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शराब कारोबार में इस बार उतरेंगे छत्तीसगढ़ और बिहार के भी बिग शॉट, एक आवेदन का खर्च करीब 5 लाख

Akshay Kumar Jha

Ranchi: सरकार की खुद शराब बेचने की योजना फ्लॉप होने के बाद अब फिर से पुराने तरीके से शराब की बिक्री होगी. प्रशासन की मदद से दुकानों की बंदोबस्ती होगी और प्राइवेट प्लेयर्स शराब का कारोबार राज्य भर में करेंगे. राज्य भर में करीब 550 शराब की दुकानों की संख्या बढ़ कर करीब 1700 होनेवाली है. उत्पाद विभाग ने जिस तरह की योजना बनायी गयी है, उससे फिलवक्त कहा जा सकता है कि सरकारी खजाने को काफी मुनाफा होनेवाला है. लेकिन दूसरी तरफ शराब की कीमतों पर आंशिक वृद्धि भी देखी जाएगी. ऐसा भी कहना गलत होगा कि शराब की कीमत आसमान छूने लगेगी.

झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के दिग्गज आजमाएंगे दांव

बिहार में शराबबंदी के बाद वहां के शराब कारोबारी दूसरे बिजनेस में हाथ आजमाने लगे. बिहार के बाद उन्होंने झारखंड में भी अपने पैर जमाने चाहे पर उन्हें इसमें सफलता नहीं मिल पाय़ी. इसकी वजह यह रही कि झारखंड में शराब का कारोबार सरकार ने अपने हाथ में ले लिया था. यही हाल छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारियों का हुआ. छत्तीसगढ़ में शराब कारोबार पूरी तरह से सरकार के हाथ में है. ऐसे में शराब कारोबार के बिहार और छत्तीसगढ़ के बिग शॉट एक ऐसा मौका तलाश रहे थे, जिससे वो दोबारा से इस कारोबार में आ सकें. झारखंड ने यह मौका बिहार और छत्तीसगढ़ के कारोबारियों को उपलब्ध कराया है.

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होंगी 1700 दुकानें, 60 लाख से लेकर 2.5 करोड़ तक सालाना फीस

इस बार शराब दुकानों की सालाना फीस बिक्री के हिसाब से तय की गयी है. शहरी क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र की फीस में काफी अंतर रखा गया है. बड़े शहर के पॉश इलाके में अगर दुकान है, तो उसकी सालाना फीस 2.5 करोड़ तक की होगी. वहीं ग्रामीण इलाकों में कम-से-कम 60 लाख रुपए सालाना फीस तय की गयी है. बताया जा रहा है कि राज्य भर में शराब की करीब 1700 दुकानें होंगी. फिलहाल राज्य भर में करीब 550 सरकारी शराब की दुकानें हैं. एक अगस्त 2017 से जब सरकार ने शराब कारोबार को हाथ में लिया था, एक तरह से राज्य भर में कुछ महीनों तक शराब की क्राइसिस हो गयी थी. लेकिन प्राइवेट प्लेयर्स पहले दिन से ही शराब परोसना शुरू कर देंगे.

अकाउंट में हों पांच लाख तो भर सकेंगे एक आवेदन

इस बार शराब दुकानों की बंदोबस्ती के लिए जिस तरह की शर्त तैयार की गयी है, उससे वो ही व्यक्ति एक आवेदन भर सकता है, जिसके अकाउंट में कम-से-कम पांच लाख रुपए होंगे. आवेदन शुल्क भी क्षेत्र के हिसाब से तय किया गया है. एक आवेदन के लिए आवेदन शुल्क 20 हजार से लेकर पांच हजार तक हो सकता है. ये शुल्क ननरिफनडेबल है. आवेदन के साथ धरोहर धनराशि (Earnest Money Deposit)  भी जमा करनी है. यह राशि सालाना फीस की दो फीसदी होगी. यानी अगर किसी दुकान का सालाना फीस 2.5 करोड़ है तो आवेदन के साथ आवेदन शुल्क 20 हजार और सालाना फीस की दो फीसदी यानी पांच लाख रुपये (शहरी क्षेत्र के लिए) देने होंगे. सारा पैसा ऑनलाइन जमा होना है. यानी एक आवेदन भरने के लिए आपके अकाउंट में पांच लाख से ज्यादा राशि जरूरी है. धरोहर धनराशि दुकान ना मिलने की सूरत में वापस हो जाएगा और दुकान मिलने की सूरत में वो सिक्यूरिटी मनी के तौर पर जमा हो जाएगा.

सालाना टारगेट होगा 1500 करोड़ का, सबसे महंगी दुकान बोकारो की

वित्त वर्ष 2016-2017 के लिए उत्पाद विभाग को 1200 करोड़ का टारगेट दिया गया था. विभाग की तरफ से सरकारी खजाने में करीब 960 करोड़ ही आ पाए थे. पुष्ट सत्रों ने बताया है कि इस बार वित्त विभाग करीब 1500 करोड़ का टारगेट उत्पाद विभाग को देगा. दुकानों की संख्या ज्यादा होने और बिहार में शराबबंदी की वजह से माना जा रहा है कि शराब के राजस्व में बढ़ोतरी होगी. दूसरी तरफ बोकारो शहर की दुकान की फीस करीब चार करोड़ होने जा रही है. दरअसल बोकारो शहर में बीएसएल ने शराब बेचने के लिए प्रशासन को कुछ जगहों पर दुकानें दी हैं. शहर में चाह कर भी रेंट पर दुकान लेकर नहीं खोला जा सकता है. ऐसे में तय दुकान में ही शराब कारोबार का संचालन होगा. इसी वजह से बोकारो शहर के दुकानों की सालाना फीस बाकी सभी शहर की दुकानों से ज्यादा होगी. विभाग का कहना है कि आम चुनाव को देखते हुए फरवरी के आखिरी सप्ताह तक दुकानों की बंदोबस्ती कर ली जाएगी.

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