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Ranchi और झारखंड से खास नाता रहा है बिग बी अमिताभ बच्चन का

मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन  जन्मदिन पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi : मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन का जन्म भले ही उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ हो और उनका कार्यक्षेत्र और निवास मुंबई में है लेकिन अमिताभ का रांची और झारखंड से भी खास नाता रहा है. अमिताभ को बॉलीवुड में ब्रेक मशहूर लेखक केए अब्बास के निर्देशन में बनी फिल्म सात हिंदुस्तानी में मिला था. इसमें उन्होंने रांची निवासी शायर अनवर अली का किरदार निभाया था. अमिताभ सोशल मीडिया पर खुद काफी सक्रिय रहते हैं आज अपने जन्म दिन पर भी उन्होंने अपनी उम्र के इस पड़ाव को लेकर एक मजेदार पोस्ट डाला है. आइए आज उनकी जीवन यात्रा पर एक नजर डालते हैं.

ख्वाजा अहमद अब्बास ‘सात हिन्दुस्तानी’ के निर्माता, निर्देशक ही नहीं लेखक और पटकथा लेखक भी थे. यह फिल्म गोवा को पुर्तगाली शासन से आजाद कराने की कहानी पर बनी थी. अब्बास ने ‘सात हिन्दुस्तानी’ की अपनी जिस फौज की रचना की थी उसमें देश के अलग-अलग हिस्सों और विभिन्न धर्मों के लोगों को पात्र बनाया था.

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‘सात हिन्दुस्तानी’ रांची निवासी शायर अनवर अली का किरदार निभाया

दिलचस्प बात यह थी कि अब्बास ने किसी भी कलाकार को उसके राज्य या धर्म के अनुसार भूमिका न देकर उसके विपरीत भूमिका दी थी. अमिताभ बच्चन को झारखंड के रांची (तत्कालीन बिहार) के मुस्लिम उर्दू शायर अनवर अली अनवर की भूमिका मिली. जिसमें दिखाया गया था कि अनवर को हिंदी लिखनी नहीं आती. इसमें अमिताभ का एक यह संवाद भी था कि हमको हिंदी की अरन्तु-परन्तु समझ नहीं आती.

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इस फिल्म ने देश प्रेम को लेकर विभिन्नता में एकता का संदेश दिया. इसी कारण ‘सात हिन्दुस्तानी’ को उस वर्ष राष्ट्रीय एकता पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला. साथ ही इस फिल्म के ‘आंधी आए कि तूफान कोई गम नहीं’ और ‘एक मंजिल पर सबकी निगाहें रहें’ जैसे गीतों के लिए गीतकार कैफी आजमी को भी राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था.

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अमिताभ को ऐसे मिली थी पहली फिल्म

अमिताभ बच्चन को ‘सात हिन्दुस्तानी’ फिल्म मिलने की कहानी भी काफी दिलचस्प है. अमिताभ को नाटकों में भाग लेने का शौक बचपन से था. नैनीताल में स्कूली शिक्षा के दौरान शेरवुड कॉलेज में भी वह नाटक करते थे. दिल्ली की किरोड़ीमल कॉलेज से ग्रेजुएशन के दौरान भी नाटकों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे.

इसके बाद अमिताभ बच्चन कोलकाता में ‘बर्ड एंड कंपनी’ में सेल्स एग्ज़िक्यूटिव के पद पर काम करने लग गए थे. जहाँ उस समय 1400 रुपये महीने का आकर्षक वेतन था. उन्हीं दिनों उनके बड़े भाई अजिताभ ट्रेन से दिल्ली से मुंबई जा रहे थे. उन्हें ट्रेन में उनकी एक मित्र मिली जिसने बताया कि ख्वाजा अहमद अब्बास अपनी नयी फिल्म ‘सात हिन्दुस्तानी’ के लिए नए कलाकारों की तलाश कर रहे हैं. इस पर अजिताभ ने भाई अमिताभ के फोटो उस मित्र को देते हुए अब्बास से बात करने को कहा. जब वे फोटो अब्बास ने देखे तो उन्होंने कहा फोटो से क्या होगा, लड़के को बुलाओ. तब अमिताभ कोलकाता से तुरंत बंबई गये. अमिताभ जब बंबई में अब्बास साहब के पास पहुंचे तो उन्होंने सर नेम बच्चन देखकर पूछा कि तुम क्या बच्चन के बेटे हो, घर से भागकर आये हो? तब अमिताभ ने कहा भागकर नहीं आया उन्हें पता है. अपनी तसल्ली के लिए ख्वाजा अहमद अब्बास ने बच्चन जी को तार भेजकर पूछा कि तुम क्या इस बात से सहमत हो कि अमिताभ फिल्मों में काम करे. तब बच्चन जी ने अब्बास को जवाब दिया कि यदि तुमको लगता है कि अमिताभ में कुछ योग्यता है तो हमारी सहमति है लेकिन लगता है ऐसी कोई योग्यता नहीं है तो उसे समझाकर वापस कोलकाता भेज दो. अब्बास को जब लगा कि वह यह सब कर सकता है तो माँ जी और बाबूजी ने भी अमिताभ को फिल्मों में काम करने की सहमति दे दी.

