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पांच जुलाई के झारखंड बंद पर BJP ने कहा- नौटंकी कर रहा है विपक्ष

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Ranchi : पांच जुलाई को विपक्ष द्वारा बुलाये गये झारखंड बंद से पहले सत्ता और विपक्ष के नेता आमने-सामने हो चुके हैं. विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने दोपहर में अपने आवास पर पत्रकारों को बुलाकर बंदी को लेकर ताल ठोंकी, तो वहीं बीजेपी ने भी शाम होते-होते विपक्ष पर जमकर निशाना साधा. हेमंत सोरेने ने पत्रकारों से कहा कि पांच जुलाई को होनेवाली बंदी 100 नहीं, बल्कि 200 फीसदी कामयाब होगी. वहीं, पलटवार करते हुए बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने पांच जुलाई के झारखंड बंद को नौटंकी करार दिया. शाहदेव ने कहा कि विपक्ष बीजेपी की उस खुली चुनौती से भाग गया, जिसमें बीजेपी ने प्रतिपक्ष के नेता को लिखित दस्तावेजों से यह सिद्ध करने को कहा था कि भूमि अधिग्रहण मामले में निजी उद्योग को कहीं भी फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. शाहदेव ने कहा कि अखबारों में बयान आया कि विपक्ष नुक्कड़ नाटक के जरिये जनता को जागृत करेगा. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि नौटंकी में तो विपक्ष के नेताओं को महारत है, इसलिए वह ऐसे नाटकों का सहारा ले रहे हैं.

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पैसे का मेनिया हो गया है हेमंत सोरेन को

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने हेमंत सोरेन को इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दी थी, लेकिन हेमंत सोरेन ने इसे बहानेबाजी कर टाल दिया. एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन को पैसे का मेनिया हो गया है, इसलिए उन्हें सोते-जागते सिर्फ पैसा और बही-खाता ही याद आता है. शाहदेव ने प्रभाकर तिर्की को नसीहत दी कि वह ईसाई मिशनरियों के भोंपू बनकर बोलना बंद करें. संवैधानिक और गैरसंवैधानिक कार्य के बीच के अंतर को देखना सरकार का काम है.

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22 फीसदी आदिवासियों के हक पर कब्जा जमा रखा है चार फीसदी धर्मांतरित आदिवासियों ने

उन्होंने आरोप लगाया कि 22% आदिवासियों के हक पर 4% धर्मांतरित आदिवासियों कब्जा कर रखे है. जब राज्य सरकार अपनी परंपरा को कायम रखनेवाले इस 22% समूह को आरक्षण का शत-प्रतिशत लाभ देना चाहती है, तो ईसाई मिशनरी खुद और अपने पोषित संगठनों से इसका विरोध करने में लगी है. शाहदेव ने कहा कि अगर ईसाई मिशनरी सचमुच यहां के आदिवासियों का भला चाहती है, तो उन्हें इस प्रस्ताव का स्वागत करना चाहिए न कि विरोध.

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अब खूंटी जाकर उसे अस्थिर करेंगे हेमंत :  दीनदयाल

बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता दीनदयाल बर्णवाल ने आज प्रेस वार्ता में कहा कि हेमंत सोरेन कि बैठक बिल्कुल हल्की बैठक रही. बैठक में हेमंत सोरेन जी ने कहा कि खूंटी जाकर मैं देखूंगा कि खूंटी में क्या हुआ है. इससे साफ जाहिर होता है कि वह अभी तक सोये हुए थे, अब खूंटी जाकर खूंटी को अस्थिर करेंगे. फिर भोले-भाले आदिवासियों को फिर से भड़काने का काम करेंगे, जबकि सरकार धीरे-धीरे खूंटी को पूरी तरह सामान्य बनाने में लगी हुई है. बर्णवाल ने यह भी कहा कि हेमंत सोरेन की बैठक में गठबंधन के बड़े नेताओं की अनुपस्थिति यह बताती है कि गठबंधन में दरार आ चुकी है और विपक्षा का कोई भी बड़ा नेता एक ऐसे नेता को, जो जमीन के घोटाले में फंसा हुआ है, उसे मुखिया के रूप में स्वीकार नहीं कर पा रहा है.

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