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बकोरिया कांड: हाइकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी सरकार, आदेश जारी

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Ranchi: पलामू के बकोरिया में एक नक्सली और 11 लोगों की कथित मुठभेड़ में हुई हत्या की सीबीआइ जांच के आदेश को झारखंड सरकार चुनौती देगी. सरकार ने इससे संबंधित आदेश जारी कर दिया है. झारखंड हाइकोर्ट ने अक्टूबर माह में इस मामले की सीबीआइ जांच का आदेश दिया था. जिसके बाद 19 नवंबर को सीबीआइ ने प्रथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. सूत्रों के मुताबिक झारखंड सरकार ने 22 नवंबर को एक आदेश जारी कर हाइकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने को कहा है.

उल्लेखनीय है कि सीआइडी इस मामले की जांच करके मुठभेड़ को सही बताया है और झारखंड पुलिस के अफसरों को क्लीनचिट दे चुकी है. 22 अक्टूबर को झारखंड हाइकोर्ट ने मामले की सीबीआइ जांच के आदेश दिये थे. जांच का आदेश देते हुए हाइकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय ने टिप्पणी की थी कि सीआइडी ने सही दिशा में जांच नहीं की है. इससे लोगों का जांच एजेंसी पर से भरोसा उठ गया है. लोगों का भरोसा कायम रखने के लिए मामले की सीबीआइ जांच जरूरी है.

पुलिस नहीं चाहती थी कि जांच सही दिशा में हो

गौरतलब है कि बकोरिया कांड की जांच में शुरु से ही अनुसंधान को प्रभावित करने का काम किया गया. आरोप है कि डीजीपी डीके पांडेय चाहते ही नहीं थे, कि इस मामले की त्वरित और निष्पक्ष जांच हो. इसके लिए राज्य सरकार के कई अन्य सीनियर पुलिस व प्रशासनिक अफसरों को जिम्मेदार माना जा रहा है. जिन्होंने अपनी भूमिका का निर्वहन समय पर नहीं किया. घटना में मारे गये लोगों के परिजनों के लिखित शिकायतों पर चुप रहे. नियम है कि पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के मामलों की जांच सीआईडी करेगी. लेकिन इस मामले की जांच शुरु करने में सीआईडी ने करीब छह महीने तक इंतजार किया. इतना ही नहीं करीब ढ़ाई साल तक सीआईडी ने जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की. तथ्यों को नजरअंदाज किया. यहां तक कि घटना से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों और मृतक के परिजनों तक का बयान दर्ज नहीं किया. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आदेश और निर्देश का पालन भी सही तरीके से नहीं किया. इस दौरान आईपीएस अजय भटनागर (अभी सीबीआई में पदस्थापित) और अजय कुमार सिंह सीआईडी के एडीजी रहें. 13 नवंबर 2014 को जब एमवी राव ने सीआईडी के एडीजी का पद संभाला, तब उन्होंने इस मामले की जांच में तेजी लायी.

जांच में तेजी लाने वाले एडीजी एमवी राव को बदल दिया गया

एमवी राव के कार्यकाल में इस मामले की जांच तेज होते ही, इससे जुड़े पुलिस अफसरों में हड़कंप मच गया. हाईकोर्ट में दायर होने वाले शपथ पत्र गलत तथ्यों का उल्लेखन करने के लिए डीजीपी डीके पांडेय ने एडीजी एमवी राव पर दबाव बनाया (जैसा की एमवी राव ने सरकार को लिखे पत्र में दावा किया है). इस अनुचित दबाव को एमवी राव ने मानने से इंकार कर दिया. जिसके कारण डीजीपी के कार्यालय में ही कई अन्य सीनियर अफसरों व सेना के अफसरों के सामने डीजीपी डीके पांडेय और एमवी राव के बीच हॉट-टॉक भी हुआ. इसके बाद सरकार ने एमवी राव का तबादल दिल्ली स्थित झारखंड भवन में कर दिया. जहां न तो कार्यालय है और ना ही कोई काम. एक तरह से सरकार ने उन्हें जांच में तेजी लाने की सजा देने का काम किया. एमवी राव के तबादले के बाद सीआईडी के एडीजी प्रशांत सिंह बने. सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कांड से संबंधित किसी भी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किया. उनके बदले सीआईडी के आईजी अरुण सिंह ने फाइलों पर हस्ताक्षर किया. फिर प्रशांत सिंह को भी इस पद से हटा दिया गया. इसके बाद अजय कुमार सिंह को सीआईडी का एडीजी बनाया गया. तब सीआईडी ने मामले में पुलिस को क्लीन चिट देते हुए कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दिया. आरोप है कि सीआईडी ने कई गवाहों के बयानों को भी दुबारा लेकर बदलने का काम किया.

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