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भीमा कोरेगांव हिंसाः मामले की जांच NIA को दिये जाने से केंद्र और महाराष्ट्र सरकार में ठनी

New Delhi: भीमा-कोरेगांव केस को लेकर केन्द्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार के बीच ठन गई है. दरअसल केन्द्र की मोदी सरकार ने मामले की जांच शुक्रवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) को सौंपने का फैसला किया है.

एनआइए जांच को लेकर महाराष्ट्र की शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस सरकार ने नाराजगी जाहिर की है. एक दिन पहले ही महाराष्ट्र सरकार ने साल 2018 में हुए भीमा-कोरेगांव हिंसा (Bhima Koregaon Violence) की समीक्षा का फैसला लिया था. महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में दर्ज चार्जशीट के रिव्यू को लेकर एक बैठक की थी.

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महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नाराज

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भीमा-कोरेगांव हिंसा की जांच एनआइए को सौंपे जाने पर महाराष्ट्र सरकार ने इसकी निंदा की. फैसले पर एतराज जताते हुए महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि इस विषय में महाराष्ट्र सरकार से पूछा तक नहीं गया.

उन्होंने ट्वीट किया कि जब राज्य सरकार इस मामले की तह में जा रही थी, तब ये फ़ैसला किया गया. एक दिन पहले ही महाराष्ट्र के गृह मंत्री और एनसीपी नेता अनिल देशमुख ने इसे लेकर गुरुवार को मीटिंग रखी थी. गृह मंत्री ने इस बारे में कहा था कि वह पुलिस को मिले सबूतों के आधार पर इस मामले की जानकारी मिलने के बाद ही इसकी समीक्षा करेंगे और किसी नतीजे तक पहुंचेंगे.

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2017 में भीमा कोरेगांव में हुई थी हिंसा

इस केस में महाराष्ट्र पुलिस ने 9 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और वकीलों को गिरफ्तार किया था. इन लोगों पर आरोप था कि उन्होंने एल्गार परिषद की 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में हुई बैठक में लोगों को कथित तौर पर भड़काया था. जिसके बाद अगले ही दिन भीमा कोरेगांव में जातीय हिंसा भड़क गई थी.

बता दें कि दलित समुदाय के लोग 250 साल पहले हुई दलितों और मराठाओं के बीच हुई लड़ाई में दलितों की जीत का जश्न मनाने के लिए वहां हर साल इकट्ठा होते हैं. पुलिस का आरोप था कि कार्यक्रम के आयोजकों के नक्सलियों से संबंध थे.

उल्लेखनीय है कि हाल ही में एनसीपी नेताओं ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर भीमा कोरेगांव हिंसा के आरोपियों के खिलाफ दर्ज किए गए सभी मामलों को बंद करने की मांग की थी.

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