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भीमा कोरेगांव हिंसा :  बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, यह गहरी साजिश, तेलतुंबडे के सीपीआई माओवादी से संबंध की जांच हो

एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि साजिश की जड़ें बहुत गहरी हैं, जिसके नतीजे बेहद गंभीर हैं.  यह टिप्पणी न्यायमूर्ति बीपी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति एसवी कोतवाल की खंडपीठ ने आरोपी आनंद तेलतुंबडे की याचिका पर विचार करते हुए की.

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Mumbai : एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि साजिश की जड़ें बहुत गहरी हैं, जिसके नतीजे बेहद गंभीर हैं.  यह टिप्पणी न्यायमूर्ति बीपी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति एसवी कोतवाल की खंडपीठ ने आरोपी आनंद तेलतुंबडे की याचिका पर विचार करते हुए की. बता दें कि आनंद तेलतुंबडे ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने का अनुरोध किया था. तेलतुंबडे का दावा  था कि उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है. अपनी याचिका में तेलतुंबडे ने अपने खिलाफ लगाये गये सभी आरोपों का खंडन किया.  पुलिस ने दावा किया कि उसके पास तेलतुंबडे के खिलाफ काफी सबूत हैं. पीठ ने कार्यकर्ता की याचिका खारिज कर दी. सोमवार को पीठ ने कहा कि तेलतुंबडे के खिलाफ अभियोग चलाने लायक सामग्री है.  पीठ ने यह भी कहा, अपराध गंभीर है.  साजिश गहरी है और इसके बेहद गंभीर प्रभाव हैं. यह जरूरी है कि जांच एजेंसी को आरोपी के खिलाफ सबूत खोजने के लिए पर्याप्त मौका दिया जाये. जांच के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए पीठ ने कहा कि पुणे पुलिस के पास तेलतुंबडे के खिलाफ पर्याप्त सामग्री है और उनके खिलाफ लगाये गये आरोप आधारहीन नहीं हैं.

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लोक अभियोजक अरुणा कामत पाई ने हाई कोर्ट को पांच पत्र सौंपे

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हाई कोर्ट के अनुसार शुरू में पुलिस की जांच इस साल (2018) एक जनवरी को हुई हिंसा तक सीमित थी, जो पुणे के ऐतिहासिक शनिवारवाड़ा में हुई एलगार परिषद के एक दिन बाद हुई थी.  पीठ ने कहा, ‘बहरहाल, अब जांच का दायरा कोरेगांव-भीमा घटना तक सीमित नहीं है लेकिन घटना की वजह बनी गतिविधियां और बाद की गतिविधियां भी जांच का विषय हैं. पीठ ने कहा कि तेलतुंबडे के प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) से संबंध की जांच की जानी चाहिए.  न्यायमूर्तियों ने कहा, मौजूदा मामले में, याचिकाकर्ता (तेलतुंबडे) के खिलाफ आरोप और सामग्री, एक प्रतिबंधित संगठन के सदस्य होने के आरोप से ज्यादा है.  तेलतुंबडे की याचिका का विरोध करते हुए अतिरिक्त लोक अभियोजक अरुणा कामत पाई ने हाई कोर्ट को पांच पत्र सौंपे, जो आरोपियों ने कथित रूप से आपस में लिखे थे.  इनमें तेलतुंबडे का नाम सक्रिय सदस्य के तौर पर उल्लेखित है.

 

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