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भाजपा ने हेमंत सरकार पर लगाया ओबीसी सर्वे रोकने का आरोप, कहा- मिले 27 फीसदी आरक्षण

Ranchi: बुधवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय में भाजपा पिछड़ा जाति मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ निखिल आनंद ने सांगठनिक बैठक की. इसमें मोर्चा के जिला प्रभारी और जिला अध्यक्ष भी शामिल हुए. इसके बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पूर्व में रघुवर दास की सरकार में राज्य में ओबीसी सर्वे का काम शुरू किया गया था. पर हेमंत सरकार ने सत्ता में आने के साथ इसे बंद कर दिया. राज्य में ओबीसी समाज के लगभग 52 प्रतिशत से अधिक लोग हैं.

वे सरकार के इस रवैये से नाराज हैं. राज्य सरकार जल्द से जल्द 27 प्रतिशत आरक्षण दे. राज्य में अभी विकास विरोधी और धार्मिक तुष्टिकरण करने वाली हेमंत सरकार है. इसके विरुद्ध भाजपा द्वारा संवैधानिक तरीके से विधानसभा घेराव का आयोजन किया गया था.

इसमें भाजपा के प्रदेश पदाधिकारियों, मोर्चा कार्यकर्ताओं पर बर्बरतापूर्ण लाठी चार्ज किया गया था जो निंदनीय है. किसी भी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं की पिटाई करना लोकतंत्र की हत्या है.

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जनगणना सर्वे सेंसेक्स बिल में फेरबदल

डॉ निखिल आनंद ने कहा कि जेएमएम, कांग्रेस व राजद के लोग ओबीसी के हितों पर घड़ियाली आंसू बहाते हैं. हम जानना चाहते हैं कि आखिर 2011 में जातिगत जनसंख्या जनगणना सर्वे सेंसेक्स बिल में फेरबदल कर जातिगत जनगणना को क्यों हटा दिया.

इस काम के 55 हजार करोड़ रुपये के पैसे का बंदरबांट NGOs वगैरह को क्यों किया. इसकी भी उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिए. ये गठबंधन जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम करती है लेकिन अब जनता इनके झांसे में आने वाली नहीं है.

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मोदी सरकार में सम्मान

आनंद ने कहा कि हेमन्त सरकार महिला, किसान, युवा, ओबीसी व दलित समाज विरोधी है. इनका रवैया एक विशेष समुदाय को खुश करने का है. सरकार केवल धार्मिक तुष्टिकरण कर रही है जो लोकतंत्र के लिए खतरा है.

काका कालेकर की रिपोर्ट व मण्डल आयोग की रिपोर्ट के बाद या कहें तो देश की आजादी के 70 सालों के बाद पहली बार केंद्र की भाजपा की नरेंद्र मोदी की सरकार ने ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के काम किया है.

पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में ओबीसी के 27 मंत्री को शामिल किया गया है. भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार ने ओबीसी समाज को सम्मान देने का कार्य किया है और झारखंड राज्य से भी ओबीसी समाज से एक महिला को केंद्र में मंत्री बनाया गया है.

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