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चुनाव से 12 दिन पहले बोकारो में ₹120 kg हुआ प्याज, EVM के इस बटन को दबाकर अपना गुस्सा निकालेगी जनता 

Bokaro: बोकारो विधानसभा चुनाव के ठीक 12 दिन पहले प्याज का भाव आसमान को छेद करता हुआ 120 रुपये किलो हो गया है. शहर के कुछ लोग जो हिम्मत जुटाकर प्याज खरीदने दुकान पर पहुंच रहे हैं वह भी प्याज का भाव सुनकर भाजपा सरकार को अंदर ही अंदर कोस रहे हैं. साथ ही यहां के जनप्रतिनिधियों को बंद जुबान में उलाहना दे रहे हैं.

बोकारो के लोग जितना भाजपा से नाराज नहीं हैं, उससे अधिक उनकी नाराजगी कांग्रेस, झाविमो और आजसू के प्रत्याशियों से है. कारण यह है कि चुनाव प्रचार के लिए प्रत्याशी निकल तो रहे हैं पर प्याज जैसे जनहित मुद्दों पर बात तक नहीं कर रहे हैं. लोगों का मानना है की इन नेताओं का हाल जब चुनाव के पहले ऐसा हैं, तो अगर चुनाव जीत गये तो क्या होगा.

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क्यों लोगों की भावना को छू नहीं पायेंगे पीएम मोदी

इस महीने की 9 तारीख को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार के लिए बोकारो आ रहे हैं. तैयारी जोरों से चल रही है. पर प्याज के बढ़े हुए भाव ने लोगों के उत्साह को मार दिया है.

जिला प्रशासन भी पीएम के आगमन की तैयारियों में है. पर लोगों का कहना है कि प्रशासनिक पदाधिकारी अगर कुछ समय निकालकर दूंदीबाग और अन्य जगहों पर स्थित प्याज के गोदामों के तरफ नजर घुमा दें तो शायद जनता को कुछ रिलीफ मिले और मोदी की बातों का असर उन पर कुछ ज्यादा हो.

क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी बोकारो आ तो रहे हैं पर लोगों की भावना को छू नहीं पायेंगे, क्योंकि शायद ही प्याज के बढ़े हुए दाम और महंगाई जो यहां के लोगों को टीस रही है उसपर वो कुछ बोले.

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इन मुद्दों पर केंद्रित है बोकारो की जनता की चाहत

बोकारो के लोग 370 जम्मू कश्मीर से हटने, राम मंदिर के पक्ष में फैसला आने, आदि पर खुशियां पहले ही मना चुके हैं. अब लोगों की चाहत महंगाई के कम होने और स्थानीय मुद्दे जैसे मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, एयरपोर्ट और क्षेत्र के औद्योगिक विकास इत्यादि पर अधिक केंद्रित है.

लोगों का कहना है कि मोदी आयेंगे, बड़ी-बड़ी बातों और मुद्दों को दोहरायेंगे पर लोकल बातों को नजरअंदाज कर चले जायेंगे. यह विधानसभा का चुनाव है. यहां राष्ट्रीय मुद्दे हावी नहीं होंगे. लोगों को अपने मोहल्ले और शहर की समस्याएं और उसके समाधान की बातें सुननी है, किसी के बहकावे में नहीं आना है.

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नोटा का बटल दबाने का मन बनाये बैठे हैं लोग

वैसे भी बोकारो विधानसभा क्षेत्र में मोदी लहर नहीं के बराबर है. कई लोग तो नोटा का बटन दबाने का मन बनाये बैठे हैं. पिछली बार सबसे अधिक वोटों से जीतने वाले भाजपा के विधायक बिरंचि नारायण मोदी के आने से कॉन्फिडेंस में तो हैं पर उनका जोश पिछली बार के विधानसभा चुनाव जैसा नहीं दिख रहा है. लोग प्याज के बढ़े हुए दामों पर सरकार के रुख से परेशान हैं.

कांग्रेस प्रत्याशी श्वेता सिंह अभी पैर जमाने में लगी हुई हैं. पूर्व विधायक समरेश सिंह की बहू होने का फायदा उनको भले ही मिल जाये पर अभी राजनीतिक परिपक्वता आने में काफी वक्त लगेगा. वैसे भी बोकारो के लोग जान रहे हैं कि श्वेता सिंह का फोकस शहर के तुलना में ग्रामीण इलाकों में अधिक है. शहर के लोगों की परेशानियों को समझने में श्वेता सिंह को वक्त लगेगा.

झाविमो के प्रत्याशी प्रकाश कुमार जिनकी पहचान जन मुद्दों को उठाने से बनी है जाने क्यों नॉमिनेशन फाइल होने के बाद ठंडे पड़ते दिख रहे हैं. बड़े हुए प्याज की कीमत पर ये भी अभी चुप हैं.

आजसू के प्रत्याशी राजेंद्र महतो तो शहर से गायब ही हैं. शायद गांव घूमने के बाद शहर आयेंगे. तब शायद प्याज के मुद्दे पर कुछ बोले. पिछले विधानसभा में 51 परसेंट वोटिंग बोकारो विधानसभा क्षेत्र में हुई थी. इस बार जिला प्रशासन के प्रयास से वोटिंग परसेंट बढ़ने के आसार हैं. देखिए शायद इस बार नोटा का बटन पिछले बार के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार के चुनाव में अधिक दबे. आखिर लोग प्याज के आंसू जो रो रहे हैं.

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