JharkhandLead NewsRanchi

केंद्रीय कृषि मंत्री का इस्तीफा मांगने पर CM हेमंत पर हमलावर हुई भाजपा, कहा- रोज वादाखिलाफी करनेवाली सरकार पहले खुद दे इस्तीफा

Ranchi : केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा पर सीएम हेमंत सोरेन ने केंद्रीय कृषि मंत्री का इस्तीफा मांगा है. इस पर प्रदेश भाजपा ने उनके बयान पर पलटवार किया. शनिवार को प्रदेश महामंत्री आदित्य साहू ने कहा कि केंद्रीय मंत्री पर बोलने का मुख्यमंत्री को कोई नैतिक अधिकार नहीं. वे पहले अपने गिरेबां में झांकें.

राज्य सरकार रोज अपने वादे, घोषणाओं, निर्णयों से पलटती है. ऐसे में तो सीएम को रोज इस्तीफा ही देते रहना चाहिए. प्रतिवर्ष 5 लाख रोजगार नहीं देने पर इस्तीफा की घोषणा सीएम ने की थी.

ऐसे में वह अब भी क्यों कुर्सी पर बैठे हैं. बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने की बात करनेवाले आज चुप हैं. राज्य सरकार द्वारा अपने फंड से मुफ्त वैक्सीन लगाने की घोषणा करने के बाद पीछे हटनेवाले सीएम को इस्तीफा देना चाहिए. हेमंत सरकार और शामिल दलों की कथनी और करनी में आसमान जमीन का अंतर है.

इसे भी पढ़ें :बाल पत्रकार कार्यक्रम में शामिल हुए हेमन्त, कहा-बेहतर शिक्षा व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता

7 वर्षों में 70 वर्षों से अधिक काम

आदित्य साहू के मुताबिक मोदी सरकार ने 7 वर्षों में किसानों के लिए जितना कर दिखाया है, उतना पिछले 70 वर्षों में नहीं हुआ.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार कृषि और किसानों के हर संभव विकास और आय को दोगुनी करने की दिशा में सार्थक प्रयास लगातार कर रही है. झारखंड सरकार किसानों की ऋण माफी, धान के क्रय मूल्य के बकाये के भुगतान को सुनिश्चित करे.

इसे भी पढ़ें :जानें ऐसी क्या एमर्जेंसी आयी जो भारतीय मूल की कमला हैरिस बन गयी अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति

संघीय ढांचे पर प्रहार कर रहा झामुमो

झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने सेल, रेल और कोल कंपनियों के मामले में केंद्र पर सवाल खड़ा किया है. इस पर भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ प्रदीप वर्मा ने कहा कि झामुमो ने इन विषयों पर बोल कर भारत के संघीय ढांचे पर प्रहार किया है.

झामुमो को बोलने के पहले अपने राज्य सरकार द्वारा हो रहे निर्णयों पर जनता को बताना चाहिए कि उन्होंने अबतक राज्य के आदिवासी, मूलवासी समाज को लाभान्वित करने की दिशा में कितने निर्णय लिये हैं.

कभी झामुमो सुप्रीमो देश के कोयला मंत्री रहे हैं. झामुमो को यह बताना चाहिए कि उनके कार्यकाल में राज्य के आदिवासी मूलवासी लोगों को कितना लाभ पहुंचाया गया.

इसे भी पढ़ें :राष्ट्रपति के हाथों झारखंड को मिला शहरी स्वच्छता में देश में नंबर वन होने का अवार्ड

परिवार का खजाना भरने की चिंता करने वाली पार्टी को राज्य की कभी कोई चिंता नहीं रही. भाजपा ने राज्य का गठन कराया है. वही इसका विकास भी करेगी.

राज्य सरकार में बैठे लोग अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए उल्टे सीधे बयान देकर जनता को दिग्भ्रमित करने में जुटे हैं. राज्य सरकार दो वर्षों में डीडीसी की बैठक नहीं बुला सकी.

यह सरकार केवल विज्ञापनों पर टिकी हुई है. जितने पैसे राज्य सरकार विज्ञापनों पर खर्च कर रही, उतने में कई विकास योजनाएं प्रारम्भ की जा सकती थीं.

इसे भी पढ़ें :Coffee With थरूर: ‘दुःख की बात है, देश में डिमांड के अनुसार मेडिकल कॉलेज नहीं’

Related Articles

Back to top button