Bihar

बिहार यात्रा तो बहाना है, कुशवाहा का कद बढ़ाना है

Patna : कोरोना महामारी के बीच जनता दल यूनाइटेड (जदयू) संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष व बिहार विधान परिषद के सदस्य उपेंद्र कुशवाहा बिहार की यात्रा पर निकले हैं. यात्रा की शुरुआत उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरह पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर से शुरू की है. यात्रा के तीसरे दिन सोमवार को वे चकिया प्रखंड के दलित बस्ती के लोगों से मिले और कार्यकर्ताओं संग चाय-भूजा के साथ जनसमस्याओं पर चर्चा की. साथ ही लोगों की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया.

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अब तक ऐसी यात्राएं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही करते रहे हैं, पर बदली परिस्थिति में कुशवाहा का यात्रा पर निकलना पार्टी में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है.

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लोगों का कहना है कि बिहार यात्रा तो एक बहाना है, दरअसल पार्टी को उनका कद बढ़ाना है. और इस पर मुहर सीएम नीतीश कुमार भी लगा चुके हैं. उन्होंने जिले के नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिया है कि यात्रा के दौरान कुशवाहा का पूरा साथ दें.

यात्रा का मकसद पार्टी की मजबूती और विस्तार के साथ ही कार्यकर्ताओं से सीधे रूबरू होने के साथ ही नीतीश सरकार के विकास कार्यों को लोगों को बताना है. लेकिन, इसके पीछे का मकसद कुछ और है.

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जदयू में नीतीश कुमार के बाद नंबर दो की हैसियत रखने वाले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह को जदयू कोटे से केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलने के बाद पार्टी के अंदर सियासी गहमागहमी है.

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भले ही इस पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं हो, लेकिन अंदरखाने में सब कुछ सामान्य नहीं दिख रहा. आरसीपी सिंह के दिल्ली शिफ्ट करने बाद पार्टी में नंबर दो की कुर्सी खाली है और कुशवाहा उसके उत्तराधिकारी माने जा रहे हैं.

इसी के मद्देनजर उन्होंने बगैर चुनावी मौसम वे बिहार की यात्रा कर अपनी पैठ बनाना चाहते हैं. पार्टी के घटनाक्रमों पर गौर करें तो बहुत कुछ स्पष्ट हो जाता है.

आरसीपी के इस्पात मंत्रालय का पदभार संभालने के बाद जदयू के दिग्गज नेता और मुंगेर सांसद ललन सिंह की उपेंद्र कुशवाहा के साथ मुलाकात और बंद कमरे पर एक घंटे गुफ्तगू बहुत कुछ कहता है.

इसके बाद जदयू के मीडिया पैनल में बदलाव हुआ. मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह की छुट्टी कर उनकी जगह पर पूर्व मंत्री व एमएलसी नीरज कुमार को बैठा दिया गया. फिर पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष का बिहार यात्रा पर निकलना, ये गतिविधियां बहुत कुछ कहती हैं.

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हालांकि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष और एमएलसी बनाकर उपेंद्र कुशवाहा की अहमियत बता दी है. ऐसी स्थिति में इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है कि आने वाले दिनों में कुशवाहा को आरसीपी की जगह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंप दी जाये.

दसअसल, पार्टी एक व्यक्ति, एक पद के सिद्धांत पर चलती है. ऐसे में आरसीपी को केंद्र में मंत्री बनाये जाने के बाद उनके पास दो पद हो गये हैं.

इस स्थिति में राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर उलटफेर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. हालांकि, खुद कुशवाहा सहित पार्टी के अन्य दूसरे नेता इस बात को खारिज करते रहे हैं.

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