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बिहार चुनाव :  भाजपा के समक्ष सत्ता हासिल करने की चुनौती

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Patna : चुनाव आयोग ने बिहार में विधानसभा चुनावों की घोषणा कर दी है. तीन चरणों में होनेवाले चुनावों के तहत पहले चरण के तहत 20 अक्तूबर को मतदान होगा. चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों की सक्रियता भी बढ़ गयी है. कोरोना काल में इस बार चुनाव के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की गयी है.

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चुनाव पर पूरे देश की होगी नजर

बहरहाल इस चुनाव पर पूरे देश की नजर होगी. इसके परिणामों से भी कई अहम सवालों का जवाब मिलेगा. यह चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब अयोध्या में राममंदिर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है. केंद्र सरकार कृषि विधेयकों पर विरोध झेल रही है. इसके साथ ही कोरोना महामारी से निपटने के प्रयासों पर भी राजनीति गर्म है. ऐसे हालात में चुनाव के नतीजे बतायेंगे कि जनता इनमें से किन मुद्दों के साथ है.

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चुनाव  में ये हो सकते हैं मुद्दे

कुछ महीने पहले लॉकडाउन के दौरान देशभर से हजारों प्रवासी मजदूरों ने बेहद खराब हालात में हजारों किलोमीटर का सफर पैदल तय कर अपने अपने घरों तक पहुंचे थे. इमें बड़ी संख्या में बिहार, यूपी सहित अन्य राज्यों के प्रवासी मजदूर भी शामिल थे. मजदूर वर्ग और महामारी के निपटने के केंद्र के तरीकों पर मोदी सरकार के साथ बिहार सरकार भी निशाने पर रही है. विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर सरकार को घेर सकती है. चुनाव में यह बड़ा मुद्दा भी बन सकता है.

इसके अलावा कृषि विधेयक पर पंजाब और हरियाणा से शुरू हुआ आंदोलन अब धीरे-धीरे पूरे देश में फैल रहा है. विपक्ष इस पर भी हमलावर है. माना जा रहा है कि बिहार चुनाव में भी यह मुद्दा बन सकता है. ऐसे में भाजपा, जदयू के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती है.

भाजपा के समक्ष होगी कड़ी चुनौती

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बार भाजपा की परेशानी बढ़नेवाली है. लोकसभा चुनाव के बाद जिन राज्यों में चुनाव हुए हैं, वहां भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है. पिछले चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत गिरा है. भाजपा को झारखंड और महाराष्ट्र में अपनी सीट गवानी पड़ी है. पिछले चुनावों में चार राज्यों में भाजपा के हाथों निराशा लगी है. अब बिहार चुनाव सामने हैं. ऐसे में वह कैसे इस चुनावी वैतरणी को पार करेगी यह देखना होगा.

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