न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

संथालपरगना में है भाजपा की नजर, झामुमो का है मजबूत आधार

481
  • भाजपा ने 1998 में पहली बार इस सीट पर जीत का स्वाद चखा, 2009 के चुनाव में भी मिली थी कामयाबी
  • हेमलाल मुर्मू झामुमो से रह चुके हैं सांसद, अब भाजपा के हैं उम्मीदवार
  • राजमहल, बोरियो, बरहेट, लिटिपाड़ा, पाकुड़, महेशपुर- छह विधानसभा सीटें हैं राजमहल लोकसभा क्षेत्र में
  • राजमहल सीट में मुस्लिम और आदिवासी वोट ही निर्णायक हैं, आदिवासी वोटों को बचाने और छीनने की कवायद तेज है

Pravin kumar

Ranchi: झारखंड मुक्ति मोर्चा एक ओर जहां राजमहल में 2014 के चुनावी नतीजे को दुहराने के लिए तैयार है, वहीं भारतीय जनता पार्टी पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद मिली हार का सिलसिला खत्म करने के हर संभव कोशिश में जुटी है. राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास इस लक्ष्य को लेकर प्रखर नेतृत्व करते भी दिख रहे हैं. राजमहल सीट पर अलग-अलग चुनावों में झामुमो, कांग्रेस और भाजपा जीत हासिल कर चुकी है. परंपरागत रूप से यह सीट कांग्रेस और झामुमो की मानी जाती है, हालांकि भाजपा भी इस सीट पर जीत का परचम लहरा चुकी है. 1998 में पहली बार इस सीट पर कमल खिला और यहां से सोम मरांडी जीते. सोम मरांडी 7 वोट से ही जीत हासिल कर सके थे.

इसे भी पढ़ें – गिरिडीह लोकसभा में जनता उम्मीदवार पर खुद फैसला ले, मेरा समर्थन किसी को नहीं हैः माधवलाल

क्या है राजमहल का समीकरण

झारखंड की 14 लोकसभा सीटों में से एक राजमहल लोकसभा सीट साहेबगंज और पाकुड़ जिले में फैला हुआ है. यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. यह क्षेत्र राजमहल की पहाड़ियों और गंगा नदी से घिरा हुआ है. मध्य काल में इस क्षेत्र को उगमहल के नाम से जाना जाता था. इस क्षेत्र में अकबर मस्जिद और बंगाल के नवाब मीर क़ासिम का महल है. 17वें लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी हेमलाल मूर्म झामुमो के टिकट पर इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. कांग्रेस के थॉमस हांसदा ने इस सीट पर कांग्रेस को भी जीत दिलायी है. झामुमो के प्रत्याशी और वर्तमान सांसद विजय हांसदा उनके पुत्र हैं. कांग्रेस और झामुमो के साथ झारखंड विकास मोरचा के गठबंधन का लाभ इनको मिलता नजर आ रहा है. लेकिन विजय हांसदा के साथ क्षेत्र की जनसमस्या पीछा नहीं छोड़ रही है. घोर पेयजल समस्या से जूझ रहे इलाके में झामुमो के प्रति भी नाराजगी दिख रही है. ऐसे में वोटरों को समझा पाना थोड़ा कठिन नजर आ रहा है. वहीं सीपीएम उम्मीदवार के मैदान में होने से जन मुद्दे पर दोनों गठबंधन को परेशान कर रहा है. राजमहल लोकसभा में आदिवासियों के अनेक जनसंगठन सक्रिय हैं और उनकी भूमिका भी चुनाव को प्रभावित करेगी. आदिवासियों के स्वशासन और जमीन संबंधी अधिकारों के सवाल भी कुछ समय से प्रभावी रहे हैं और विस्थापन का सवाल भी है. राजनीतिक दलों ने जिस तरह विस्थापन के सवाल पर रुख दिखाया है, उससे नाराजगी तो हैँ, इलाके में बड़ा सवाल झारखंडी पहचान भी बनता जा रहा है. बांग्लादेशी घुसपैठ को भी भाजपा ने अपना मुद्दा बनाया है. हेमलाल मुर्मू बहरेट से चार बार जेएमएम के विधायक रहे हैं और 2004 में जेएमएम के टिकट पर राजमहल लोकसभा से चुनाव जीते. ऐसे में देखना रोचक होगा की अपनी सीट को झामुमो बचाये रखता है या भाजपा झामुमो का किला भेदने में सक्षम हो पता है.

इसे भी पढ़ें – 10 माह बाद भी निगम लागू नहीं करा सका है 0n street और Off street पार्किंग पॉलिसी

SMILE

राजमहल सीट पर कब किस दल का रहा कब्जा

1957 में इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर पाइका मुर्मू जीते थे. इसके बाद 1962, 1967 और 1971 कांग्रेस ने जीत दर्ज की. 1977 में इस सीट से जनता पार्टी के एंटन मुर्मू जीते. 1980 में कांग्रेस ने फिर वापसी की और 1984 के चुनाव में भी कांग्रेस ने ही जीत दर्ज की. 1989 में पहली बार इस सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा का खाता खुला और उसके टिकट पर 1989 और 1991 का चुनाव सिमोन मरांडी जीते. 1996 में कांग्रेस के थॉमस हांसदा जीते. 1998 में पहली बार इस सीट पर कमल खिला और यहां से उसके टिकट पर सोम में मरांडी जीते. 1999 में कांग्रेस के थॉमस हांसदा जीते. 2004 के चुनाव झामुमो की हेमलाल मुर्मू जीते. 2009 का चुनाव बीजेपी के देवीधन बेसरा जीतने में कामयाब हुए. 2014 का चुनाव झामुमो के विजय कुमार हांसदा जीते. विजय कुमार हंसदा ने 2014 के चुनाव में 29 हजार वोट से हेमलाल मुर्मू को हराया था.

पाकुड़, लिट्टीपाड़ा और बरहेट झामुमो, बोरियो व राजमहल भाजपा, पाकुड़ विधानसभा में कांग्रेस का है कब्जा

राजमहल संसदीय क्षेत्र के पाकुड़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है. यहां मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता है. बरहेट, महेशपुर और लिट्टीपाड़ा पर झामुमो का कब्जा है. वहां स्टीफन मरांडी और साइमन मरांडी जैसे पुराने दिग्गजों के साथ-साथ कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन विधायक हैं. वहीं पाकुड़ से आलमगीर आलम विधायक हैं. वही भाजपा से बोरियो विधायक ताला मरांडी पार्टी से नाराज चल रहे हैं. राजमहल से भाजपा के विधायक अनंत ओझा को अपनी ताकत दिखाने की चुनौती मिल रही है. वहीं ताला मरांडी की नाराजगी भाजपा के लिए राजमहल सीट जीतने के ख्वाब में पानी डाल सकता है. भाजपा और झामुमो के बीच राजमहल सीट पर जोर आजमाइश जारी है. जो चुनाव प्रचार में भी दिख रहा है.

इसे भी पढ़ें  – धनबादः राहुल गांधी ने कीर्ति झा आजाद के समर्थन में किया रोड शो, राहुल संग सेल्फी के लिए उमड़े युवा, देखें वीडियो

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: