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भाजपा ने हेमंत सरकार पर लगाया किसानों को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप

Ranchi : धान खरीद मामले में हेमंत सरकार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद दीपक प्रकाश ने रविवार को नाराजगी जाहिर की. कहा कि किसान विरोधी हेमंत सरकार ने किसानों को आत्महत्या के लिये बाध्य कर दिया है. किसान मेहनत कर अपनी फसल उगाते हैं. पर राज्य सरकार उनके फसल को न खरीदकर उन्हें मुसीबत में डाल रही है. बोकारो की घटना से स्पष्ट हो गया है कि यह सरकार किसानों की कितनी बड़ी विरोधी है. यह कैसी व्यवस्था है जहां किसान अपने हक और अधिकार के लिये दर दर भटकता रहे. कोरोना काल में भी अपना खून पसीना एक कर उन्होंने भरपूर धान का उत्पादन किया. राज्य सरकार ने काफी विलंब से खरीदारी शुरू की. अपनी व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने के बजाए किसानों पर ही मात्रा का प्रतिबंध लगा दिया है.

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धान खरीद की राह नहीं आसान

दीपक प्रकाश ने कहा कि सरकार का मतलब व्यापार और हानि लाभ नहीं, बल्कि लोक कल्याण होता है. एक तरफ किसान धान की खरीद के लिये गिड़गिड़ा रहे हैं तो दूसरी तरफ पैक्स में खरीद से इनकार होता रहा. ऐसे में आखिर किसान कहां जाएं. हेमंत सरकार एक प्रकार से किसानों के स्वाभिमान और सम्मान को बिचौलियों के हाथों गिरवी रखवाना चाहती है. एक तरफ राज्य सरकार कॉल सेंटर के माध्यम से समस्या के समाधान का ढिंढोरा पिट रही है वहीं दूसरी तरफ किसानों का कोई सुनने वाला नहीं. यह सरकार अब किसान विरोधी ही नहीं, किसानों की हत्यारी सरकार भी बन चुकी है. कांग्रेस पार्टी का किसानों के साथ प्रारम्भ से ही ऐसा व्यवहार जगजाहिर है. यह पार्टी किसानों के हितैषी होने का केवल नाटक करती है.

प्रशासन का राजनीतिकरण

मुख्यमंत्री द्वारा आईएएस अधिकारियों के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति संबंधी केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र से विरोध दर्ज कराया गया है. दीपक के मुताबिक मुख्यमंत्री चंद अधिकारियों के इशारे पर निर्णय ले रहे हैं. मुख्यमंत्री प्रशासन एवं प्रशासनिक सेवाओं का राजनीतिकरण कर रहे हैं. संघ लोक सेवा आयोग जो भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति करता है, वह केंद्र सरकार के अधीन है. चयन के बाद अधिकारियों की सेवाएं विभिन्न राज्यों के लिये दी जाती हैं.

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ऐसे में केंद्र सरकार का यह अधिकार होना ही चाहिये कि वह आवश्यकतानुसार जब चाहे, जहां चाहे उनकी सेवा ले सके. इसमें राज्य सरकार को कोई ऐतराज होना ही नहीं चाहिये. भारतीय प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों की योग्यता क्षमता का लाभ पूरे देश को मिले, यह केंद्र सरकार की सोच है. हर पदाधिकारी में कार्य क्षमता एवं विशेषताएं होती हैं जिसका केंद्र सरकार जनता के हित मे उपयोग करना चाहती है. इस सोच में न तो किसी राज्य के अधिकार का हनन है और न किसी पदाधिकारी विशेष के राग अथवा द्वेष.

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