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बिहारः शराबबंदी कानून में होगा बदलाव, कैबिनेट मीटिंग में संशोधन विधेयक पर लगी मुहर

संशोधन प्रारुप 20 जुलाई से शुरु होनेवाले मॉनसून सत्र में होगा पेश

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Patna: बिहार में दो साल पहले पूर्ण शराबबंदी लागू की गई. लेकिन इस कानून को लेकर लगातार सवाल उठते रहें. जिसके बाद नीतीश कुमार ने शराबबंदी कानून में बदलाव की बात कही थी. बुधवार को बिहार सरकार ने बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 में संशोधन विधेयक 2018 सहित तीन अन्य संशोधन विधेयकों को विधानमंडल सत्र में पेश किए जाने को मंजूरी दे दी. संशोधन विधेयक में शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए मौजूदा सजा के प्रावधान में बदलाव कर उसे कम किया गया है.

जानिएः आखिर क्यों पड़ी कानून में बदलाव की जरुरत ? 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए प्रधान सचिव अरूण कुमार सिंह ने बताया कि कैबिनेट ने कुल 33 विषयों पर विचार कर उन्हें मंजूरी प्रदान कर दी है.

शराबबंदी कानून में संशोधन

सूत्रों की मानें तो शराबबंदी कानून में आठ बदलाव किये गये हैं. बिहार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने मीडिया के एक वर्ग से बातचीत करते हुए बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 में संशोधन विधेयक 2018 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पहले शराब के उत्पादनकर्ता, परिवहनकर्ता, विक्रेता के लिए दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान था, जिसे अब दो स्लैब में किया गया है.

सजा के प्रावधान में कमी

उन्होंने बताया कि पहली बार यह जुर्म करने वाले को उन्हें कम से कम पांच के कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है जबकि उसके बाद भी वही जुर्म करते हैं तो उनके लिए दस साल के कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है. किशोर ने बताया कि शराब पीने वाले के लिए पहले पांच साल के कारावास की सजा थी पर अब पहली बार यह जुर्म करने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना और जुर्माना नहीं भरने पर तीन महीने के कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है. उन्होंने बताया कि पहली बार शराब पीते पकड़े जाने पर उसे जमानती और असंज्ञेय बना दिया गया है.

परिवार के सदस्यों को सजा नहीं

वही घर से शराब बरामद होने पर परिवार के सभी सदस्यों को अब सजा नहीं होगी. इस प्रावधान को हल्का कर दिया गया है. सजा पाया कोई व्यक्ति यदि दोबारा कानून का उल्लंघन करता है तो उसे दोगुनी सजा दी जाएगी, इस कानून को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है.

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जानिएः आखिर क्यों नीतीश कुमार ने मानी कानून के दुरुपयोग की बात

परिसर-गाड़ी जब्त करने का रहेगा प्रावधान

शराब को रखने और ट्रांसपोरटेशन के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले परिसर अथवा वाहन जब्त किए जाएंगे. लेकिन अगर किसी परिसर में कोई व्यक्ति शराब का सेवन करता पाया जाता है तो उस परिसर को जब्त नहीं किया जाएगा. जबकि पुराने कानून में किसी गांव अथवा समूह में किसी व्यक्ति द्वारा शराब के सेवन पर समूह और गांव पर सामूहिक जुर्माने के प्रावधान थे. नए कानून में इस प्रावधान को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है.

वही पूछे जाने पर कि शराबबंदी कानून 2016 के तहत वर्तमान में पकड़े गए आरोपियों को भी क्या इसका लाभ मिलेगा, इस पर किशोर ने कहा कि सभी ऐसे लंबित मामलों में आरोपियों को इसका लाभ मिलेगा.

दो सालों में एक लाख से ज्यादा गिरफ्तार

5 अप्रैल 2016 को बिहार में शराबबंदी कानून लागू किया गया. सूबे में शराबबंदी के दो सालों से ज्यादा का वक्त बीत चुका है. और इस दौरान 1,41,861 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जिनमें से 8 हजार जेल में हैं. पुलिस और उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने 7 लाख 62 हजार 416 ठिकानों पर छापेमारी की है, जबकि एक लाख 17 हजार 283 केस दर्ज हुए है. वही 20.47 लीटर लाख देश में बने विदेशी शराब और 9.25 लाख देसी शराब जब्त किये गये हैं.

उल्लेखनीय है कि बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाला है. और इस दौरान शराबबंदी कानून में संशोधन के प्रारुप को रखा जायेगा. बता दें कि एक कार्यक्रम के दौरान सीएम नीतीश कुमार ने कहा था कि हमलोगों ने राज्य में पूरी ईमानदारी से शराबबंदी कानून को लागू किया है. इसमें कुछ कड़े प्रावधान हैं, जिसमें बदलाव की जरुरत है. ज्ञात हो कि बिहार में पांच अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है और इसे कड़ाई से लागू किए जाने के लिए नीतीश कुमार सरकार ने बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 को सर्वसम्मिति से विधानमंडल से पारित करवाया था. लेकिन बाद में इसके कुछ प्रावधानों को कड़ा बताए जाने तथा इस कानून का दुरूपयोग किए जाने का आरोप लगाते हुए विपक्ष द्वारा इसकी आलोचना की जाती रही है.

इसके अलावे कैबिनेट ने बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम 2005, बिहार होटल विलासवस्तु काराधान अधिनियम एवं बिहार मनोरंजन कर अधिनियम को संशोधित करने से संबंधित विधेयक तथा बिहार राज्य दहेज प्रतिषेध बिहार संशोधन अधिनियम 1975 के निरसन के लिए बिहार राज्य दहेज प्रतिषेध बिहार संशोधन अधिनियम 2018 को विधानमंडल सत्र में पेश किए जाने को मंजूरी प्रदान कर दी.

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