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बीजेपी सांसद रविंद्र राय ने जेवीएम सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी पर ठोका 10 करोड़ का मानहानि का दावा

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Ranchi : कोडरमा से बीजेपी सांसद रविंद्र राय ने पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड विकास मोर्चा के सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी पर 10 करोड़ रुपये का मानहानि का दावा ठोका है. उन्होंने रांची सिविल कोर्ट में मामले को लेकर मुकदमा दर्ज कराया है. बाबूलाल मरांडी ने छह जुलाई को राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा था. ज्ञापन में उन्होंने जेवीएम से बीजेपी में शामिल हुए छह विधायकों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए पैसे लिये हैं. मरांडी ने एक पत्र राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को सौंपा था, जिसपर वह दावा कर रहे थे कि यह पत्र तत्कालीन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राय ने मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखा था. पत्र में इस बात का उल्लेख था कि किस बीजेपी नेता ने कितने पैसे देकर विधायकों की खरीद की थी. इस घटना के बाद बीजेपी की तरफ से सांसद रविंद्र राय ने मीडिया के सामने कहा था कि बाबूलाल मरांडी इस काम के लिए सार्वजनिक माफी मांगें, नहीं तो उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा किया जायेगा. अब ठीक तीन महीने के बाद शुक्रवार को सांसद रविंद्र राय ने रांची सिविल कोर्ट में बाबूलाल मरांडी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है.

बीजेपी सांसद रविंद्र राय ने जेवीएम सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी पर ठोका 10 करोड़ का मानहानि का दावा
बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल को सौंपा था पत्र.

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किस नेता पर है आरोप और पत्र के मुताबिक किस विधायक ने लिये कितने पैसे

बीजेपी सांसद रविंद्र राय ने जेवीएम सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी पर ठोका 10 करोड़ का मानहानि का दावा
इसी पत्र की प्रति बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल को सौंपी थी और दावा किया था कि यह पत्र रविंद्र राय ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखा था.

2014 के झारखंड विधानसभा चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा ने आठ सीटों पर जीत हासिल की थी. आठ में से छह विधायक सरकार बनते वक्त बीजेपी में शामिल हो गये. उस वक्त से विधानसभा के झालसा में इस मामले की सुनवाई विधानसभा अध्यक्ष कर रहे हैं. चिट्ठी के मुताबिक-

  • गणेश गंझू, जो सिमरिया के विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये चतरा के सांसद सुनील कुमार सिंह से लिये. मामले की निगरानी राकेश प्रासद कर रहे थे.
  • रणधीर कुमार सिंह, जो सारठ से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये महेश पोद्दार (जो अभी झारखंड से राज्यसभा सांसद हैं) से लिये. मामले की निगरानी दीपक प्रकाश कर रहे थे.
  • नवीन जायसवाल, जो हटिया से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये नगर विकास मंत्री सीपी सिंह से लिये. मामले की निगरानी प्रदीप कुमार वर्मा कर रहे थे.
  • अमर कुमार बाउरी, जो चंदनकियारी से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए एक करोड़ रुपये विधायक विरंची नारायण से लिये. मामले की निगरानी संजय सेठ कर रहे थे.
  • आलोक कुमार चौरसिया, जो डालटनगंज से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये अनंत ओझा से लिये. मामले की निगरानी उषा पांडे कर रही थीं.
  • जानकी कुमार यादव, जो बरकट्ठा से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये मुख्यमंत्री रघुवर दास से लिये. मामले की निगरानी राजेंद्र सिंह कर रहे थे.

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रिसीविंग पर्ची सीएम रघुवर दास को सौंपी गयी

चिट्ठी के मुताबिक, तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राय राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखते हैं कि सभी विधायकों को खरीदने के लिए कुल 11 करोड़ रुपये खर्च हुए. सभी विधायक से पैसा रिसीव करने की पर्ची लेकर सीएम रघुवर दास को सौंपी गयी. चिट्ठी में यह भी लिखा हुआ है कि सभी विधायकों को शेष राशि 36 महीने के बाद दी जायेगी. राशि देने का जिम्मा सीएम रघुवर दास का है और झाविमो से बीजेपी में आये सभी विधायकों के पार्टी में बने रहने का जिम्मा तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राय ने ली.

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