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भीमा-कोरेगांव हिंसा : SC ने रोमिला थापर की पुनर्विचार याचिका खारिज की

SC ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में पांच कथित नक्सल समर्थकों की गिरफ्तारी से संबंधित अपने फैसले पर पुनर्विचार से इनकार कर दिया है.

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NewDelhi : SC ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में पांच कथित नक्सल समर्थकों की गिरफ्तारी से संबंधित अपने फैसले पर पुनर्विचार से इनकार कर दिया है. अपने फैसले में सीजेआई रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बैंच ने कहा कि इतिहासकार रोमिला थापर की पुनर्विचार याचिका और उसके समर्थन में दिये आधारों को देखने के बाद 28 सितंबर के फैसले पर पुनर्विचार का कोई कारण नहीं बनता. बता दें कि रोमिला थापर ने पुनर्विचार याचिका पर ओपन कोर्ट में भी सुनवाई की गुहार लगाई थी, लेकिन बैंच ने इसे भी नहीं माना. नियमों के अनुसार फैसला सुनाने वाली बैंच ही पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करती है.  जान लें कि तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बैंच ने 28 सितंबर को बहुमत (2:1) के आधार पर इस मामले में फैसला सुनाया था.

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एसआईटी गठित करने की रोमिला थापर सहित पांच हस्तियों की मांग भी ठुकरा दी थी

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं.  इसलिए वर्तमान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने बैंच के दो अन्य सदस्यों के साथ पुनर्विचार याचिका पर निर्णय लिया. बता दें कि  सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को अपने फैसले में कहा था कि भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में पांच कथित नक्सल समर्थकों की गिरफ्तारी का मामला महज सरकार के लिए असहमति का भाव रखने या अलग राजनीतिक विचारधारा रखने से नहीं जुड़ा है, बल्कि प्रतिबंधित संगठन के सदस्यों के साथ उनके संबंधों और संगठन की गतिविधियों में शामिल होने से जुड़ा हुआ है.  इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने पांचों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की रोमिला थापर सहित पांच हस्तियों की मांग ठुकरा दी थी.  इस क्रम में कहा था कि आरोपी अपने मनमुताबिक जांच एजेंसी नहीं चुन सकते और न ही यह कह सकते हैं कि उनके अनुसार जांच हो.

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