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भाजपा का हेमंत सरकार पर हमला, कहा- नई शिक्षा नीति पर दिखावे की राजनीति कर रहे सीएम

Ranchi. झारखंड भाजपा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर हमला बोला है. भाजपा ने कहा कि नई शिक्षा नीति के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दिखावे की राजनीति कर रहे हैं. दरअसल, सीएम हेमंत सोरेन ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर सवाल उठाये थे. सोमवार को पीएम नरेंद्र मोदी के साथ हुए वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में कई बिंदुओं पर उन्होंने विरोध जताया था. नई नीति में आदिवासी, दलित और कमजोर वर्ग के लोगों की शिक्षा का ध्यान नहीं रखा गया है. इससे रोजगार को बढ़ावा नहीं मिलेगा.

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दिखावे की राजनीति कर रहे हैं

प्रदेश भाजपा ने हेमंत सोरेन के बयान को केवल दिखावे की राजनीति बतलाया है. भाजपा ने कहा कि राज्य सरकार झारखंड के आदिवासी मूलवासियों को शिक्षा से दूर रखना चाहती है. प्रदेश भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने मंगलवार को प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि सीएम ने स्थानीय भाषा में प्रारंभिक पढ़ाई की नीति पर बेवजह सवाल खड़ा किया है. वे भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं. इस दौरान मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक भी उपस्थित थे.

स्थानीय भाषाओं में शिक्षकों की कमी बहाना

प्रतुल शाहदेव के अनुसार राज्य में 17,000 ऐसे युवा हैं, जिनके पास क्षेत्रीय और आदिवासी भाषाओं में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री है. इसके बावजूद हेमंत सरकार क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षकों की कमी की बात उठा रही है. राज्य में नागपुरी, संताली, मुंडारी, कुड़ुख़, खोरठा, हो आदि क्षेत्रीय और आदिवासी भाषाओं के जानकारों की कमी नहीं है. इन भाषाओं का साहित्य भी समृद्ध है. इससे जुड़ी पाठ्य सामग्रियां भी उपलब्ध हैं. ऐसे में क्षेत्रीय भाषाओं और टीचर्स की कमी की बात कहा जाना बेतुका है. 

सभी के सुझाव से बनी है नीति

भाजपा के मुताबिक नई शिक्षा नीति पर जनवरी, 2015 से ही काम शुरू हो गया था. सरकार ने ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सुझाव मांगे थे. इन सुझावों पर विचार करने के लिए पूर्व कैबिनेट सचिव बालासुब्रमण्यम की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मई 2016 को सौंप दी थी. उसके बाद पद्म विभूषण कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी बनी. उसने सभी पहलुओं पर विचार विमर्श करके नेशनल एजुकेशन पॉलिसी का ड्राफ्ट सरकार को सौंपा था, जिसे कैबिनेट ने अपनी मंजूरी थी. शिक्षा नीति को स्टेकहोल्डर, छात्रों, शिक्षाविदों से बातचीत के बाद ही लागू किया गया है. 

प्राइवेट संस्थानों में 20% स्टूडेंट्स की पढ़ाई फ्री

देश में विदेशी यूनिवर्सिटियां आयेंगी. इससे विदेश जाकर पढ़ने वाले छात्रों की संख्या घटेगी. देश को विदेशी मुद्रा की बचत से लाभ होगा. ऐसी यूनिवर्सिटी या इंस्टिट्यूट भारत सरकार के हायर एजुकेशन कमिशन ऑफ इंडिया के जरिये नियंत्रित किये जायेंगे. इनके फीस की भी रेगुलेशन यही संस्था करेगी. प्राइवेट संस्थानों को नो प्रॉफिट नो लॉस के सिद्धांत पर काम करना होगा. किसी वर्ष कोई प्रॉफिट आने पर उसे शिक्षा के क्षेत्र में ही वापस निवेश करना होगा. इन निजी संस्थानों को 20% छात्रों को बिल्कुल फ्री में पढ़ाना होगा. 30% छात्रों को स्कॉलरशिप देनी होगी.

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