टीनू आनंद गये कोलकाता, अमिताभ बच्चन को बंबई आने का मिला मौका

यहाँ यह भी दिलचस्प है कि अमिताभ बच्चन को ख्वाजा अहमद अब्बास ने फिल्म में अनवर अली की जिस भूमिका के लिए लिया, पहले वह भूमिका टीनू आनंद करने वाले थे. लेकिन टीनू को तभी सत्यजीत रे से उनके साथ सहायक निर्देशक बनने का मौका मिला तो उन्होंने अभिनय की जगह निर्देशन क्षेत्र को प्राथमिकता दी और वह कोलकाता चले गए. बताते हैं अमिताभ को ‘सात हिन्दुस्तानी’ में अभिनय के लिए कुल 5 हजार रुपये मिलने थे. चाहे फिल्म को बनने में कितना भी समय लगे.

आनंद से मिली पहचान

हृषिकेश मुखर्जी की फिल्म ‘आनंद’ से अमिताभ को अच्छी लोकप्रियता मिली. इस फिल्म में नायक तो राजेश खन्ना थे लेकिन अमिताभ ने अपनी बाबू मोशाय की भूमिका को इतना ख़ूबसूरत और अहम बना दिया कि इसके लिए उन्हें पहली बार सर्वोत्तम सहायक अभिनेता का फिल्म फ़ेयर पुरस्कार भी मिला. सही मायने में अमिताभ पहली बार ‘आनंद’ फिल्म से दर्शकों के घरों में चर्चा का विषय बने. लेकिन इस सबके बावजूद अमिताभ बच्चन के करियर ने रफ़्तार नहीं पकड़ी. असल में इस दौरान अमिताभ की ‘परवाना’ और ‘संजोग’ फिल्में बुरी तरह फ्लॉप हो गयीं. उसके बाद ‘बंसी बिरजू’, ‘एक नजर’, ‘रास्ते का पत्थर’ और ‘बंधे हाथ’ जैसी अमिताभ की और फिल्में भी कतार से औंधे मुंह गिरती चली गयीं. इतनी फिल्मों में जिस एक फिल्म को थोड़ी बहुत सफलता मिली वह थी- ‘बॉम्बे टू गोवा’.

गुड्डी फिल्म से हटाये गये अमिताभ

अमिताभ के लिए सबसे दुखद तो शायद यह रहा कि उन्हें ऋषिकेश मुखर्जी ने अपनी फिल्म ‘गुड्डी’ में नायिका जया भादुड़ी के अपोज़िट लेकर और चार दिन की शूटिंग के बाद निकाल, उनकी जगह अभिनेता समित भंजा को ले लिया. जबकि ऋषि दा के साथ ही अमिताभ ने ‘आनंद’ फिल्म की थी. इसका अफसोस जया भादुड़ी को भी हुआ.

पहले दौर अमिताभ ने अधिकतर फिल्मों में आम इन्सान के रोल किये थे. जैसे अभिमान, आनंद, मिली, नमकहराम,मजबूर,चुपके-चुपके आदि. इन फिल्मों में भी उन्होंने सीधे साधे और आम व्यक्तियों के किरदारों को अच्छी तरह निभाया है. ऋषिकेश मुखर्जी जैसे लाजवाब निर्देशक के साथ आनंद और अभिमान में अमिताभ ने यादगार भूमिकाएं निभाई हैं.

