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झारखंड सरकार पर भड़की भाजपा, कहा- रघुवर दास की गिरफ्तारी को तैयार नहीं होने पर पुलिस पदाधिकारियों का किया तबादला

Ranchi: भाजपा प्रदेश कार्यालय में आज पार्टी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाये. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सरोज सिंह ने कहा कि हेमंत सरकार बदले की भावना से गैरकानूनी काम करवाना चाहती है. तबादला और पदस्थापन राज्य सरकार का अधिकार होता है. पर अपनी कुत्सित मानसिकता को पूरा करने को अधिकारियों पर नियम विरुद्ध और गैर कानूनी कार्रवाई का दबाव बनाना और उसे पूरा नहीं करने पर उनका तबादला करना राजशाही सोच का परिणाम है. समाचार पत्रों के हवाले से यह सूचना मिली है कि पुलिस के कतिपय उच्चाधिकारियों को पूर्व सीएम रघुवर दास पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किए जाने का निर्देश दिया गया. चूंकि पुलिस अधिकारियों ने नियम विरुद्ध इस कार्रवाई को करने से इनकार कर दिया. ऐसे में उनको उनके पद से हटा दिया गया. बदले की भावना से वशीभूत होकर अधिकारियों से गलत काम कराने का परिणाम घातक हो सकता है. इस दौरान सह मीडिया प्रभारी अशोक बड़ाइक भी उपस्थित थे.

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नियमों का सरकार कर रही उल्लंघन

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सरोज सिंह के मुताबिक भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में वर्ष 2018 में संशोधन किया गया था. इसकी धारा 17 (क) में स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है कि नियमानुसार कोई पुलिस अधिकारी निर्धारित किसी ऐसे अपराध में कोई जांच या पूछताछ या अन्वेषण अपनी मनमर्जी से नहीं करेगा. उसे कुछ शर्तों का पालन करते हुए ही ऐसा करना है. पर रघुवर दास के विरुद्ध जांच या पूछताछ या अन्वेषण के पूर्व राज्यपाल की अनुमति लेनी होती है जो नहीं ली गयी. ऐसे में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने हेमंत सोरेन के तुगलकी आदेश को मानने से इनकार कर दिया. इसके बाद उन्हें हटा दिया गया. ऐसा करके ईमानदार पदाधिकारियों का मनोबल तोड़ा गया है.

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जहां तक रघुवर दास से जुड़े अन्य मामलों की चर्चा की जा रही है, एक जनप्रतिनिधि अथवा मुख्यमंत्री के रूप में रघुवरजी ने कोई व्यक्तिगत आदेश नहीं दिया है. सारे निर्णय कैबिनेट और राज्य के उच्चाधिकारियों के स्तर पर लिए गए हैं. अतः उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप बालू से तेल निकालने के बराबर हैं. सच यह है कि रघुवर दास ने एक शांत और विचारवान प्रवृत्ति का परिचय दिया है. अपने ऊपर गए ऊपर लगाए गए आरोपों के संबंध में प्रेस के समक्ष आकर नाहक वक्तव्य नहीं दिया है. अभी तो पुलिस के जिन उच्च अधिकारियों ने रघुवर के विरूद्ध गलत कार्रवाई करने से मना किया है, उन्हें पुरस्कृत किया जाना चाहिए ना कि उनका स्थानांतरण हो. अगर किसी राज्य का मुखिया सुपारी किलर की भूमिका निभाने लगेगा तो यह न तो राज्य के लिए अच्छा है और न ही राजनेताओं के भविष्य के लिए उचित है.

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