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BJP का दावाः लातेहार में फेक इनकाउंटर में मारा गया था ग्रामीण, मानवाधिकार आयोग करे जांच

Ranchi: 12 जून को गारू (लातेहार) में एक ग्रामीण पुलिस बलों की गोलीबारी का शिकार हो गया था. इसके बाद घटना की जांच के लिये भारतीय जनता पार्टी (अनुसूचित जनजाति मोर्चा, झारखंड प्रदेश) के द्वारा एक उच्च स्तरीय जांच दल का गठन किया गया. जांच दल ने 19 जून को घटनास्थल का दौरा किया था. इस दल में प्रदेश के मोर्चा अध्यक्ष औऱ पूर्व विधायक शिव शंकर उरांव, पूर्व विधायक राम कुमार पाहन और अन्य लोगों के अलावा विशेष रूप से भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद समीर उरांव भी मौजूद थे.

टीम ने रविवार को प्रेस वार्ता में कहा कि यह घटना नक्सलियों के साथ मुठभेड़ की घटना नहीं थी. यह फर्जी मुठभेड़ थी. पुलिस सुरक्षा बल द्वारा जानबूझकर गोली मारकर हत्या कर दी गई. ग्रामीण नक्सली नहीं थे बल्कि निरीह मासूम लोग थे. अब भाजपा मानवाधिकार आयोग से इसकी जांच की मांग करेगी.

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सूचना देने के बावजूद हुई गोलीबारी

शिवशंकर उऱांव ने कहा कि ग्रामीण सरहुल त्योहार के एक दिन पहले परंपरागत प्रथा के अनुरूप जंगल की ओर शिकार खेलने जा रहे थे. भुक्तभोगी ग्रामीणों ने हाथ उठाकर औऱ चिल्लाकर स्वयं के ग्रामीण होने की सूचना जवानों को दी. बावजूद इसके उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई गयीं. मृतक ब्रह्मदेव सिंह खरवार को पहली और दूसरी गोली जांघ और कमर में लगी थी. इससे वह घायल होकर गिर गया था. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने जंगल में ले जाकर कनपटी में सटाकर तीन गोलियां मारकर उसकी हत्या कर दी. मृतक की मां, बहन और पत्नी ने गोली चलने पर घर से बाहर आंगन में खड़े होकर चिल्ला चिल्लाकर मिन्नतें की. इसे अनसूना कर दिया गया.

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झारखंड सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन पुलिस महकमा और पदाधिकारियों, कर्मचारियों ने अब तक किसी भी प्रकार का कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया है. बल्कि घटना की लीपापोती की जा रही. यह अत्यंत गंभीर बात है. झारखंड जगुआर के जवानों पर न्यायिक कार्यवाही हो, उन्हें सजा मिले. पीड़ित परिवार मृतक के परिवार को समुचित मुआवजा के तौर पर 20,00,000 रुपये दिये जायें. मृतक की पत्नी जीरामणि देवी को भरण-पोषण के लिए एक सरकारी नौकरी दी जाए. मोर्चा भी परिजनों को हरसंभव सहायता मदद करेगा.

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खौफ में है परिवार

भाजपा के मुताबिक पीड़ित परिवार को प्रशासन के द्वारा डराया धमकाया जा रहा है. ऐसे में परिवार के द्वारा फर्जी मुठभेड़ करने वालों पर एफआईआर दर्ज कराने की व्यवस्था की जानी चाहिये. मोर्चा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से भी इस मामले पर संज्ञान लेने का आग्रह करेगा. इसके अलावे ग्रामीणों, मासूमों, आदिवासी जनजातियों के मानवाधिकार की सुरक्षा हेतु राज्य एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी आग्रह किया जाएगा.

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