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#BJP डराती है, कांग्रेस और जेएमएम ईसाइयों को ठगती है : बिशप अमृत

Pravin kumar

Ranchi : गोस्नर इवेंजेलिकल लूथरन चर्च छोटानागपुर और असम, भारत में एक प्रमुख ईसाई प्रोटेस्टेंट संप्रदाय है. गोस्नर चर्च देशभर में 6 डायसिस के अन्तर्गत आता है.

उत्तर पश्चिम डायसिस के विशप ईसाई धर्म गुरु अमृत जॉय एक्का ने विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला लिया है और जेडीयू की सदस्ता ग्रहण की.

जीईएल चर्च के इतिहास में पहली घटना है जब कोई विशप चुनाव मैदान में होगा. मुख्य विपक्षी दलों का झारखंडी मुद्दों के प्रति संवेदनहीनता ने बिशप को राजनीति में जाने को मजबूर किया.

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विशप अमृत जॉय एक्का से न्यूजविंग की खास बातचीत के प्रमुख अंश :

सवाल : जेडीयू की सदस्ता ग्रहण करने के पीछे आपका क्या मकसद है, जबकि झारखंड नामधारी दल  झामुमो, झाविमो, झापा और आजसू भी मौजूद हैं?

जबाब : धर्मनिरपेक्षता और सेकुलरिज्म का दंभ भरने वाली कांग्रेस, जेएमएम और अन्य पार्टियां ईसाई समुदाय का वोट लेकर उन्हें ठगने का काम राज्य बनाने के बाद से ही करती रही हैं.

वहीं भाजपा ईसाइयों को डराकर गैर ईसाइयों के वोट पोलराइज कर सत्ता में पहुंचने का काम कर रही है. कांग्रेस और जेएमएम झारखंड के आदिवासियों और मूलवसियों के मुद्दों पर सिर्फ राजनीति करने का काम करती रहीं.

इन दलों ने कभी झारखंडियों के मुद्दों को अपनी प्रथामिकता में नही रखा. राज्य में भाजपा सीएनटी-एसपीटी कानून को खत्म करना चहती है तो कांग्रेस और जेएमएम इसके नाम पर सिर्फ राजनीति कर वोट बटोरना चाहते हैं.

लोकसभा चुनाव के दौरान भी महागठबंधन के नाम पर ईसाई समुदाय ने विपक्षी दलों को वोट दिया. लेकिन इनके उम्मीदवार जनता के मुद्दों को लेकर सिर्फ चुनाव के दौरान जनता के बीच जाते हैं.

जबकि झारखंडी मुद्दों को लेकर कई सामाजिक कार्यकर्ता सरकार के नीतियों का विरोध करते, लड़ते रहते हैं. झारखंड नामधारी दलों ने कभी उन समाजिक कार्यकर्ताओं और उनके आंदोलनों को सम्मान नही दिया. न ही उनका हिस्सा बनना चाहा.

आदिवासी-मूलवासियों के सामाजिक सरोकार आज हाशिये पर आ गये हैं. वहीं गैर भाजपा दलों की निष्क्रियता का फायदा भाजपा उठा रही है. और राज्य में धर्म के नाम पर बांटने का काम किया जा रहा है.

विपक्षी दलों के गलत उम्मीदवारों का चयन भी लोकसभा चुनाव में उनकी हार का कारण बना. ईसाई समुदाय की भावनाओं को  लोकसभा चुनाव के दौरान भी इन दोनों पार्टियों ने कद्र नहीं की. ऐसे में मैंने जेडीयू की सदस्यता लेकर सीधा चुनाव लड़ने का फैसला लिया.

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सवाल : क्या आपका कलीसिया चुनाव लड़ने की इजाजत देता है?

जबाब : मार्टिन लूथर ने 1517 ई में चर्च की विचारधारा में संशोधन करने के लिए आवाज उठायी थी. इसके लिए उन्हें कलीसिया से निष्कासित भी किया गया. लेकिन उनके सही उद्देश्य की वजह से लोग उनसे जुड़ते चले गये.

इससे ही प्रोटेस्टेंट आंदोलन की शुरुआत हुई थी. बाद में उनकी ओर से तैयार की गयी 95 थिसिस के प्रस्तावनाओं को पेश किया. इसके बाद 31 अक्तूबर 1517 को उनकी थिसिस को बुद्धिजीवियों की सहमति मिली और पारित किया गया.

इससे तत्कालीन चर्च व्यवस्था में बदलाव आया. जीईएल चर्च  के संविधान में मानव कल्याण सर्वोपरि है. चर्च के संविधान में चुनाव लड़ने पर रोक नही है. इसी कारण मैं बिशप रहते हुए भी चुनाव लड़ सकता हूं.

सवाल : राजनीति में जाने का फैसला क्यों लिया?

जबाब : शांतिप्रिय ईसाई समुदाय को आज झारखंड में प्रताड़ित किया जा रहा है. इसे लेकर कोई राजनीतिक आवाज नहीं उठ रही है. ऐसे में राजनीतिक तौर पर समाज को गोलबंद करने के मकसद से चुनाव में जा रहा हूं.

झारखंड बनने के बाद अल्पसंख्यकों को राज्य में प्रताड़ना भाजपा सरकार के द्वारा झेलनी पड़ रही है. लोग क्या खायें, क्या पहनें यह धार्मिक कटटरवादी संगठन तय कर रहे हैं. मॉब लिंचिंग की घटनाओं को राज्य में अंजाम दिया जा रहा है.

इसमें धार्मिक अल्पसंख्यक को शिकार बनाया जा रहा है. इन विषयों को लेकर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कभी राजनीतिक गोलबंदी नहीं की. भाजपा ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों को शह देने का काम कर रही है.

राज्य में तीन आदिवासियो और 20 के करीब लोगों की हत्या भीड़ के द्वारा की गयी. फिर भी मुख्य राजनीतिक दल मौन हैं. राजनीति में जाने के पीछे झारखंड आंदोलन की अवाज को बुलंद करना और आदिवासीयों-मूलवासियों के हक की हिफाजत करना है.

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