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नोटबंदी के बाद दो दशकों में स्टॉप फाइलर्स की संख्या में सबसे बड़ा उछाल : टैक्स अधिकारी

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New Wing : सरकार अपने नोटबंदी के फैसले को कामयाब बता रही है. सरकार का कहना है कि नोटबंदी के बाद साल 2016-2017 में टैक्स देने वालों की संख्या बढ़ी है. इसमें 1.06 नए टैक्सदाताओं की संख्या बढ़ने की बात कही गयी है. जो कि पिछले साल के मुकाबले 25% ज्यादा है. गौरतलब है कि द इंडियन एक्सप्रेस ने जब इस मामले में आकलन किया गया तो यह पाया गया कि स्टॉप फाइलर्स की संख्या में बढ़ोतरी हुई है.

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कौन है स्टॉप फायलर्स

स्टॉप फाइलर्स के तहत वैसे लोग आते हैं जिन्होंने बीते वर्षों में रिटर्न फायल किया है लेकिन वर्तमान में उन्होंने आईटी फायल नहीं किया. हालांकि इसमें वैसे लोग नहीं आते जिनका पैन कार्ड कैंसल या सरेंडर हो चुका है या फिर जिनकी मृतयु हो गयी है. फिर भी स्टॉप फाइलर्स की संख्या में वृद्धी हुई.

दो दसकों में यह उछाल सबसे ज्यादा

आकलन में यह पाया गया कि साल 2015-2016 के मुकाबले 2016-2017 में स्टॉप फाइलर्स की संख्या दस गुणा ज्यादा बढ़ गयी. यह संख्या बढ़कर 88.04 हो गयी जबकि बीते साल यह संख्या 8.56 ही था. वहीं टैक्स अधिकारियों का इस बारे में कहना है कि 2000-2001 के बाद लगभग दो दसकों में यह उछाल सबसे ज्यादा है.

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इससे पहले स्टॉप फाइलर्स की संख्या घट रही थी. लेकिन नोटबंदी के बाद इसमें इजाफा हो गया. उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2013 में यह 37.54 लाख, वित्त वर्ष 2014 में यह 27.02 लाख, वित्त वर्ष 2015 में यह 16.32 लाख जबकि वित्त वर्ष 2016 में यह आंकड़ा 8.56 लाख का रहा था.

क्या कहना है टैक्स अधिकारियों का

टैक्स अधिकारियों ने यह भी अनुमान लगाया है कि यह उछाल नोटबंदी के बाद आर्थिक गतिविधियों में बदलाव की वजह से भी हो सकती है. क्योंकि नोटबंदी के बाद जो आर्थिक बदलाव आए उसकी वजह से नौकरियां छिनने या फिर आय में कमी हो सकता है. वहीं स्टॉप फाइलर्स की संख्या में बढ़ोतरी इस बात को प्रमाणित करती है कि लोगों को आईटी रिटर्न के लिए बाध्य नहीं किया जा सका.

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