल और दूसरे एस्टेब्लिशमेंट में रखे जानेवाले मजदूरों में से 90 फीसदी मजदूर झारखंड के हों.
  • उद्योगों को आवंटित होनेवाली भूमि के साथ यह शर्त रखी जाये कि कम से कम 90 फीसदी कर्मी झारखंडी हों. अन्यथा उद्योगों को जमीन आवंटित नहीं की जाये.
  • सार्वजनिक लोक उपक्रमों में काम करनेवाली ठेका कंपनियों एवं अन्य संस्थानों के लिए भी यह नियम बनाया जाये. अपने मजदूरों को संबंधित जिले के नियोजनालय से लिया जाये.
  • सालों से जमीन लेकर उद्योग में काम नहीं करनेवालों की जमीन रद्द करते हुए दूसरे उद्यमियों को दी जाये.
  • बियाडा सहित सभी उद्योगों के लिए नियोजनालय से कर्मी की नियुक्ति करने का निर्देश दिया जाये.

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