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बिहार के नि:शक्तता आयुक्त डॉ शिवाजी कुमार को भारतीय पुनर्वास परिषद ने विशेषज्ञ पैनल से किया निष्कासित

देश भर में 10 विशेषज्ञों पर हुई कार्रवाई, इन पर निरीक्षण के क्रम में अनियमितता और लापरवाही बरतने की बातें हुईं साबित

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Ranchi : भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) ने बिहार के नि:शक्तता आयुक्त डॉ शिवाजी कुमार को विशेषज्ञों के पैनल से निष्कासित कर दिया है. डॉ कुमार समेत देश भर के 10 विशेषज्ञों की टीम पर परिषद की ओर से यह कार्रवाई की गयी है. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के अधीन आनेवाली परिषद के सहायक निदेशक डॉ राजेश कुमार वर्मा की तरफ से यह कार्रवाई की गयी है. इन पर परिषद की टीम के विशेषज्ञ के रूप में जांच करने के क्रम में अनियमितता और लापरवाही बरतने के पुख्ता प्रमाण प्राप्त हुए थे. 2017-18 में इन सभी विशेषज्ञों के खिलाफ परिषद के समक्ष शिकायतें आयी थीं. कार्यालय आदेश फाइल नंबर 8 ए-पॉलिसी (रिकोग)-आरसीआई के तहत यह कार्रवाई की गयी है.

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इन विशेषज्ञों को हटाया गया

भारतीय पुनर्वास परिषद की तरफ से जिन विशेषज्ञों पर कार्रवाई की गयी है, उनमें डॉ शिवाजी कुमार के अलावा विशाखापत्तनम के वेंकटेश्वर राव सेनापति, बाराबांकी उत्तरप्रदेश के शैलेंद्र कुमार गिरि, मथुरा उत्तरप्रदेश की कोमल मनसानी, नागपुर महाराष्ट्र के विजय कुमार, कानपुर देहात के रविंद्र प्रताप सिंह, रायबरेली की अंजू सिंह, गाजियाबाद की सुनीता सिंह, नयी दिल्ली के स्वदेश राय, रोहतक हरियाणा के शैलेश कुमार शामिल हैं.

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कैसे आया डॉ शिवाजी कुमार का नाम

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डॉ शिवाजी कुमार की संस्था इंडियन स्पोर्ट्स फेडरेशन फॉर सेरेब्रल पाल्सी द्वारा पहाड़ सिंह खैरा, नासरगंज में विकलांग छात्र-छात्राओं के लिए संचालित विद्यालय में फर्जी तरीके से शिक्षकों की नियुक्ति करने और खेलकूद के उपकरणों में भारी गड़बड़ी करने के कारण उन पर कार्रवाई हुई है. इस गड़बड़ी की जांच कोडरमा के तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी सीडी शर्मा ने की थी. जांच रिपोर्ट में कोडरमा के सतगांवा प्रखंड स्थित उपरोक्त विद्यालय को ही फर्जी बताया गया है. जांच पदाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इंडियन स्पोर्ट्स फेडरेशन फॉर सेरेब्रल पाल्सी कागजी संस्था है. इसके सभी पदधारक रांची के हरमू स्थित शुभगौरी एन्क्लेव, हिनू, अंबेडकर नगर, नामकुम के महुआटोली, अशोक नगर, टाटीसिल्वे, हजारीबाग और दुमका के रहनेवाले हैं. नासरगंज में यह विद्यालय एक भी दिन नहीं चला. जिले के तत्कालीन उपायुक्त ने संस्था के सभी पदाधिकारी और न्यासियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करते हुए सरकारी राशि का गबन करने के आरोप में कार्रवाई करने की अनुशंसा भी की थी. उपायुक्त ने राज्य निःशक्तता आयुक्त को पत्र लिखकर फर्जीवाड़े की जानकारी भी दी थी.

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क्या कहते हैं डॉ शिवाजी कुमार

प्रकरण पर डॉ शिवाजी कुमार (वर्तमान नि:शक्तता आयुक्त बिहार) का कहना है कि उन्हें मालूम नहीं है कि कोडरमा में उनकी कोई संस्था है. उन्होंने कहा कि उन पर की गयी कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट की जानकारी भी उन्हें नहीं है.

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