दीवार फिल्म से बनी एंग्री यंगमैन की इमेज

अमिताभ बच्चन ने वैसे तो हर तरह के किरदार निभाये हैं लेकिन अमिताभ को बॉलीवुड का सबसे बड़ा सुपर स्टार बनाने में एंग्री यंगमैन की इमेज ने सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है. इस तरह के किरदारों में अमिताभ बुराई के खिलाफ लड़ने, गरीबों व जरूरतमंदों की मदद करने तथा कई गुंडों बदमाशों की अकेले ही पिटाई करते हैं. अमिताभ की इस छवि के निर्माण में लेखक जोड़ी सलीम जावेद ने सबसे अहम योगदान दिया है. प्रकाश मेहरा की निर्देशत जंजीर पहली फिल्म थी जिसमें अमिताभ की एंग्री यंगमैन की इमेज क्रिएट की गयी. जंजीर हिट हुई और अमिताभ सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ने लगे. इसी छवि को और पुख्ता किया यश चोपड़ा की फिल्म दीवार ने इसके भी लेखक सलीम-जावेद ही थे. इसी जोड़ी ने शोले सहित आधा दर्जन से अधिक फिल्मों में अमिताभ के इसे तेवर को धार दी.

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काला पत्थर की शूटिंग हुई थी झारखंड में

अमितभ बच्चन, शशि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, नीतू सिंह और राखी स्टार फिल्म ‘काला पत्थर’  24 अगस्त 1979 को रिलीज हुई थी. ‘काला पत्थर’ को धनबाद की चासनाला कोयला खदानों में 1975 में हुई दुर्घटना पर आधारित बताया जाता है. इस दुर्घटना में 350 से अधिक मजदूरों की मौत हो गई थी. इस फिल्म की शूटिंग झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित गिद्दी की कोयला खदानों में हुई है. अमिताभ ने इस फिल्म से जुड़ी यादों को इंस्टाग्राम पर शेयर किया है और खुलासा किया है कि इस फिल्म से पहले वो कोयला खदानों में नौकरी कर रहे थे.

 


अमिताभ की पहली नौकरी का भी नाता झाररखंड से

बिग बी की पहली नौकरी वैसे तो कोलकाता की एक कंपनी में लगी थी लेकिन इस नौकरी के दौरान उनका झारखंड से गहरा नाता रहा. अमिताभ ने खुद सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी रोचक जानकारी साझा की है. अमिताभ बच्चन ने अपनी पहली नौकरी का जिक्र किया, जब वे कोयला खदान में काम करते थे.

काला पत्थर मूवी के पोस्टर इमेज का कोलाज शेयर कर अमिताभ बच्चन ने लिखा- काला पत्थर को 42 साल पूरे हो गये हैं. ओह !!! काफी समय हो गया.. और इस फिल्म से मेरे काफी सारे पर्सनल अनुभव जुडे हैं. जब मैं अपनी कलकता कंपनी में कोल डिपार्टमेंट में काम करता था, फिल्मों में आने से पहले मेरी पहली नौकरी. मैने धनबाद और आसनसोल में कोयला खदानों में वास्तव में काम किया.

अगर हम फिल्म काला पत्थर की बात करें तो ये 1979 में रिलीज हुई थी. मूवी में अमिताभ बच्चन ने पूर्व नेवी कैप्टन का रोल किया था. जो कि अपना काला अतीत भुलाने के लिए कोयला खदान में काम करता है. इस एक्शन ड्रामा को यश चोपड़ा ने डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया था. स्क्रीनप्ले सलीम-जावेद ने लिखा था.

बकवास फिल्मों का दौर

बीच के दौर में 1980-2000 तक अमिताभ ने काफी बकवास फिल्में की थीं. जैसे महान, नास्तिक, पुकार, कुली, गंगा, जमना सरस्वती, तूफान, जादूगर, आदि. इस दौर में उन्होंने फिल्म की कहानी पर ध्यान नहीं दिया. खासकर फेवरेट डायरेक्टर मनमोहन देसाई और अन्य के साथ इन्होंने एक से बढ़कर एक रद्दी फिल्में कीं.वे जब कांग्रेस की टिकट पर इलाहाबाद से चुनाव में खड़े हुए तो मैंने नाराज होकर शराबी के बाद उनकी फिल्में देखनी छोड़ दीं थीं .

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अग्निपथ के लिए मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

इस दौर में एक फिल्म अच्छी थी अग्निपथ. इसके लिए इन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था.इस फिल्म में अमिताभ विजय दीनानाथ चौहान नाम के डॉन की भूमिका में जमे थे. इसमें इन्होंने अपनी आवाज़ में तब्दीली की थी जो कुछ लोगों को पसंद नहीं भी आई थी. इस फिल्म का एक डॉयलॉग याद आता है ‘मेरा नाम है विजय दीनानाथ चौहान कल अपुन का मौत के साथ एपाटमेंट है’.

