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Block Closure Impact : आदित्यपुर की सैकड़ों कंपनियों की सेहत बिगड़ी, ढ़ाई लाख मजदूरों पर पड़ेगा असर

Sanjay Prasad

Jamshedpur : टाटा मोटर्स और टाटा कमिंस के क्लोजर मोड में चले जाने का असर आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ना शुरू हो गया है. वैश्विक मंदी की आहट ने आदित्यपुर की एमएसएमइ (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंडस्ट्री) की मुश्किलें बढ़ा दी है. इस औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 1400 कंपनियां हैं, जो बड़े उद्योग को स्पेयर पार्ट्स देती हैं. इन 1400 में से 1100 कंपनियों की निर्भरता प्रत्यक्ष तौर पर टाटा मोटर्स पर है, जो कंपनी को स्पेयर्स पार्ट्स बनाकर देती है.

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) झारखंड के चेयरमैन तापस साहू कहना है कि अमूमन बारिश के मौसम में उत्पादन में कमी आ ही जाती है, लेकिन इस बार वैश्विक मंदी की आहट ने मुश्किलें अधिक बढ़ा दी है. अमेरिका और यूरोप में इसका असर दिखना शुरू हो गया है, लेकिन भारत में अभी उतना असर नहीं है, जितना होना चाहिए. उत्पादन कम होने की एक वजह चिप का शॉर्टेज भी है, जिससे ऑटो इंडस्ट्री काफी प्रभावित है. राहत की बात यह है कि स्टील की कीमतें घटने के साथ ही कच्चे तेल की कीमत में भी गिरावट आ रही है. इससे छोटी कंपनियों पर पूंजी का दबाव कम है. कुछ माह पहले तक स्टील से लेकर सीमेंट तक की कीमतें आसमान छू रही थी. इससे छोटी कंपनियों के सामने पूंजी का संकट आ गया था. अब उसी पूंजी में छोटी कंपनियों को ज्यादा कच्चे माल मिल रहे हैं.

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कच्चे माल की कीमतों में 15 से 20 फीसदी की गिरावट
अप्रैल-मई में कच्चे माल की कीमतों में 15 से 20 फीसदी की गिरावट आयी है. अभी भी स्टील की कीमतें कम हो रही है. इससे एमएसएमइ की बाइंग कैपिसिटी बढ़ रही है. बकौल साहू, वित्तीय वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही में वैसे भी मांग कम रहती है. हम भी उम्मीद कर रहे हैं कि तीसरी और चौथी तिमाही में बेहतर स्थिति रहेगी. केंद्र सरकार की भी कोशिश है कि उद्योग को इस मुश्किल समय से बाहर निकाला जाये. इसके लिए सरकार कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में निवेश करने जा रही है, जिसका असर हमारी अर्थव्यवस्था पर अच्छा रहेगा. अगर मेजर ग्लोबल शटडाउन की स्थिति बनती है, तो भारत को भी बचना मुश्किल होगा.

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सुस्ती के चलते रोजगार पर असर
आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन कम होने का असर ढ़ाई लाख मजदूरों पर पड़ेगा, जो इस क्षेत्र की कंपनियों में काम करते हैं. अधिकतर कंपनियां उत्पादन कम होने के बाद मजदूरों का काम से बिठा देती है. इससे उन्हें अपने गांव लौटना पड़ता है. यही नहीं टाटा मोटर्स के उत्पादन में आयी कमी का सर्वाधिक असर ठेका कर्मियों और बाई सिक्स कर्मियों पर होता है. ड्यूटी से बिठा देने के बाद उन्हें कोई वेतन नहीं मिलता. टाटा मोटर्स और टाटा कमिंस ने क्लोजर को लेकर बाई सिक्स कर्मियों के साथ ही ठेका कर्मियों को काम से बिठा दिया है. यहां तक कि इसका असर स्थायी कर्मियों पर भी हो रहा है. एक तो उनकी छुटि्टयों खत्म हो रही है, दूसरे प्रोडक्शन से जुड़े जो भी एलाउंसेस हैं, वे भी नहीं मिलेंगे.

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