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 भाजपा का शशि थरूर को जवाब, मोदी जनसमर्थन से,  नेहरू अनुकंपा से प्रधानमंत्री बने थे  

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा था, हमारे यहां एक चायवाला प्रधानमंत्री है तो यह इसलिए संभव है क्योंकि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने ऐसा संस्थागत ढांचा खड़ा किया कि कोई भी भारतीय इस उच्चतम पद की आकांक्षा रख सके

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Jaipur : जवाहर लाल नेहरू खुद पहली बार अनुकंपा से प्रधानमंत्री बने थे,  जबकि मोदी जनसमर्थन से स्पष्ट बहुमत पाने वाले प्रधानमंत्री हैं. नेहरू की वजह से एक चायवाले के देश का प्रधानमंत्री बनने संबंधी शशि थरूर के   बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा की ओर से बुधवार को यह बात जयपुर में कही गयी. बता दें कि भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने जयपुर में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जब नेहरू जी पहली बार प्रधानमंत्री बने तो अनुकंपा से बने थे.  याद करें कि कांग्रेस नेता शशि थरूर ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा था, हमारे यहां एक चायवाला प्रधानमंत्री है तो यह इसलिए संभव है क्योंकि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने ऐसा संस्थागत ढांचा खड़ा किया कि कोई भी भारतीय इस उच्चतम पद की आकांक्षा रख सके और यहां तक पहुंच सके. थरूर की बात का   जिक्र करते हुए त्रिवेदी ने कहा, भारत के राजनीतिक इतिहास में केवल दो प्रधानमंत्री ऐसे हुए,  जो प्रधानमंत्री बनने से भी बरसों पहले जन- जन की आकांक्षा के केंद्र बने और जनता ने कहा कि इन्हें प्रधानमंत्री होना चाहिए.

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कांग्रेस का जनसमर्थन पटेल के पक्ष में था

एक थे अटल बिहारी वाजपेयी और दूसरे नरेंद्र मोदी हैं.  बाकी सब प्रधानमंत्री कुर्सी पर आकर नेता बने.  कहा कि प्रधानमंत्री बनने से पहले देश तो छोड़िए उनको अपनी पार्टी में कोई नेता नहीं मानता था. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि विनम्रता के साथ कह रहा हूं कि जवाहर लाल नेहरू भी इसमें शामिल हैं.  त्रिवेदी ने जेार देकर कहा कि मेादी देश के एकमात्र प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने जनसमर्थन से स्पष्ट बहुमत पहली बार में प्राप्त किया है.  जब नेहरू जी पहली बार प्रधानमंत्री बने तो अनुकंपा से बने थे.  कांग्रेस का जनसमर्थन पटेल के पक्ष में था.  इंदिरा गांधी जब प्रधानमंत्री बनीं तो सिंडिकेट से बनीं, जनसमर्थन से नहीं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता थरूर अपनी मैकाले की मानसिकता और मल्लिकार्जुन खड़गे अपनी मार्क्सिस्ट मानसिकता से बाहर आकर ईमानदारी से स्वीकार करे कि भारत का लोकतंत्र और किसी भी व्यक्ति का प्रधानमंत्री बनना भारत की हजारों साल पुरानी सामाजिक और खुली मानसिकता है.

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