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बहुमत से दूर नजर आती है बीजेपी

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Manoj Kumar

गत लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी को अकेले बहुमत यानी 282 सीटें प्राप्त हुई थी तथा एनडीए के खाते में 336 सीटें गयी थी. उस चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए का प्रदर्शन अप्रत्याशित था. सन 1984 के चुनाव के बाद यानी 30 वर्षों के उपरांत किसी दल को बहुमत प्राप्त हुआ था. डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए का शासन 10 वर्षों रहा था. कई महत्वपूर्ण कार्यों के बावजूद यूपीए सरकार बेहद बदनाम हो गयी थी. टू जी, थ्री जी,कॉमनवेल्थ, कोलगेट आदि घोटालों से सरकार अपनी चमक खो चुकी थी. कमजोर व अप्रभावी नेतृत्व का ठप्पा लग चुका था तथा देश में निराशा का माहौल था. उस निराशा को अपने पक्ष में करने तथा छोटे-छोटे दलों के साथ गठबंधन कर नरेंद्र मोदी चुनाव जीतने में सफल रहे और कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे खराब रहा. कांग्रेस मात्र 44 सीटें जीत पाई तथा इसके नेता को संवैधानिक विपक्ष का दर्जा भी हासिल नहीं हुआ.

नरेंद्र मोदी सरकार व बीजेपी नोटबंदी, जीएसटी, सर्जिकल स्ट्राईक, गरीब सवर्णों को 10%आरक्षण आदि-आदि महत्वपूर्ण कार्य करते हुए इस चुनाव में उतरेगी. यहां उल्लेखनीय है कि नरेंद्र मोदी के सक्षम नेतृत्व में बीजेपी यूपी, महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा, गुजरात, झारखण्ड, उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में विधान सभा चुनाव जीतने में कामयाब रही और सरकार बनाई. तथा मणिपुर, गोवा तथा बिहार में येन केन प्रकारेण सरकार बनाने में कामयाब रही. हां गत वर्ष विधान सभा चुनाव में कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में बीजेपी सरकार नहीं बना पाई. इन राज्यों में राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनाने में कामयाब होकर पूर्ण उत्साह के साथ इस लोकसभा के चुनाव में उतरने जा रही है.

ज्ञातव्य है कि सन 2014 के चुनाव में बीजेपी व एनडीए को हिंदी भाषी राज्यों यथा यूपी(73/80), बिहार(31/40), झारखण्ड(13/14), एमपी(27/29), छत्तीसगढ़(10/11), हरियाणा(7/10), राजस्थान(25/25), हिमाचल प्रदेश(4/4), उत्तराखण्ड(5/5) और दिल्ली(7/7) के कुल लोकसभा सीटों 225 में 202 सीटें प्राप्त हुई थी. इसके अलावा गैर हिंदी भाषी राज्यों में गुजरात के 26 सीटों में 26, महाराष्ट्र के 48 सीटों में 41, कर्नाटक के 28 में 17 तथा असम के 14 में 07 सीटें एनडीए के खाते में गयी थी.

चुनाव तो परसेप्शन और समीकरण पर जीते जाते हैं और हां अपने भाषण कला व व्यक्तित्व तथा सर्जिकल स्ट्राईक के बल पर मोदी जी के नेतृत्व में एनडीए परसेप्शन के मामले में यूपीए पर काफी भारी है. लेकिन दलीय गठबंधन व उसके आधार वोट को देखते हुए कहा जा सकता है कि बीजेपी बहुमत से चूक रही है.

बीजेपी यूपी,एमपी,राजस्थान,छतीसगढ़,झारखण्ड,महाराष्ट्र,कर्नाटक में अपनी सीटें खो रही है.बीजेपी बिहार,गुजरात,दिल्ली,उत्तराखण्ड,हरियाणा,हिमाचल प्रदेश में यथास्थिति बरकरार रखने में सक्षम है तथा असम,पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, तमिलनाडु में गत चुनाव की तुलना में अधिक सीटें जीत सकती है, लेकिन यह सीटें उतनी नहीं होंगी जितनी सीटें यूपी, महाराष्ट्र, एमपी, राजस्थान, छतीसगढ़, झारखण्ड में लूज करेगी. विशेष रूप में यूपी में समाजवादी और बीएसपी गठबंधन बीजेपी को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं महाराष्ट्र में पिछले दफे एनसीपी और कांग्रेस अलग-अलग लड़ी थी, जिसका लाभ बीजेपी को मिला था. लेकिन इस बार दोनों एक साथ मिलकर चुनौती देंगे. कर्नाटक में भी देवगौड़ा की पार्टी और कांग्रेस मिलकर बीजेपी को नुकसान पहुंचाने में सक्षम है.

अतएव परसेप्शन और नेतृत्व के मामले में आगे होने के बावजूद बीजेपी बहुमत से दूर नजर आ रही है. मोदी जी के डर और अपने-अपने अस्तित्व बरकरार रखने की गरज से विपक्षी दलों में जो गठबंधन बना व बनता दिख रहा है, वह कारगर जान पड़ता है. हां बीजेपी के लिए संतोष की बात यह कि यूपीए भी बहुमत से बहुत दूर है.

ये लेखक के निजी विचार हैं

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