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ब्लैक फंगस: औद्योगिक ऑक्सीजन के इस्तेमाल समेत संभावित कारणों का अध्ययन करेंगे विशेषज्ञ

Bengaluru : कर्नाटक में विशेषज्ञ इस बात का अध्ययन करेंगे कि क्या म्यूकरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस के मामलों में बढ़ोतरी का कारण औद्योगिक ऑक्सीजन और इसके संभावित कंटामिनेशन से है.

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं राज्य के कोविड-19 कार्यबल के प्रमुख सीएन अश्वत्थ नारायण ने उपचार प्रोटोकॉल समिति के साथ बैठक की, जिसमें संक्रमण के संभावित स्रोतों पर चर्चा की गयी.

श्री नारायण ने कहा कि राज्य में पिछले सप्ताह ब्लैक फंगस संक्रमण के करीब 700 मामले सामने आये. उन्होंने विशेषज्ञों से इसका कारण पता करने को कहा. ऐसी आशंका जतायी जा रही है कि इस संक्रमण का संबंध ऑक्सीजन की आपूर्ति और इसके लिए इस्तेमाल होनेवाली पाइप एवं सिलेंडर की गुणवत्ता से है.

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श्री नारायण के कार्यालय ने बताया कि सूक्ष्म जीव वैज्ञानिकों का दल सोमवार से इस संबंध में अध्ययन करना शुरू करेगा. पहले देशभर में एक साल में ब्लैक फंगस के करीब 100 मामले सामने आते थे, लेकिन राज्य में इस सप्ताह 700 मामले सामने आये. इन मामलों में बढ़ोतरी के कारण लोगों में घबराहट फैल गयी है.

श्री नारायण ने कहा कि ब्लैक फंगस के मामले कोविड-19 से प्रभावित किसी अन्य देश में सामने नहीं आ रहे. ये केवल भारत में देखे जा रहे हैं.

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मणिपाल अस्पताल (बेंगलुरु) में सर्जन डॉ संपत चंद्र प्रसाद राव ने बैठक में कहा कि म्यूकरमाइकोसिस के मामलों में बढ़ोतरी का कारण खराब गुणवत्ता के सिलेंडर या अस्पतालों के आइसीयू में खराब गुणवत्ता की पाइप प्रणाली के कारण कंटामिनेशन हो सकता है.

उन्होंने कहा कि औद्योगिक ऑक्सीजन के कंटामिनेशन या कीटाणुशोधन के निम्न मानकों या अन्य कारणों से ऐसा हो सकता है. श्री राव ने बताया कि इस बात का भी संदेह जताया जा रहा है कि वेंटिलेटरों में नल के साधारण पानी के इस्तेमाल से ऐसा हो सकता है.

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