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हेमंत सरकार का बड़ा फैसला: विकास आयुक्त की अध्यक्षता में बनी समिति आंदोलनरत सहायक पुलिसकर्मियों पर लेगी फैसला

मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा- ”पानी सर से ऊपर जाएगा, तो कठोर निर्णय लेने सभी परहेज नहीं करेगी सरकार”

Ranchi  :   पिछले कई दिनों से राजधानी के मोरहाबादी मैदान में आंदोलनरत सहायक पुलिसकर्मियों के प्रति सरकार रुख नरम होता दिखायी पड़ रहा है. इन कर्मियों के मांगो पर अब विकास आयुक्त की अध्यक्षता में बनी समिति फैसला लेगी. मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने इस बात की जानकारी अपने आवास पर मीडियाकर्मियों को दी है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद आंदोलन पुलिस कर्मियों को इस समिति में शामिल किया गया है, जो कि आंदोनलकर्मियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. क्योंकि इनकी सेवा केवल 3 साल तक ही थी, जो कि अब खत्म होने वाली थी.

अब समिति के रिपोर्ट के आधार इनको जो भी सुविधा होगी, सरकार उन्हें उपलब्ध कराएगी. इससे पहले आंदोलनरत पुलिस कर्मियों का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को वार्ता के लिए मंत्री के आवास पहुंचा था. वार्ता के बाद आंदोलनकर्मियों के आगे की क्या रणनीति रहेगी, इसकी जानकारी ने उन्होंने नहीं दी. लेकिन मंत्री ने यह जरूर कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश के बाद अब आंदोलनरकर्मियों की मांग पर विचार विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति करेगी.

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सेवा शर्तों में सुधार तथा नियमितीकरण के संबंध सरकार ने बनायी थी समिति

 

बता दें कि कई विभागों में अनुंबध और संविदा पर कार्य कर रहे हजारों कर्मियों की सेवा सहित कई मामलों पर विचार करने के लिए बीते अगस्त माह को सरकार ने एक समिति गठित की थी. समिति के अध्यक्ष उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष विकास आयुक्त होंगे. जबकि कार्मिक प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के प्रधान सचिव इसके सदस्य सचिव बनाए गए थे. वहीं योजना सह वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव और प्रधान सचिव -सह -विधि परामर्शी इसके सदस्य बने है. यह समिति अनुबंध-संविदा कर्मियों की सेवा शर्तों में सुधार तथा नियमितीकरण के संबंध में उठाई जा रही मांग की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी.

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कानून का उल्लंघन करने के साथ कोरोना प्रोटोकॉल को तोड़ रहे आंदोलनकर्मी

 

मिथलेश ठाकुर ने कहा कि सहायक पुलिसकर्मियों का चल रहा आंदोलन अवैध और गैर-कानूनी है. कोरोना काल में हजारों लोगों का एक जगह एकत्रित होकर जमा होना सरकार के लिए एक खतरे की घंटी से कम नहीं है. वार्ता के दौरान उन्होंने सभी सहायक कर्मियों को बताया है कि वे कानून का उल्लंघन कर रहे हैं. कोरोना प्रोटोकॉल को तोड़ रहे है. वर्दी में रहकर आंदोलन करना भी गलत है. वार्ता में इन्होंने सारी चीजों को समझा है. मंत्री श्री ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने आश्वासन दिया है कि हेमंत सरकार इनकी भावनाओं को समझती है. इनके साथ किसी तरह का कोई गलत नहीं होगा.

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2017 में 3 सालों के लिए हुई थी बहाली

 

बता दें कि राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिलों में कुल 2500 सहायक पुलिसकर्मियों की नियुक्ति वर्ष 2017 में की गयी थी. इनके लिए हर महीने 10 हजार रुपये का मानदेय तय किया गया था. सहायक पुलिसकर्मी के पद पर बहाल हुए अभ्यर्थियों को तीन साल के बाद स्थायी करने की बात कही गयी थी. हालांकि 3 वर्ष पूरा होने के बाद भी किसी का स्थायीकरण नहीं किया गया है. इसी वजह से राज्य भर के 2500 सहायक पुलिसकर्मी आंदोलन पर हैं. उनकी प्रमुख मांग स्थायीकरण को लेकर है. इसके अलावे भी वे अन्य तरह की सुविधाओं की मांग कर रहे हैं.

 

आंदोलन नेतृत्वविहीन, कानून हाथ में लेने पर सरकार लेगी कड़ा कदम

 

वार्ता में आंदोलनकर्मियों के रूख के सवाल पर मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि इनका आंदोनल पूरी तरह से नेतृत्वविहीन है. ये किसी भी तरह के निर्णय लेने में क्षमता है. यह बातों को समझ भी नहीं पाते है. हेमंत सरकार के प्रयास से अगर इन्हें कुछ मौका मिल रहा है, तो उन्हें भी सरकार का साथ देना चाहिए. अगर इस अवसर को वे नकारते हैं, तो वे अपने पैरों में कुल्हाड़ी ही मारने का काम करेंगे. मंत्री श्री ठाकुर ने यह भी कहा कि आंदोलनकर्मी कानून को अपने हाथों में लेते है या पानी सर के ऊपर चला जाता है, तो सरकार बड़ा कदम उठाने से भी परेहज नहीं करेगी.

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