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Bermo : #Dhori Mata का वार्षिक समारोह मनाया गया,  शोभा यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए

बड़ी धूमधाम से ढ़ोरी माता की शोभा यात्रा ढ़ोरी माता तीर्थालय से निकाली गयी. शोभा यात्रा का नेतृत्व हजारीबाग धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष बिशप आनंद जोजो डीडी कर रहे थे. शोभा यात्रा में स्थानीय सेवा दल के साथी भी मौजूद थे.

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Bermo : बेरमो अनुमंडल के बोकारो थर्मल थाना अंतर्गत जारंगडीह स्थित ढोरी माता तीर्थालय में शनिवार को दो दिवसीय वार्षिक समारोह काफी धूमधाम से मनाया गया. समारोह को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे. बेरमो एएसपी सह एसडीपीओ अंजनी अंजन स्वयं बोकारो थर्मल के इंस्पेक्टर उमेश कुमार ठाकुर एवं पुलिस के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल रहे थे.

इसके पूर्व बड़ी धूमधाम से ढ़ोरी माता की शोभा यात्रा ढ़ोरी माता तीर्थालय से निकाली गयी. शोभा यात्रा का नेतृत्व हजारीबाग धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष बिशप आनंद जोजो डीडी कर रहे थे. शोभा यात्रा में स्थानीय सेवा दल के साथी भी मौजूद थे.

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श्रद्धालु विदेशों से भी आकर पूजा-अर्चना करते हैं

हजारों की संख्या में श्रद्धालु शोभा यात्रा में शामिल हुए.शोभा यात्रा ढ़ोरी माता तीर्थालय से निकल कर जारंगडीह परियोजना के उत्खनन विभाग के मुख्य द्वार तक गयी. वहां से पुनः यात्रा तीर्थालय पंहुची. शोभा यात्रा की वापसी के बाद श्रद्धालुओं ने ढोरी माता का दर्शन कर मन्नत मांगी. पल्ली पुरोहित ने मिस्सा पूजा व प्रार्थना करवाई. विदित हो कि ढ़ोरी माता का वार्षिक समारोह प्रत्येक वर्ष अक्टूबर माह के अंतिम शनिवार व रविवार को मनाया जाता है. वार्षिक समारोह में राज्य ही नहीं देश के विभिन्न राज्यों एवं प्रांतों तथा विदेश से भी श्रद्धालु आकर पूजा-अर्चना करते हैं.

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समारोह में दो दिनों तक मेला लगता है

समारोह में दो दिनों तक मेला लगता है. शोभा यात्रा में हजरीबाग धर्मप्रान्त के धर्माध्यक्ष बिशप आंनद जोजो के अलावा माईकल लकड़ा,फादर प्रदीप टोप्पो,नोर्बट लकड़ा के साथ पुरोहितगण,सिस्टर,प्रबंध समिति के लोग शामिल थे.शोभा यात्रा के बाद श्रद्धालुओ का तांता मोमबती एवं अगरबती जलाकर मनोकामना मांगने के लिए देखा गया. ऐसी मान्यता है कि ढ़ोरी माता का दर्शन कर श्रद्धालुओं के द्वारा सच्चे मन से मांगी गयी मुराद अवश्य ही पूरी होती है.यही कारण है कि दो दिवसीय वार्षिक समरोह में ईसाई धर्मावलंबियों के अलावा सभी धर्म के लोग दर्शन कर मुरादें मांगने आया करते हैं.

ढोरी माता की लकड़ी की प्रतिमा मिली थी

मान्यता है कि वर्षों पूर्व ढ़ोरी के कोयला खदान में एक खनिक के द्वारा कोयला काटने के दौरान ढ़ोरी माता की लकड़ी की प्रतिमा मिली थी. प्रतिमा के हाथ में एक शिशु के होने से इसे ढ़ोरी माता का नाम दिया गया.चूंकि हिंदू धर्म में किसी भी देवी के हाथ में शिशु का कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है इसलिए ईसाई धर्मावलंबियों ने इसे माता मरियम की संज्ञा दिया जिसकी गोद में प्रभु यीशु है.उसी समय से प्रतिमा को ढ़ोरी माता तीर्थालय में स्थापित कर पूजा अर्चना की जाने लगी.प्रत्येक वर्ष अक्टूवर माह के अंतिम शनिवार एवं रविवार को वार्षिक समारोह मनाया जाता है.रविवार को प्रार्थना,मिस्सा पूजा एवं समारोही प्रवचन के बाद महोत्सव का समापन किया जाएगा.

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