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टीएसपी की राशि से बिरसा कृषि विश्वविद्यालय 10 जिलो में चलायेगा क्षमता परियोजना

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Ranchi: झारखंड के जनजातीय बहुल 10 जिलों में क्षमता परियोजना के तहत मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन और बकरी पालन को प्रोत्साहित कर किसानों की आय बढाना है. इसके तहत बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची की ओर से कार्य किया जाना है. इसके लिए जनजातीय उप योजना के तहत 7.53 करोड़ की परियोजना बिरसा कृषि विश्वविद्यालय दी गयी है.

विवि के कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से परियोजना का संचालन होगा. इसके मद्देनजर संबंधित केवीके वैज्ञानिकों के तकनीकी सुदृढीकरण के लिए विवि में 22 मार्च को कार्यशाला आयोजित की गयी.

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सही लोगों तक पहुंचाना है परियोजना का लाभ

परियोजना के बारे में कुलपति डॉ परविंदर कौशल ने कहा कि इसका लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा. लाभुकों का चयन वैज्ञानिक करेंगे. परियोजना के अंतर्गत चयनित किसानों को केवल परामर्श और प्रशिक्षण देकर नहीं छोड़ देना है, बल्कि सालों भर उनका मार्गदर्शन करना है. विवि के सहायक  निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ आरएस कुरील ने कहा कि यह परियोजना किसानों की आय दोगुनी करने में सहायक होगी.

इसके लिए वैज्ञानिकों को टीम भावना से काम करना होगा. मधुमक्खी पालन, पशुपालन एवं मुर्गी पालन और जैविक खेती के माघ्यम से 10 जिला के आदिवासी किसानो का आय दुगना करने का काम किया जायेगा.

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किन जिलो में चलेगी परियोजना

यह परियोजना पाकुड़, साहिबगंज, दुमका, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, रांची, लोहरदगा, लातेहार, सिमडेगा और गढ़वा में चलेगी. मधुमक्खी पालन के लिए 10 जिले से 60-60 किसान यानी कुल 600 किसान चुने जायेंगे. मुर्गी पालन और बकरी पालन के लिए प्रत्येक जनजातीय बहुल जिले के चार-चार गांवों से 25 पशुपालक, यानी कुल 1000 किसान चुने जायेंगे. मधुमक्खी पालकों द्वारा उत्पादित मधु के एक्सट्रैक्शन और प्रोसेसिंग के लिए प्रत्येक केवीके कार्य करेगा.

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