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भाजपा ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर किया सबसे बड़ा चुनावी घोटाला, दिल्ली की वोटर लिस्ट से डेढ़ मिलियन से ज्यादा लोगों का काटा नाम : राघव चड्ढा

AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा- यह भारत के 70 सालों के इतिहास में सबसे बड़ा चुनावी घोटाला है, वोटर लिस्ट से काटे गये लगभग डेढ़ मिलियन लोगों के नामों की चुनाव आयोग द्वारा पुनः जांच की प्रक्रिया निकली कोरा मजाक

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New Delhi : रविवार को आम आदमी पार्टी के दक्षिणी दिल्ली के लोकसभा क्षेत्र प्रभारी और राष्ट्रीय प्रवक्ता राघव चड्ढा ने पत्रकारों से बात की. उन्होंने पत्रकारों से कहा कि जैसा कि आप सबको पता है कि अभी कुछ दिनों पहले चुनाव आयोग ने दिल्ली की मतदाता सूची से लगभग डेढ़ मिलियन लोगों के नाम काट दिये थे, उसी संदर्भ में दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य चुनाव आयुक्त से मिला और इस बारे में शिकायत दर्ज करायी कि दिल्ली में चुनाव आयोग द्वारा जो लगभग डेढ़ मिलियन लोगों के नाम काटे गये हैं, उनमें से बहुत सारे नाम असंवैधानिक तरीके से और उनलोगों के नाम काट दिये गये हैं, जो आज भी उसी पते पर मौजूद हैं, जहां वे पहले रहते थे. इस पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने आश्वासन दिया था कि हम दिल्ली के दो अलग-अलग इलाकों में वहां के पूरे मतदाताओं की सूची के अनुसार जांच करवायेंगे.

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चुनाव आयोग ने निरीक्षण प्रक्रिया का मजाक बना दिया

राघव चड्ढा ने कहा कि इस संदर्भ में हमने चुनाव आयोग को तुगलकाबाद के लाल कुआं और हरकेश नगर का नाम लिखकर दिया और आग्रह किया कि इन दोनों इलाकों की जांच करवा लीजिये. उस पर चुनाव आयुक्त ने कहा था कि अगर जांच में कोई भी गड़बड़ी पायी जाती है, तो हम पूरी दिल्ली में मतदाता सूची के अनुसार इसकी जांच करवायेंगे. चुनाव आयोग ने 11 अलग-अलग टीमों का गठन किया और उन्हें 16 नवंबर से 18 नवंबर तक जांच पूरा करने का आदेश दिया. राघव चड्ढा ने कहा कि इस सारी प्रक्रिया के बाद हमें पता चला कि यह सब केवल और केवल जनता की आंख में धूल झोंकने के लिए किया गया. चुनाव आयोग द्वारा उस पूरी निरीक्षण प्रक्रिया का मजाक बना दिया गया. राघव चड्ढा ने चार बिंदुओं में इस पूरी जांच प्रक्रिया में हुई खामियों को प्रस्तुत करते हुए कहा-

  1. चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची से काटे गये लगभग डेढ़ मिलियन लोगों के नाम की पूरी और सही सूची नहीं दी जा रही.
  2. इस प्रक्रिया में चुनावी कानूनों का बिल्कुल भी पालन नहीं किया गया, बल्कि खुल्लम-खुल्ला उसकी धज्जियां उड़ायी गयी हैं.
  3. तीसरा काटे गये नामों की सूची के अनुसार दोबारा निरीक्षण केवल एक मजाक बनकर रह गया है.
  4. यह एक प्रकार से सबसे बड़ा निर्वाचन प्रक्रिया घोटाला है, जिसमें लगभग डेढ़ मिलियन लोगों से असंवैधानिक तरीके से उनका मतदान करने का अधिकार छीन लिया गया है.

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काटे गये डेढ़ मिलियन नामों की सही सूची नहीं दे पाया है चुनाव आयोग

राघव चड्ढा ने कहा कि यह बड़े ही आश्चर्य की बात है कि देश का चुनाव आयोग, जिस पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मतदान की प्रक्रिया की जिम्मेदारी है, वह अभी तक हमें मतदाता सूची में उन काटे गये डेढ़ मिलियन लोगों की सही सूची उपलब्ध नहीं करवा पाया है. चुनाव आयोग द्वारा वेबसाइट पर जो सूची डाली गयी है और चुनाव आयोग द्वारा बनायी गयी टीम जो सूची लेकर निरीक्षण करने आयी थी, वे दोनों ही सूचियां आपस में मेल नहीं खाती हैं. जांच के दौरान भी कई ऐसे मतदाता पाये गये, जिन्होंने कहा कि हमारा नाम भी मतदाता सूची से काट दिया गया है. लेकिन, आश्चर्य की बात यह है कि न तो चुनाव आयोग की वेबसाइट पर और न ही निरीक्षण के लिए आयी टीम की सूची में उनका नाम पाया गया. यह दर्शाता है कि यह सारी प्रक्रिया केवल और केवल जनता को गुमराह करने के लिए एक षड्यंत्र की तरह की गयी है.

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नाम काटने से पहले मतदाता के पते पर नहीं चिपकाया गया नोटिस

चड्ढा ने कहा कि वोटर लिस्ट से किसी भी मतदाता का नाम काटने से पहले एक प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है. जिस भी व्यक्ति का नाम सूची से काटा जा रहा है, उसके पत्ते पर एक नोटिस चिपकाया जाता है और उसे अपना पक्ष रखने का एक मौका दिया जाता है. काटे गये नामों की सूची उस राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियों को भी दी जाती है. और भी अन्य कई चरण इस प्रक्रिया में शामिल होते हैं. परंतु, यहां यह बड़ी ही विचारणीय बात है कि डेढ़ मिलियन लोगों के नाम दिल्ली की मतदाता सूची से काट दिये जाते हैं, लेकिन न तो किसी के यहां कोई नोटिस चिपकाया जाता है और न ही किसी भी प्रकार की कोई सूचना दी जाती है और न ही राज्य की किसी पार्टी को इसकी सूचना उपलब्ध करायी जाती है. यह एक प्रकार से कानून की खुले तौर पर अवमानना करना है. राघव चड्ढा ने कहा कि इस असंवैधानिक कृत्य के विरुद्ध आम आदमी पार्टी को जो भी करना पड़े हम करेंगे. अगर कोर्ट जाना पड़ा, तो कोर्ट भी जायेंगे, आंदोलन करना पड़ा, तो आंदोलन भी करेंगे, सड़कों पर उतरना पड़ा, तो सड़कों पर भी उतरेंगे. परंतु, भाजपा को दिल्ली के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार का हनन नहीं करने देंगे.

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