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गोला से अपहृत प्रखंड प्रमुख जलेश्वर महतो रिहा, बंगाल की सीमा पर अपराधियों ने छोड़ा

25 नवंबर की रात 8-10 हथियारबंद अपराधियों ने किया था अपहरण

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Ramgarh: रामगढ़ के गोला से अपहृत प्रखंड प्रमुख जलेश्वर महतो को बुधवार देर रात बंगाल की सीमा पर अपराधियों ने रिहा कर दिया. बुधवार रात करीब 1.30 बजे जलेश्वर महतो मुक्त हुए. जिसके बाद मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी उनको लेकर गोला आए. रामगढ़ पुलिस, एटीएस के बढ़ते दवाब के कारण अपराधियों ने जलेश्वर महतो को मुक्त कर दिया. ज्ञात हो कि रविवार की रात 8-10 की संख्या में अपराधियों ने जलेश्वर महतो को अगवा कर लिया था. किस संगठन ने अपहरण किया था, इसकी जानकारी नहीं मिल सकी.

 25 नवंबर की रात हुआ था अपहरण

रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड प्रमुख व आजसू पार्टी के जिला उपाध्यक्ष जलेश्वर महतो का 25 नवंबर  की देर रात अपराधियों ने अपहरण कर लिया था. अपराधिओं ने उनके गोला थाना क्षेत्र के कोईया गांव स्थित आवास से अगवा किया था. अपराधी प्रखंड प्रमुख का क्रेटा वाहन व एक बाइक भी साथ ले गए थे. घटना की सूचना मिलने पर एसपी,एसडीपीओ,डीआईजी सहित अन्य पुलिसकर्मी उनके घर पर पहुंचे थे.

 8-10 की संख्या में आए थे अपराधी

25 नवंबर की रात के करीब 12 बजे आठ-दस की संख्या में हथियार बंद अपराधी प्रमुख के आवास पहुंचे थे. प्रमुख के छोटे भाई रमेश महतो जैसे ही रात को 12 बजे गोला चौक से आवास पहुंचे कि पीछे से अपराधी उनके आवास आ धमके. आते ही अपराधी हथियार लहराते हुए प्रमुख जलेश्वर महतो को खोजने लगे. प्रमुख अपने आवास के पीछे के कमरे में सोए हुए थे. अपराधियों ने उन्हें धमकी देते हुए ठेका के एवज में 30 लाख रुपये बकाया लेवी मांग रहे थे.

उन लोगों ने कहना था कि तुम इतने दिनों से ठेका का काम किया. लेकिन अभी तक लेवी नहीं दी. इसके बाद प्रमुख ने 20 लाख रुपये उनलोगों को देने की बात कहते हुए, तत्काल पांच लाख रुपये देने लगे. पांच लाख रुपये लेने से इंकार करते हुए अपराधी प्रमुख के सभी कमरों के अलमीरा, बक्शा आदि की तलाशी लेने लगे. पैसे नहीं मिलने के बाद रात के करीब एक बजे अपराधी उन्हें अपने साथ ले गये थे.

 पुलिस ने फिरौती की बात से किया था इनकार

जलेश्वर महतो के अपहरण मामले में उनके परिजनों ने कहा था कि अपराधियों के द्वारा एक करोड़ की फिरौती मांगी गई है. लेकिन इस मामले में रामगढ़ पुलिस ने कहा था कि फिरौती के मामले में ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है, और ना ही किसी संगठन ने इसकी जिम्मेवारी ली है.

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