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झारखंड में द्वितीय राजभाषा उर्दू की उपेक्षा पर आम्‍या ने जारी किया ‘ब्‍लैक पत्र’

सरकार किसी की हो उर्दू के साथ सौतेला व्यवहार ही करती है: एस अली

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Ranchi: द्वितीय राजभाषा के रूप में भले ही उर्दू को मान्यता दे दी गयी हो, लेकिन अभी तक उर्दू को बढ़ावा देने के लिये सरकारी स्तर पर किसी तरह का प्रयास नहीं किया गया. साल 2007 में उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा मिला, लेकिन 11 साल गुजर जाने के बाद भी न ही सरकारी स्तर पर उर्दू दिवस मनाया जाता है और न ही कार्यालयों में उर्दू को उचित स्थान मिल रहा है. उक्त बातें आम्या के अध्यक्ष एस. अली ने कहा. आम्या की ओर से मंगलवार को उर्दू दिवस मनाया गया. जिस दौरान सरकार के नाम ब्लैक पत्र भी जारी किया गया. उन्होंने कहा कि द्वितीय राजभाषा का दर्जा उर्दू को दिये जाने के साथ ही यह भी अधिसूचना जारी की गयी थी कि प्रत्येक साल उर्दू दिवस भी मनाया जाये. उन्होंने कहा कि सरकार किसी की भी हो उर्दू के साथ सौतेला व्यवहार ही करती है. किसी भी सरकार ने उर्दू को प्रोत्साहित नहीं किया.

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अधिकारियों को दिया गया है निर्देश

एस अली ने बताया कि अधिसूचना में विधानसभा समेत सभी अधिकारियों को सात दिशा निर्देश दिये गये थे. जिसमें उर्दू में आवेदन पत्रों की प्राप्ति और उर्दू में उनका उत्तर देना,  उर्दू में लिखित दस्तावेजों का निबंधन कार्यालय द्वारा स्वीकार किया जाना, महत्वपूर्ण सरकारी नियमों विनियमों और अधिसूचनाओं का उर्दू में प्रकाशन, सार्वजनिक महत्व के सरकारी आदेशों और परिपत्रों का उर्दू में जारी किया जाना, राज्य एवं जिला गजट के उर्दू रूपांतरण का भी प्रकाशन, सरकारी कार्यालय में महत्वपूर्ण संकेत पट्टों को हिन्दी के साथ उर्दू में प्रदर्शित करना, महत्वपूर्ण सरकारी विज्ञापनों का उर्दू में भी प्रकाशन किया जाये. उन्होंने बताया कि इन निर्देशों में से एक पर भी अमल नहीं किया जाता.

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2019 चुनाव का मुद्दा होगा उर्दू

उन्होंने कहा कि राज्य में उर्दू भाषा की स्थिति ऐसी है कि अब 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में उर्दू का मुद्दा भी उठाया जायेगा. उन्होंने बताया कि पूर्व में जो सरकारी कार्यालयों में 42 उर्दू अनुवादक, 169 सहायक उर्दू अनुवादक, 131 उर्दू टंकक को मूल कार्य से हटा कर दूसरे कार्यों में लगा दिया गया. वहीं राज्य उर्दू अकादमी गठन का मामला 2007 से राज्य भाषा विभाग और कल्याण विभाग के बीच लटकी हुई है. कार्यक्रम में नौशाद असांरी, एकराम हुसैन, अफताब आलम,  मो. फुरकान, जियाउद्दीन अंसारी, अबरार अहमद, आबिद असरफी, अली रजा, सम्मी अहमद, अबु रेहान, मोदस्सिर अहरार, नवाज शाह, अफताब गद्दी, मो ओबैदुल्ला, साहिल आदि शामिल थे.

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