
New Delhi : जम्मू-कश्मीर आतंकवादी घटनाओं के लिए हमेशा से चर्चा में रहा है. खासकर पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी जम्मू-कश्मीर में बहुत ज्यादा सक्रिय रहते हैं. लश्करे तौयबा और जैश ए मोहम्मद से जुड़े आतंकियों के आये दिन सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ की खबरें आती रहती हैं. इसमें पिछले तीन दशकों में हजारों आतंकी मारे जा चुके हैं. इसके साथ ही सैकड़ों की संख्या में सुरक्षा बलों औऱ पुलिस के जवान और अधिकारी भी शहीद हुए हैं.
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मठभेड़ों में आतंकियों के मारे जाने की संख्या बढ़ी
मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर का बंटवारा कर उसे केंद्रशासित प्रदेश बना दिया था. इसके बाद ये संभावना जताई जा रही थी कि प्रदेश में आतंकवादियों पर अंकुश लगेगा. इधर कुछ महीनों से मठभेड़ में आतंकियों के मारे जाने की संख्या भी बढ़ है.
वहीं ये आशंका भी जताई जाती रही है कि जम्मू कश्मीर प्रशासन और पुलिस में भी आतंकियों का संबंध रहा है तथा उन्हें कई गुप्त और महत्वपूर्ण जानकारियां मिल जाती हैं.
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यह संभवत पहली बार है कि जब सरकार ने इस दिशा में जांच कराई है और प्रशासन ने शनिवार को राज्य के 11 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है. इन सभी कर्मचिरयों पर आतंकियों से संबंधों का आरोप लगाया गया है.
प्रशासन ने यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (C) के तहत की है.
11 officials of Jammu and Kashmir administration terminated on the grounds of having terror links: Sources
— ANI (@ANI) July 10, 2021
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