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बंगाल चुनाव में भाजपा का नया दांव, दीदी के खिलाफ दादा को मैदान में उतारने की कवायद तेज

परेड ग्राउंड में नरेंद्र मोदी की रैली में कई बड़ी हस्तियां शामिल हो सकती हैं भाजपा में

Kolkata : पश्चिम बंगाल में होनेवाले चुनाव (West Bengal Election) को लेकर भाजपा और टीएमसी अपना पूरा जोर लगा रही हैं. वहीं भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो किसी ऐसे बड़े चेहरे को चुनाव से पहले अपनी पार्टी में शामिल करे जिसकी इमेज बंगाल के वोटरों को लुभा सके. भाजपा अपनी इस कोशिश में लगी है कि वो ममता दीदी के मुकाबले किसी दमदार व्यक्ति को खड़ा करे.

दरअसल, ऐसा पहली बार नहीं है जब भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान औऱ बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें सामने आई हों. कई महीनों से राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि गांगुली को बीजेपी सीएम पद का उम्मी दवार बना सकती है. गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के अन्यक नेता हमेशा से ये कहते आ रहे हैं कि बंगाल का मुख्यजमंत्री कोई बंगाली ही बनेगा, बाहरी नहीं.

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चुनाव के मद्देनजर बंगाल में बड़े नेताओं के दौरे जारी हैं. इस लिहाज से 7 मार्च बड़ी तारीख होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोलकाता के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में बड़ी रैली करने वाले हैं. इस रैली में BCCI प्रेसीडेंट सौरव गांगुली का भाजपा में शामिल हो सकते हैं.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस दिन सौरव के साथ-साथ मिथुन चक्रवर्ती, प्रोसेनजीत समेत बंगाल की कई नामी हस्तियां भाजपा में शामिल होंगी. सूत्रों ने बताया कि गांगुली को भाजपा में लाने की पटकथा दिसंबर 2019 में ही लिखी जा चुकी थी. तब के पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने PM मोदी की सहमति के बाद इसकी तैयारी शुरू कर दी थी.

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शाह ने गांगुली को BCCI प्रेसिडेंट बनने में की थी मदद

ऐसा माना जाता है कि गृहमंत्री अमित शाह ने सबसे पहले गांगुली को बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन से निकालकर BCCI प्रेसिडेंट बनने में मदद की थी. शाह के बेटे जय शाह तब BCCI के सचिव चुने गए थे. वहीं हाल ही में गांगुली बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ से मिले थे. इससे पहले वे प्रधानमंत्री से भी मिल चुके थे. मीडिया में उनके भाजपा ज्वाइन करने की चर्चा कई दिनों से चल रही है, लेकिन भाजपा और खुद गांगुली ने इस पर चुप्पी साध रखी है.

सरकार बनी तो दिलीप घोष बन सकते हैं CM

भाजपा ने चुनाव के बाद सरकार और संगठन के समीकरण पर भी तैयारी कर ली है. इसके तहत अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का मुख्यमंत्री बनना तय है. घोष बंगाल से हैं और TMC के खिलाफ हमेशा अपने बयानों से मुखर रहे हैं.

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हो सकते हैं 2 डिप्टी CM

उत्तर प्रदेश फॉर्मूले के तहत राज्य के बड़े चेहरों को साधने के लिए नई सरकार में पार्टी दो डिप्टी CM भी रखेगी. UP में जब भाजपा की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ की टीम में दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी CM बनाया गया. इसी फॉर्मूले को बंगाल में भी अपनाते हुए पार्टी TMC से बगावत कर BJP में आए शुभेंदु अधिकारी और सौरभ गांगुली को इसकी जिम्मेदारी दे सकती है. सब कुछ ठीक रहा तो गांगुली को किसी सुरक्षित सीट से विधानसभा भेजा जाएगा.

शुभेंदु को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

शुभेंदु को बंगाल में पार्टी जिम्मेदारी सौंप सकती है. बंगाल में शुभेंदु के राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में भी पार्टी हाईकमान ने बुलाया है. ऐसे में समझा जा सकता है कि आने वाले समय में पार्टी में शुभेंदु का कद और बढ़ेगा.

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राहुल सिन्हा या ज्योर्तिमय महतो हो सकते हैं भाजपा के अध्यक्ष

वहीं, दिलीप घोष अगर CM बन जाते हैं तो उनकी जगह पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई दावेदार हैं. इनमें राहुल सिन्हा और ज्योर्तिमय महतो का नाम सबसे आगे हो सकता है. राहुल सिन्हा पहले भी प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं. ऐसे में उनकी दावेदारी मजबूत दिखती है. वहीं, ज्योर्तिमय महतो पुरुलिया से सांसद हैं. वे युवा हैं, साथ ही संगठन में उनकी अच्छी पकड़ भी है.

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