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भीमा-कोरेगांव हिंसा : भड़काऊ भाषण देकर हिंसा के लिए उकसाने को लेकर 10 एक्टिविस्ट के खिलाफ चार्जशीट दायर

पुणे के सत्र न्यायालय में दायर किये गये आरोप पत्र में पांच फरार आरोपियों को भी सूचीबद्ध किया गया है. आरोप पत्र पांच हजार पन्नों से भी ज्यादा का है.

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 Mumbai : आखिरकार भीमा-कोरेगांव हिंसा के पूर्व आयोजित यलगार परिषद और प्रतिबंधित माओवादी संगठन से संबंध रखने के मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर कर दिया गया. बता दें कि पुणे के सत्र न्यायालय में दायर किये गये आरोप पत्र में पांच फरार आरोपियों को भी सूचीबद्ध किया गया है. आरोप पत्र पांच हजार पन्नों से भी ज्यादा का है. जान लें कि गिरफ्तार आरोपियों में सुधीर प्रह्लाद ढवले, रोना जेकब विल्सन, शोमा कांति सेन, महेश सीताराम राऊत, सुरेंद्र पुंडलीकराव गडलिंग शामिल हैं. इसके अलावा फरार आरोपियों में कॉमरेड मंगलु, कॉमरेड दीपू और किशन उर्फ प्रशांतो बोस, कॉमरेड एम उर्फ मिलिंद तेलतुंबड़े, कॉमरेड प्रकाश उर्फ नवीन उर्फ ऋतुपन गोस्वामी के नाम शामिल है. इन सभी पर आरोप है कि इन लोगों ने यलगार परिषद में भड़काऊ भाषण देकर समाज में द्वेष और सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काने का काम किया. इस काम के लिए प्रतिबंधित माओवादी संगठन की मदद ली गयी.

कहा गया कि सभा में भड़काऊ भाषण, गीत,   आदि के जरिए लोगों की भावनाएं भड़काई गयी. इसी कारण एक जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगांव में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए. इससे कानून व्यवस्था चरमरा गयी और हिंसा भड़क गयी, हिंसक लोगों न सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया.

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आरोपी हिंसा के बल पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को पलटने की साजिश रच रहे थे

आरोप पत्र के अनुसार जांच के क्रम पता चला कि आरोपियों का मकसद सिर्फ दो समाजों में वैमनस्य ही नहीं फैलाना था, बल्कि देश विरोधी कार्रवाई भी करनी था. आरोपी हिंसा के बल पर वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था को पलटने की साजिश रच रहे थे. इसके लिए आरोपी सुरेंद्र गडलिंग और शोमा सेन के जरिए पार्टी फंड भी दिया गया. सत्र न्यायालय में जमा आरोप पत्र के अनुसार जुलाई और अगस्त 2017 में प्रतिबंधित माओवादी (सीपीआई) आतंकी संगठन की वरिष्ठ समिति ने पार्टी फंड उपलब्ध कराया था. जांच में यह भी सामने आया कि यलगार परिषद आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य सीपीआई (माओवादी) के ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो की बैठक में तय लक्ष्य को हासिल करना था. इसके लिए फरार आरोपी कॉमरेड मंगलू, कॉमरेड दीपू पिछले दो माह से आरोपी क्रमांक एक सुधीर ढवले के संपर्क में रहकर पूरे राज्य के दलित संगठनों का समर्थन लेने में सफल रहे थे.

रोना विल्सन और प्रकाश उर्फ ऋतुपन गोस्वामी के पत्र व्यवहार से खुलासा हुआ कि  भीमा-कोरेगांव आंदोलन में उबाल लाने के लिए सुधीर ढवले, सुरेंद्र गडलिंग और शोमा सेन को पांच लाख रुपये दिये गये थे.  महेश राऊत ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के दो छात्रों को सीपीआई में भर्ती किया था. दोनों को जंगल मे भूमिगत रहकर सशस्त्र माओवादियों के कामकाज का प्रशिक्षण लेने के लिए माओवादियों के गुरिल्ला क्षेत्र में भी भेजा था.

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