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भाजपा कार्यकर्ताओं ने श्रम मंत्री को सुनाई खरी-खरी, कहा भ्रष्टाचार चरम पर, अफसर हो गये हैं बेलगाम

Ranchi : एक तरफ मुख्यमंत्री रघुवर दास राज्य में सुशासन की बात करते हैं. हर समय कहते हैं कि भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं किया जायेगा. लेकिन हकीकत कुछ और ही है. भाजपा के कार्यकर्ताओं ने ही सरकार से पूछा है कि ईमानदार शासन और सुशासन कहां है. श्रम मंत्री राज पालीवाल को अपने ही जिले पाकुड़ में भाजपा कार्यकर्ताओं के आक्रोश का सामना करना पड़ा. शनिवार को जिला 20 सूत्री प्रभारी व सूबे के श्रम एवं नियोजन मंत्री राज पालीवाल के पाकुड़ पहुंचने पर कार्यकर्ताओं की खूब खरी खोटी सुननी पड़ी. सभी प्रखंडों के 20 सूत्री अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि वर्तमान डीसी के कार्यकाल में जिले में विकास कार्य ठप हो गया है. भ्रष्टाचार चरम पर है. अफसरशाही हावी हो गयी है.

बेरोजगार भीख मांगने को हैं विवश

महेशपुर प्रखंड के 20 सूत्री अध्यक्ष तमाल चंद्र बनर्जी ने कहा कि डीसी के कारण सभी विभाग डावांडोल हो गये हैं. जिले के बेरोजगार भीख मांगने को विवश हैं. काम करने वालों का भुगतान नहीं होता है. पारा टीचर और आंगनबाड़ी सेविकाओं को वेतन नहीं मिल रहा है. डीसी का यहां से जाना जरूरी है. सुविधा शुल्क नहीं देने वाले छोटे व्यवसायियों का व्यापार बंद हो गया है. जबकि, बड़े व्यवसायी सुविधा शुल्क देकर माफिया राज चला रहे हैं. हिरणपुर के 20 सूत्री अध्यक्ष लखी प्रसाद साहा ने कहा कि ईमानदारी का चोला पहने डीसी के कार्यकाल में भ्रष्टाचारियों का बोलबाला बढ़ा है. एक ओर सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन, लोगों को रोजगार देने की बात करती है परंतु, पाकुड़ में ईमानदारी के नाम पर लूट मची है. उज्जवला गैस योजना से लेकर पीएम आवास योजना तक में आम लोगों को चढ़ावा चढ़ाना पड़ रहा है. मनरेगा योजना के पुराने मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है जबकि, सांठगांठ से चल रहे अवैध पत्थर के खेल में मामले दर्ज नहीं होते हैं.

अफसर आते जाते रहते हैं, कार्यकर्ता स्थायी रहते हैं : मंत्री

जिला 20 सूत्री मंत्री राज पालीवाल ने कार्यकर्ताओं की शिकायत पर कहा कि अफसर तो आते जाते रहते हैं. उन्होंने कहा कि वे कर्यकर्ताओं की भावनाओं का कद्र करते हैं और इसकी शिकायत सूबे के मुखिया से करेगें. वहीं, प्रेस क्लब, पाकुड़ के सदस्यों ने श्रम मंत्री से पत्रकारों की उपेक्षा की शिकायत की गई. अध्यक्ष मुकेश जायसवाल ने कहा कि जिले के पत्रकार उपायुक्त के उपेक्षा का शिकार हैं. पत्रकारों को किसी भी कार्यक्रम की न ही सूचना दी जाती है और न ही प्रेस रिलिज जारी किया जाता है. अफसरों के बेलगाम होने के सवाल पर मंत्री राज पालीवाल ने बिना कुछ जबाब दिए हाथ जोड़ लिया.

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