फिर एक अर्से के बाद फिर से उनकी फिल्में देखनी शुरू की. उस दिन दूरदर्शन पर शायद मिली फिल्म आ रही थी, पूरे मुहल्ले में लोडशेडिंग थी. इसलिए अमिताभ की ही फिल्म देखने का मन हो रहा था इसलिए मैं आजद हू देखने के लिए संध्या सिनेमा गया. फिल्म अच्छी लगी थी.

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तीसरी और सबसे शानदार पारी

तीसरी पारी में अमिताभ ने सबसे अच्छी फिल्में की हैं यह पारी वर्ष 2000 में मुहब्बतें से शुरू हुई मान सकते हैं. अब अमिताभ अपनी असली उम्र के हिसाब से रोल करने लगे हैं. इस दौर में उन्होंने फिल्मों के चुनाव पर ध्यान दिया. इसके अलावा अधिकतर फिल्मों में अमिताभ को ध्यान में रखकर उनके किरदार लिखे गए. ब्लैक अमिताभ की बेहतरीन फिल्म थी. इसके बाद विरुद्ध, निशब्द, कभी खुशी कभी गम आदि.

अभी हाल के वर्षों में पा, पिकू, तीन, वजीर और पिंक में वे लाजवाब लगे हैं. खासकर पा और पिंक तो उनकी यादगार फिल्में हैं. उन्होने साबित कर दिया की उनके कद और लोकप्रियता में कोई अभिनेता उनके सामने नहीं ठहरता. उनमें आज 75 वर्ष की उम्र में भी अभिनय को लेकर जो दिवानगी है वो किसी और में नजर नहीं आती. इसी लिए वो मिलेनियम सुपर स्टार हैं. हिंदी फिल्मों के वे पहले अभिनेता हैं जो 79 साल के बाद भी बालीवुड के लिए जरूरी बने हुए हैं. उनमें अभिनय के प्रति दिवानगी है. इसलिए आज भी वो उत्साह से लबरेज नजर आते हैं.

अच्छे गीत भी गाए

वैसे अमिताभ की आवाज गायकी के हिसाब से अच्छी नहीं कही जा सकती इसके बावजूद उन्होंने कुछ अच्छे गीत गाए हैं. पहला गीत मेरे पास आओ मेरे दोस्तों हिट तो हुआ पर उसे गीत कहने में भी संकोच होता है. लावारिस का गाना जिसकी बीबी मोटी भी जबर्दस्त हिट हुआ था पर मुझे खास पसंद नहीं. मुझे महान फिल्म का जिधर देखूं तेरी तस्वीर, सिलसिला का नीला आसमान और निशब्द का गीत काफी पसंद है.

बेहतरीन होस्ट

टीवी पर उनके केबीसी प्रोग्राम ने तो उन्हें शानदार एंकर के रूप में स्थापित कर दिया है. वे एक अच्छे होस्ट साबित हुए. अनजान लोगों से भी आत्मियता से बात कर उन्हें कार्यक्रम के लिए सहज बना लेते हैं. उनकी शानदार हिंदी के आगे कोई नहीं टिकता ना शाहरूख,ना आमिर और ना ही सलमान.

अमिताभ बच्चन मेरे ही नहीं मेरी पीढ़ी सहित कई पीढियों के सुपर स्टार हैं. उनको यह सफलता यूं ही नहीं मिली है इसके लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया है. प्रारंभ में लगातार 12 फिल्में फ्लॉप होने के बाद भी इन्होंने हार नहीं मानी वे मजबूती से डटे रहे और लगातार मेहनत, अनुशासन और काम के प्रति जबरदस्त समर्पण की बदौलत भारत के सबसे बड़े सुपर स्टार बने. इन्हें सदी का सबसे बड़े स्टार माना गया.

आज अमिताभ 79 साल के हो गए हैं लेकिन वो युवाओं को भी मात करने वाले जोशो-खरोश के साथ अपने काम में जुटे हुए हैं.आमतौर पर बहुत से लोग जहां 65 – 70 साल तक पहुंचते – पहुंचते रिटायर्मेंट वाले मोड में आ जाते हैं और खुद को काम से अलग कर बुड्ढा समझने लगते हैं और आरामतलब हो जाते हैं.

आप शतआयु हों,स्वस्थ्य रहें अच्छी फिल्में ही करें इस जन्मदिन पर यहीं शुभकामनाएं.

स्केच : प्रभात ठाकुर, कला निर्देशक, बॉलीवुड .

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