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BJP को बड़ा झटका, कृषि बिल के विरोध में NDA से अलग हुआ सबसे पुराना सहयोगी अकाली दल

22 सालों पुराना गठबंधन टूटा

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New Delhi: कृषि बिल को लेकर जहां देश भर में किसानों का प्रदर्शन जारी है. वहीं इस बिल के कारण एडीए को बड़ा झटका लगा है. एनडीए के सबसे पुराने सहयोगी अकाली दल ने दो दशक से भी ज्यादा पुराना रिश्ता तोड़ दिया है.

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कृषि विधेयकों के विरोध में शनिवार रात को भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग होने की घोषणा की. पार्टी की कोर समिति की बैठक के बाद उन्होंने यह घोषणा की.

इससे पहले राजग के दो अन्य प्रमुख सहयोगी दल शिवसेना और तेलगु देशम पार्टी भी अन्य मुद्दों पर गठबंधन से अलग हो चुके हैं.
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टूट गया 22 साल पुराना रिश्ता

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रमुख सुखबीर ने कहा, ‘शिरोमणि अकाली दल की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई कोर समिति की हुई आपात बैठक में भाजपा नीत राजग से अलग होने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया.’ उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों की भावनाओं का आदर करने के बारे में भाजपा के सबसे पुराने सहयोगी दल  की बात नहीं सुनी.

इससे पहले, 17 सितंबर को सुखबीर सिंह बादल की पत्नी और शिअद की वरिष्ठ नेता हरसिमरत कौर ने कृषि विधेयकों के विरोध में कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.

शिअद की ओर से जारी बयान में सुखबीर बादल ने कहा कि राजग से अलग होने का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि केंद्र ने किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी सुनिश्चित करने से इनकार कर दिया है. वह पंजाबी, खासकर सिखों से जुड़े मुद्दों पर लगातार असंवेदनशीलता दिखा रही है, जिसका एक उदाहरण है जम्मू-कश्मीर में आधिकारिक भाषा श्रेणी से पंजाबी भाषा को बाहर करना.’

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‘यह वाजेपयी जी की कल्पना वाला एनडीए नहीं’

हरसिमरत कौर ने राजग से अलग होने के बारे में कहा कि केंद्र की भाजपा नीत सरकार ने पंजाब की ओर से आंखें मूंद ली हैं. उन्होंने कहा कि यह वह गठबंधन नहीं है जिसकी कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कल्पना की थी.

उन्होंने कहा, ‘जो अपने सबसे पुराने सहयोगी दल की बातों को अनसुना करे और राष्ट्र के अन्नदाताओं की याचनाओं को नजरंदाज करे, वह गठबंधन पंजाब के हित में नहीं है.’

हरसिमरत ने ट्वीट किया, ‘तीन करोड़ पंजाबियों की पीड़ा और विरोध के बाद भी अगर केंद्र के सख्त रवैये में नरमी नहीं आती है तो यह वह राजग नहीं रह गई है जिसकी वाजपेयी जी और बादल साहब ने कल्पना की थी.’

 

यह किसानों की जीत है- सुरजेवाला

इधर शिरोमणि अकाली दल के केंद्र में सत्तारूढ़ राजग से अलग होने पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि यह किसानों की जीत है क्योंकि अकाली दल को अन्नदाताओं की चौखट पर झुकना पड़ा और सत्तारूढ़ गठबंधन से संबंध तोड़ना पड़ा.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘काले कानून के समर्थक अकाली दल को राजग छोड़ना पड़ा और मोदी सरकार से संबंध तोड़ने पड़े.’ उन्होंने कहा, अकाली दल को किसानों-श्रमिकों की चौखट पर झुकना पड़ा.

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