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बिहारः 105 बच्चों की मौत के बाद जागे सुशासन बाबू, मुजफ्फरपुर जायेंगे नीतीश कुमार

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Patna: बिहार में चमकी बुखार (एईएस) बच्चों के लिए काल बनी हुई है. अब तक 105 बच्चों ने दम तोड़ा दिया हैं. इतने मासूमों की मौत के बाद सूबे के मुखिया नीतीश कुमार की नींद टूटी है. मंगलवार को सीएम मुजफ्फरपुर जाकर हालत का जायजा लेंगे.

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इधर अस्पताल में भर्ती बीमार बच्चों की संख्या बढ़कर 414 हो गई है. चमकी बुखार से पीड़ित ज्यादातर मरीज मुजफ्फरपुर के सरकारी श्रीकृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल और केजरीवाल अस्पताल में एडमिट हैं.

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अधिकारियों को सीएम का सख्त निर्देश

इस बीच सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हालात की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए. बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री सहित अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ इस बात की समीक्षा की कि मुजफ्फरपुर में एईएस के मामले कम हो रहे हैं कि नहीं.

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने एईएस से बीमार बच्चों को ले जाने वाले एंबुलेंस के भाडे़ के भुगतान, निजी अस्पतालों में भर्ती बच्चों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने तथा बच्चे की मौत होने पर मुख्यमंत्री सहायता कोष से अभिभावक को चार लाख रुपए दिए जाने का निर्णय किया, जिसे लागू किया जाना प्रारंभ हो चुका है.

दीपक कुमार ने बताया कि पिछले साल से अधिक बच्चों के इस बीमारी से ग्रसित होने और उनकी मौत के कारणों के बारे पता लगाया जा रहा है, पर मानसून के पूर्व बारिश नहीं होना इसका एक कारण हो सकता है.

उन्होंने बताया कि पिछले साल इस रोग से ग्रसित अस्पतालों में भर्ती बच्चों में से मृत बच्चों की तुलना में इस वर्ष 26 प्रतिशत कम बच्चों की मौत हुई है, लेकिन पूरे तंत्र के मुस्तैद होने के बाद भी 100 से अधिक बच्चों की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है.

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मौत के कारणों का पता लगाने की कोशिश

मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने यह भी निर्णय लिया कि जिन बच्चों की इस रोग से मौत हुई है, उनके सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि की जानकारी हासिल करने के लिए उनके घरों में मंगलवार से सरकारी महकमे की एक टीम जाएगी, जो यह पता लगाएगी कि बच्चे की मौत कहीं कुपोषण या किसी अन्य कारण से तो नहीं हुई.

मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ. शैलेश प्रसाद ने बताया कि सोमवार की देर शाम मस्तिष्क ज्वर सहित अन्य अज्ञात बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 105 हो गयी. जबकि जनवरी से अब तक कुल 440 बच्चे इस बीमारी की चपेट में आए हैं.

इधर मामले को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे के खिलाफ बीमारी से पहले एक्शन नहीं लेने के आरोप में केस दर्ज हुआ है. बच्चों की मौत पर मानवाधिकार आयोग ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस भेजा है.

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