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भाजपा नेता दिलीप सिंह के बेटे और भतीजे को मिली बेल,गैर जमानतीय धाराएं हटींं

एसआइ ममता कुमारी ने अपने इगो का मामला बनाकर दोनों को जेल भेजवा दिया था

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Dhanbad : बाइक चेकिंग के दौरान महिला एएसआइ ममता कुमारी मामले में भाजापा नेता के बेटे और भतीजा को बेल मिल गया है. एएसआइ ममता कुमारी ने अपने इगो का मामला बनाकर दोनों को जेल भेजवा दिया था. दोनों पर लगायी गयी सभी गैर जमानती धाराएं वरीय पुलिस अधिकारी ने अपने सुपरविजन में हटा दी है. पुलिस ने मामले में केस डायरी सोमवार को ही सीजेएम की अदालत में भेज दी. इसमें सरकारी काम में बाधा पहुंचाना और महिला एएसआइ से छेड़खानी से संबंधित गैर जमानती धाराएं हटा दी गयी. न्यायालय ने इस मामले में जेल में बंद दोनों युवकों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया.

एएसआई ने अपने पद का दुरुपयोग कर निर्दोष को जेल भेजवाया

बता दें कि दोनों युवकों को इगो का सवाल बनाकर महिला जमादार ने थाना से रिहा करने के बाद भी गिरफ्तार कराया था. नौकरी से इस्तीफा देने और वर्दी नहीं पहनने की जिद्द ठान ली थी. अब इस मामले में युवकों पर से गैर जमानती धाराएं हटने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि महिला एएसआई ने अपने पद का दुरुपयोग कर निर्दोष को जेल भेजवाया. इसके साथ ही महिला एएसआई के खिलाफ अनुशासनहीनता का भी स्पष्ट मामला बन रहा है. इस कारण उनके खिलाफ कार्रवाई होना तय है.  मामले में राहत मिलने पर भाजपा नेता दिलीप सिंह ने न्यूज विंग के प्रति कृतग्यता व्यक्त की.

इस मामले की सच्चाई न्यूज विंग ने सामने लायी. लोगों को बताया कि यह मामला युवकों के मनबढू होने का नहीं है. संबंधित पुलिस पदाधिकारी के इगो का है. चूंकि, झूठे आरोप लगानेवाली एक महिला थी इसलिए सीधे साधे युवकों का बचाव कमजोर पड़ गया था.

मामले को लेकर भाजपा में भी जोरदार बवाल मचा

मामले को लेकर बीजेपी दो खेमो में बंटा. जिला भाजपा कार्यालय में मेयर की नो इंट्री का बोर्ड लगा दिया गया. कई मंडल अध्यक्षों ने इस्तीफा दे दिया. इसी बीच एसएसपी मनोज रतन चोथे की बदली हो गयी. उनकी जगह किशोर कौशल आ गये. मामले की गूंज सत्ता के गलियारे में दूर तक हुई. भाजपा नेताओं ने भी मामले को अपना इगो बना लिया. युवकों के पक्ष में विधायक राज सिन्हा खुल कर आये. मामले को लेकर न्यूज विंग से बातचीत में अपनी ही सरकार और सिस्टम पर बरसे. अपनी लाचारी भी व्यक्त की.

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