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बड़ी त्रासदी : बीमा कंपनियों की कारस्तानी, भुगत रहे हैं झारखंड के 23 लाख किसान

Ranchi: दो साल बीत चुके. राज्य के लगभग 23 लाख से अधिक किसान फसल बीमा योजना की राशि के इंतजार में दिन गिन रहे हैं. 2018-19 और 2019-20 में रबी और खरीफ फसलों को मिलाकर पांच इंश्योरेंस कंपनियों को फसल बीमा का जिम्मा मिला था. इनमें एआईसी इंडिया, बजाज एलियांज, भारती एक्सा, एचडीएफसी इरगो और रॉयल सुंदरम जैसी कंपनियां शामिल हैं. इनके भरोसे 22 लाख 71 हजार 816 किसानों ने अपने फसलों (रबी, खरीफ) का बीमा कराया था.

इन कंपनियों ने 12 करोड़ 29 लाख 53 हजार 768 हेक्टेयर (2018-19 और 2019-20 मिलाकर) में खड़ी फसलों के लिये बीमा सुविधा दिये जाने की बात कही थी. पर इन कंपनियों ने चालू वित्तीय वर्ष तक भी किसानों को बीमा राशि मुहैया नहीं करायी है. वे बेबस होकर इंतजार में बैठे हैं.

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एक रुपये का भी नहीं हुआ भुगतान

2018-19 में रबी फसलों के लिये 45 लाख (12 लाख और 33 लाख) का बीमा भुगतान किया जाना था. पर एक भी किसान को एक रुपया नहीं मिला. 2019-20 में 43077 किसानों ने रबी फसलों के लिये बीमा कराया था. इसके लिये एचडीएफसी इरगो और रॉयल सुंदरम कंपनी को जिम्मा मिला था.

एचडीएफसी इरगो को 1.26 करोड़ का क्लेम किया गया था जिसमें से उसने एक छटांक भी किसानों को नहीं दिया. रॉयल सुंदरम ने भी निर्धारित लक्ष्य के विरूद्ध एक भी किसान को एक रुपया का लाभ नहीं दिया.

2018 में खरीफ फसलों के लिये बजाज एलियांज और एआइसी इंडिया और भारती एक्सा को बीमा के लिये चुना गया था. इसमें एआइसी इंडिया को 280 करोड़ का टारगेट था जिसमें से उसने एक भी किसान को लाभ नहीं दिया.

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बजाज एलियांज को 52 करोड़ का लक्ष्य मिला था. इसके विरुद्ध उसने 21.11 करोड़ रुपये का क्लेम दिया. भारती एक्सा को 93 करोड़ का टारगेट था जिसमें से उसने एक भी किसान को एक रुपये का भी लाभ नहीं दिया.

इसी तरह 2019-20 में एचडीएफसी इरगो और रॉयल सुंदरम को 10 लाख 51 हजार 430 किसानों को बीमा का लाभ देना था. एचडीएफसी को 24.03 करोड़ का टारगेट था. पर उसकी ओर से एक भी किसान को लाभ नहीं दिया जा सका. रॉयल सुंदरम भी एक भी रुपया बीमा लाभ के तौर पर किसानों को नहीं दे सका.

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महाराष्ट्र में हंगामा

एक रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में रिलायंस जेनरल इंश्योरेंस ने किसानों को फसल बीमा की राशि का लाभ दिये जाने से इंकार कर दिया था. इसके कारण महाराष्ट्र सरकार को केंद्र से गुहार लगानी पड़ी थी. कहा कि राज्य के 10 जिलों में इस कंपनी को फसल बीमा योजना का लाभ देने का जिम्मा है. पर कंपनी ऐसा नहीं कर रही. इसके कारण राज्य में लॉ एंड ऑर्डर का इश्यू खड़ा हो रहा है. किसानों में गहरी नाराजगी है.

अब इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद झारखंड में भी आशंका खड़ी हो रही है. चिंता यह है कि कहीं यहां भी महाराष्ट्र की तर्ज पर विधि व्यवस्था की समस्या खड़ी ना हो जाये.

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क्या है झारखंड में स्थिति

कृषि मंत्री बादल पत्रलेख के मुताबिक अब झारखंड में फसल बीमा के बदले किसानों के लिए वैकल्पिक किसान राहत योजना से राहत दी जानी है. इसके लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. पिछले दिनों उन्होंने कई कार्यक्रमों में कहा भी कि किसान राहत योजना शीघ्र प्रारंभ की जाएगी. इस योजना के शुरू होने से किसानों को बीमा कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना होगा.

कृषि मंत्री के अनुसार किसानों के कल्याण के लिए हेमंत सरकार कई नई योजनाएं तैयार कर रही हैं, जिन्हें शीघ्र धरातल पर उतारने की पहल होगी. इसके तहत एक लाख बिरसा किसान तैयार किए जाएंगे.

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किसानों को संबलता देने के लिए अलग-अलग योजनाओं पर 355 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है. अब बीपीएल व एपीएल श्रेणी महिलाओं को 50 फीसद अनुदान पर गाय दिया जाएगा.

किसानों को सम्मान देने के लिए चैंबर ऑफ किसान का गठन किया जाएगा. हेमंत सरकार ने ऋण माफ कर नौ लाख सात हजार किसानों के चेहरे पर खुशहाली लाई है. मात्र एक रुपये में 50 हजार रुपये की ऋण माफी कर सरकार ने किसानों को उम्मीदों को पूरा किया है.

इस मामले पर वर्तमान स्थिति की जानकारी के लिये कृषि निदेशक निशा उरांव से संपर्क करने का प्रयास किया पर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. संपर्क होने पर या मैसेज आने पर उनका भी पक्ष रखा जायेगा.

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