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राज्यों में ब्रांड मोदी की चमक फीकी पड़ने के बाद बीजेपी बदल रही रणनीति

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  • लोकसभा चुनाव के मुकाबले विधानसभा चुनाव में वोट शेयर घटने से चिंतित है बीजेपी

New Delhi: देश में भले ही अब भी ब्रांड मोदी का जादू चल रहा है पर राज्यों में इसकी चमक फीकी पड़ती देख बीजेपी अपनी रणनीति बदलने पर विचार कर रही है.

झारखंड और दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी ने चुनावी रणनीति की समीक्षा की है. भाजपा राज्यों में अब 50 प्रतिशत वोट हासिल करने के लिए नयी रणनीति पर विचार कर रही है.

राज्यों में स्थानीय नेतृत्व को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम हो रहा है. साथ ही समान विचारधारा वाले क्षेत्रीय दलों के साथ गंठजोड़ पर भी पार्टी गंभीरता से विचार कर रही है.

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झारखंड में बीजेपी ने अपने पुराने कद्दावर नेता बाबूलाल मरांडी को फिर से पार्टी में शामिल कराया है. बाबूलाल मरांडी ने 14 साल पहले अपनी अलग पार्टी झारखंड विकास मोर्चा का गठन किया था.

राज्यों में मजबूत चेहरे

अभी हाल ही में दिल्ली विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद हुई समीक्षा में यह संकेत मिले हैं कि मजबूत सीएम चेहरा नहीं होने के कारण भी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है. पार्टी अब इस रणनीति पर काम कर रही हैक जहां संभव वहां मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को सामने रख कर चुनाव लड़ा जाये.

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एनडीए को मिले थे 50% वोट

भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस बात से चितिंत है कि उसके वोट शेयर में कमी आयी है, लोकसभा चुनाव में जहां एनडीए को 50 फीसदी से अधिक मत मिले थे वहीं विधानसभा चुनावों में उसे इससे काफी मत मिले हैं.

पिछले दो लोकसभा चुनावों में एनडीए को 17 राज्यों में 50 फीसदी से अधिक वोट मिले लेकिन राज्यों के विधानसभा चुनावों में वह काफी पीछे रही. बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, ओड़िशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बीजेपी का मुकाबला क्षेत्रीय दलों से है.

51 प्रतिशत वोट का लक्ष्य

BJP के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि हम समीक्षा कर रहे हैं. हमें देशभर में 51 प्रतिशत वोट शेयर तक जाने के लिए योजनाबद्ध ढंग से बढ़ना है. इसके लिए प्रदेश नेतृत्व को बढ़ावा देने के साथ ही क्षेत्रीय दलों से गठजोड़ की रणनीति का विकल्प भी पार्टी के सामने है.

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